भारतीय फैमिली बिज़नेस: ग्रोथ का ज़बरदस्त जोश, पर टेक्नोलॉजी और गवर्नेंस में दिख रही कमी!

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AuthorAditya Rao|Published at:
भारतीय फैमिली बिज़नेस: ग्रोथ का ज़बरदस्त जोश, पर टेक्नोलॉजी और गवर्नेंस में दिख रही कमी!
Overview

PwC के 12वें ग्लोबल फैमिली बिज़नेस सर्वे के अनुसार, **91%** भारतीय पारिवारिक व्यवसाय (Family Businesses) भविष्य की ग्रोथ को लेकर जबरदस्त आशावादी हैं। इनमें से **55%** कंपनियां आक्रामक विस्तार (Aggressive Expansion) की योजना बना रही हैं, जो वैश्विक औसत से काफी आगे है। हालांकि, टेक्नोलॉजी को अपनाने और गवर्नेंस के मामले में एक बड़ी खाई दिख रही है, जो उनकी लॉन्ग-टर्म कॉम्पिटिटिवनेस को प्रभावित कर सकती है।

उम्मीदों के पीछे की हकीकत

भारतीय पारिवारिक व्यवसाय (Family Businesses) विकास की मजबूत उम्मीदें दिखा रहे हैं। PwC के सर्वे में 91% भारतीय कंपनियों ने भविष्य के लिए आशावाद व्यक्त किया है, जबकि दुनिया भर में यह आंकड़ा 73% पर है। विस्तार की योजनाओं की बात करें तो 55% भारतीय फर्म्स आक्रामक विस्तार की तैयारी में हैं, जो वैश्विक स्तर पर केवल 16% है। यह जोश भारत की मजबूत घरेलू मांग और 6.4% से 7.4% के बीच अनुमानित जीडीपी ग्रोथ (Financial Year 2026-27) से प्रेरित है।

टेक्नोलॉजी और गवर्नेंस में पिछड़ती रफ्तार

डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन (Digital Transformation) और AI को प्राथमिकता देने वाली भारतीय कंपनियों का प्रतिशत (39%) ग्लोबल एवरेज (24%) से ज्यादा है। लेकिन, असल में टेक्नोलॉजी अपनाने में ये कंपनियां धीमी हैं। 24% भारतीय फर्म्स टेक्नोलॉजी को सेलेक्टिव या कॉशस एडॉप्टर (selective or cautious adopters) मानती हैं, जबकि दुनिया भर में यह आंकड़ा सिर्फ 8% है। केवल 15% ही उभरती टेक्नोलॉजीज के अर्ली एडॉप्टर्स (early adopters) हैं।

गवर्नेंस के मोर्चे पर भी स्थिति चिंताजनक है। आधे से ज्यादा (52%) भारतीय फैमिली बिज़नेस में क्रॉस-इंडस्ट्री बोर्ड रिप्रेजेंटेशन (cross-industry board representation) का अभाव है, जबकि ग्लोबल औसत 29% है। इसी तरह, 42% कंपनियों के बोर्ड में कोई महिला सदस्य नहीं है, जो ग्लोबल आंकड़े 32% से अधिक है। बोर्ड में विविधता की कमी, बड़े टेक्नोलॉजी निवेशों को मंजूरी देने और डिजिटल जोखिमों की निगरानी में बाधा डाल सकती है।

उत्तराधिकार योजना: एक अनसुलझा मसला

नेतृत्व उत्तराधिकार योजना (Succession Planning) एक और गंभीर चुनौती बनकर उभरी है। 36% भारतीय फैमिली बिज़नेस के पास कोई स्पष्ट योजना नहीं है, जो वैश्विक औसत 28% से ज्यादा है। 52% कंपनियां वरिष्ठ पीढ़ी के विरोध को इसका मुख्य कारण बताती हैं, जिसके चलते 21% व्यवसायों में नेतृत्व परिवर्तन में देरी हो रही है, जो ग्लोबल आंकड़े 10% का दोगुना है। यह अनिश्चितता, सांस्कृतिक बाधाओं और अनौपचारिक गवर्नेंस के साथ मिलकर, विवादों को जन्म दे सकती है और भविष्य के फैसलों में रुकावट पैदा कर सकती है।

आगे की राह: चुनौतियों से निपटना ज़रूरी

भारतीय पारिवारिक व्यवसायों का आशावाद, उनकी अंदरूनी कमजोरियों को छिपा रहा है जो उनकी विकास योजनाओं को पटरी से उतार सकती हैं। टेक्नोलॉजी को अपनाने में उनकी हिचकिचाहट और गवर्नेंस में खामियां, उन्हें ग्लोबल पीयर्स की तुलना में कम फुर्तीला बना सकती हैं, जो AI और एडवांस्ड एनालिटिक्स का उपयोग कर रहे हैं।

अपनी महत्वाकांक्षाओं को हकीकत में बदलने के लिए, इन कंपनियों को टेक्नोलॉजी को अपनाने की अपनी सतर्कता को दूर करना होगा और गवर्नेंस को मजबूत करना होगा। नेतृत्व उत्तराधिकार को प्रोफेशनल बनाना और इंटेलिजेंस-लेड डिसीजन-मेकिंग (intelligence-led decision-making) में निवेश करना, भारत की आर्थिक गतिशीलता का लाभ उठाने और वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था में अपनी प्रतिस्पर्धी बढ़त बनाए रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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