साल 2026 के जुलाई तक, भारतीय इक्विटी (Equity) फंड्स से **$9.26 बिलियन** का भारी Outflow देखा गया है। यह तब हुआ है जब ग्लोबल इमर्जिंग मार्केट्स (Emerging Markets) में **$25 बिलियन** का जबरदस्त इनफ्लो हुआ है। इस पूंजी की कमी के चलते, भारतीय शेयर बाजार डॉलर के मुकाबले **10.2%** गिरा है, और रुपये में भी **6.6%** की कमजोरी आई है।
Detailed Coverage
ग्लोबल मार्केट में 'रिस्क-ऑन' का माहौल
ग्लोबल निवेशकों ने इमर्जिंग मार्केट इक्विटी फंड्स में रिकॉर्ड $25 बिलियन का निवेश किया है, जो अप्रैल 2025 के बाद सबसे बड़ी साप्ताहिक उछाल है। लेकिन, भारतीय बाजार इस लहर से अछूता रहा। साल 2026 की शुरुआत से ही भारत से लगातार पूंजी का बहिर्गमन (Outflow) जारी है। अब तक, कुल $9.26 बिलियन का Outflow हो चुका है, और यह ट्रेंड अभी भी जारी है।
गिरते शेयर और कमजोर रुपया
पूंजी की कमी के साथ-साथ भारतीय शेयरों और रुपये में भी भारी गिरावट देखी गई है। BofA ग्लोबल रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, डॉलर के मुकाबले भारतीय इक्विटी इस साल सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले बाजारों में से एक रही है, जिसमें 10.2% की गिरावट आई है। चीन, जो 9.6% की गिरावट के साथ दूसरे स्थान पर है, से भी भारत पीछे रह गया। इसके अलावा, भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 6.6% कमजोर हुआ है, जो इस समूह की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में से एक है।
टेक और फाइनेंस में निवेश, भारत में नहीं
रिकॉर्ड इनफ्लो का मुख्य कारण टेक्नोलॉजी और फाइनेंस शेयरों में भारी निवेश रहा। अकेले टेक्नोलॉजी सेक्टर में इस हफ्ते $15.6 बिलियन आए, जो एक रिकॉर्ड है। फाइनेंस शेयरों की मांग भी जनवरी 2026 के बाद सबसे मजबूत रही। जबकि अमेरिका, जापान और यूरोप जैसे प्रमुख बाजारों ने इन क्षेत्रों में निवेश का लाभ उठाया, भारत के बाजार को इस 'रिस्क-ऑन' (Risk-on) सेंटीमेंट का खास फायदा नहीं मिला।
आगे क्या?
हालांकि इमर्जिंग मार्केट्स में $25 बिलियन का इनफ्लो बड़ा है, लेकिन 2026 में कुल इक्विटी निवेश अभी भी $95.3 बिलियन के Outflow में है। BofA के बुल एंड बेयर इंडिकेटर (Bull & Bear Indicator) 9.6 पर है, जो अत्यधिक बुलिश (Bullish) संकेत देता है और एक 'सेल' सिग्नल माना जाता है। विश्लेषकों का मानना है कि यह इनफ्लो फंडामेंटल बदलाव की बजाय इंस्टीट्यूशनल निवेशकों की भीड़ का संकेत हो सकता है। ऐसे में, निवेशक उन बाजारों को चुन रहे हैं जहां कमजोरी कम हो, और इसीलिए भारत जैसे बाजार, जहां लगातार मूल्य और मुद्रा में कमजोरी दिख रही है, अनदेखे हो रहे हैं।
यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह Outflow जारी रहता है या नहीं, और क्या आने वाले समय में भारत के बाजार में फिर से निवेश बढ़ता है। निवेशकों को FII डेटा, डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल और घरेलू नतीजों पर नजर रखनी चाहिए।
