विदेशों से भारत को बड़ी सौगात! भारतीय डायस्पोरा ने भेजा **$138 अरब**, 10 साल में दोगुना हुआ रेमिटेंस

ECONOMY
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AuthorKaran Malhotra|Published at:
विदेशों से भारत को बड़ी सौगात! भारतीय डायस्पोरा ने भेजा **$138 अरब**, 10 साल में दोगुना हुआ रेमिटेंस
Overview

विदेशों में बसे भारतीय (Indian Diaspora) भारत के लिए कमाई का एक बड़ा ज़रिया बन गए हैं। पिछले एक दशक में, भारत में भेजे गए रेमिटेंस (Remittances) दोगुने हो गए हैं और अब यह आंकड़ा सालाना **$138 अरब** (Billion) तक पहुंच गया है। यह पैसा मुख्य रूप से अमेरिका (US), यूके (UK), कनाडा (Canada) और ऑस्ट्रेलिया (Australia) जैसे देशों से आ रहा है, जो भारत की वित्तीय मजबूती को और बढ़ा रहा है। प्रवासी भारतीयों की बढ़ती कमाई और प्रभाव, भारतीय स्टार्टअप्स (Startups) और परोपकारी पहलों (Philanthropic Initiatives) में महत्वपूर्ण निवेश को भी बढ़ावा दे रहा है।

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प्रवासी भारतीयों की बढ़ती आर्थिक ताकत

भारतीय डायस्पोरा की लगातार बढ़ती आर्थिक ताकत के चलते देश में आने वाले रेमिटेंस (Remittances) पिछले एक दशक में दोगुने हो गए हैं। यह प्रेषण (Remittances) अब सालाना $138 अरब (Billion) तक पहुंच गया है। यह बड़ी रकम मुख्य रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका (United States), यूनाइटेड किंगडम (United Kingdom), कनाडा (Canada) और ऑस्ट्रेलिया (Australia) जैसे देशों से आ रही है। विभिन्न स्रोतों से आने वाला यह पैसा भारत की वित्तीय स्थिरता (Financial Resilience) को और मजबूत करता है।

इंडियास्पोरा (Indiaspora) के बोर्ड सदस्य राजन नवानी (Rajan Navani) ने इस महत्वपूर्ण आर्थिक योगदान पर जोर देते हुए कहा, "भारतीय डायस्पोरा हर साल $138 अरब भारत भेजता है, जो कि एफडीआई (FDI) से भी ज्यादा है।" रिपोर्ट से पता चलता है कि दुनिया भर में फैले 3.5 करोड़ (35 Million) सदस्यों वाले भारतीय डायस्पोरा की सालाना कमाई $700 अरब (Billion) से अधिक है, जो उनकी पेशेवर सफलता और उद्यमी भावना को दर्शाता है।

सिर्फ प्रेषण से कहीं ज़्यादा: स्टार्टअप्स और परोपकार को मिली नई ऊर्जा

भारतीय डायस्पोरा का प्रभाव सीधे वित्तीय प्रेषण से कहीं बढ़कर है। अब विदेशों में बैठे भारतीय मूल के एंजेल निवेशक (Angel Investors) भारतीय स्टार्टअप्स (Startups) को फंड देने वालों में 75% से ज़्यादा का योगदान दे रहे हैं। वे न केवल ज़रूरी पूंजी ला रहे हैं, बल्कि अपनी विशेषज्ञता से देश के टेक सेक्टर (Tech Sector) को भी आगे बढ़ा रहे हैं। भारतीय मूल के नेता दुनिया भर के बड़े फाउंडेशन्स (Foundations) का नेतृत्व भी कर रहे हैं, जो सालाना $50 करोड़ (500 Million) से अधिक की राशि भारतीय गैर-लाभकारी संगठनों (Non-profits) को दान कर रहे हैं और परोपकारी प्राथमिकताओं को आकार दे रहे हैं।

क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं पर असर

रेमिटेंस घरेलू स्तर पर तो महत्वपूर्ण भूमिका निभाते ही हैं, साथ ही ये स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं पर भी गहरा असर डालते हैं। केरल (Kerala) जैसे राज्यों में, यह पैसा घर बनाने, लोन चुकाने और शिक्षा के लिए बेहद ज़रूरी है। गौर करने वाली बात यह है कि केरल, देश की कुल आबादी का सिर्फ 3% होने के बावजूद, भारत के कुल रेमिटेंस का लगभग 20% प्राप्त करता है, जो दर्शाता है कि इन प्रवाहों का विशिष्ट क्षेत्रों पर कितना गहरा प्रभाव पड़ता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.