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Vedanta, Apollo Hospitals का बड़ा प्लान: FY27 में कंपनियों का बंटवारा, शेयरधारकों को फायदा या घाटा?

ECONOMY
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Vedanta, Apollo Hospitals का बड़ा प्लान: FY27 में कंपनियों का बंटवारा, शेयरधारकों को फायदा या घाटा?
Overview

नए फाइनेंशियल ईयर **2027** (FY27) से पहले, Vedanta और Apollo Hospitals जैसी कई दिग्गज भारतीय कंपनियाँ अपने बिजनेस यूनिट्स को अलग-अलग लिस्टेड कंपनियों में बाँटने की योजना बना रही हैं। इस 'डीमर्जर' (Demerger) का मुख्य मकसद शेयरधारकों के लिए वैल्यू अनलॉक करना है, लेकिन एग्जीक्यूशन की चुनौतियों के कारण बाजार की प्रतिक्रिया मिली-जुली है।

नए दौर की तैयारी: कंपनियों का बंटवारा क्यों?

FY27 की शुरुआत से पहले, भारतीय कॉर्पोरेट जगत में बड़े बदलावों की आहट है। कई बड़ी कंपनियाँ अपने बिजनेस यूनिट्स को अलग-अलग पब्लिकली ट्रेडेड एंटिटीज में बाँटने की तैयारी कर रही हैं। इसका मुख्य मकसद कॉम्प्लेक्स स्ट्रक्चर को आसान बनाना, शेयरधारकों के लिए वैल्यू अनलॉक करना और कामकाज को और बेहतर बनाना है। एनालिस्ट्स का मानना है कि इससे कंपनियों की स्ट्रैटजी क्लियर होगी और मार्केट वैल्यूएशन भी ज्यादा सटीक होगा।

बड़े 'डीमर्जर' प्लान्स

  • Vedanta Limited अपने बड़े माइनिंग और मेटल्स बिजनेस को 5 अलग-अलग लिस्टेड कंपनियों में बाँटेगी। यह बदलाव 1 अप्रैल, 2026 से लागू होने की उम्मीद है।
  • Apollo Hospitals Enterprise Ltd अपने फार्मेसी और डिजिटल हेल्थ ऑपरेशंस को मिलाकर Apollo Healthtech Limited बना रही है। यह मर्जर Q4FY27 तक पूरा हो सकता है।
  • Thomas Cook (India) Ltd अपने रिसॉर्ट बिजनेस को Sterling Holiday Resorts Limited के तौर पर अलग करेगी, जिसके अगले 15-18 महीनों में पूरा होने की उम्मीद है।
  • Natco Pharma अपनी एग्रोकेमिकल्स डिविजन को Natco Crop Health Sciences Ltd में बाँट रही है, जिसकी तय तारीख 1 अक्टूबर, 2026 है।
  • Religare Enterprises Ltd अपने इंश्योरेंस और फाइनेंशियल सर्विसेज बिजनेस को दो अलग कंपनियों में बाँटने का लक्ष्य Q1FY28 तक रखती है।

एग्जीक्यूशन की राह में बाधाएँ

हालांकि, इन डीमर्जर्स का असली फायदा इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनियाँ इन्हें कितनी अच्छी तरह अंजाम देती हैं।

  • Vedanta पर करीब $11 बिलियन का भारी कर्ज है। कंपनी को इस कर्ज को 5 नई कंपनियों में बाँटना होगा, जबकि वह कर्ज घटाने का लक्ष्य भी रखती है। मई 2024 से Vedanta के शेयर में खास हलचल न दिखना बाजार की सतर्कता को दर्शाता है। Vedanta के 5 एंटिटीज में बँटने से 2.1190 के डेट-टू-इक्विटी रेश्यो के साथ रिफाइनेंसिंग और कर्ज चुकाना एक बड़ी चुनौती होगी।
  • Apollo Hospitals को 'Buy' रेटिंग मिल रही है, लेकिन इसके हाई P/E रेश्यो पर सवाल उठ रहे हैं। डिजिटल हेल्थ को हॉस्पिटल नेटवर्क से जोड़ना एक जटिल काम है। Apollo HealthCo का वैल्यूएशन ₹400 बिलियन के आसपास आंका जा रहा है, जो अनुमानित FY27 EBITDA और 26x मल्टीपल पर आधारित है।
  • Natco Pharma की एग्रोकेमिकल्स डिविजन, जो FY25 के रेवेन्यू का मात्र 1.48% थी, अब UPL Ltd. और PI Industries जैसे दिग्गजों से मुकाबला करेगी। Natco Pharma का P/E रेश्यो 11x है, जो फार्मा इंडस्ट्री के औसत 25.6x से काफी कम है। साथ ही, US FDA के पिछले रेगुलेटरी मुद्दे भी चिंताएं बढ़ाते हैं।
  • Religare Enterprises के डीमर्जर की खबर से शेयर में 10% की गिरावट आई और MarketsMojo ने 'Strong Sell' रेटिंग दी, जो निवेशकों के भरोसे की कमी को दिखाता है।

सेक्टर का कैसा है माहौल?

  • Vedanta के P/E रेश्यो 11.2x से 21.88x तक हैं, जो Hindalco के मुकाबले प्रतिस्पर्धी हैं पर Tata Steel से कम। हालांकि, मेटल्स और माइनिंग सेक्टर में अच्छे आर्थिक रुझान दिख रहे हैं।
  • Apollo Hospitals का P/E रेश्यो 58x से ऊपर है, जो काफी महंगा माना जा रहा है।
  • Thomas Cook (India) का P/E लगभग 16.8x है।
  • Religare Enterprises को तो निवेशकों की शंकाओं को दूर करना होगा, खासकर फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस जैसे प्रतिस्पर्धी क्षेत्रों में।

आगे क्या?

आखिरकार, इन नई कंपनियों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे अपने दम पर कितनी वैल्यू बना पाती हैं, कर्ज का प्रबंधन कैसे करती हैं और बाजार में अपनी पोजीशन कैसे मजबूत करती हैं। एनालिस्ट्स Vedanta और Apollo HealthCo के लिए अच्छे EBITDA और EPS ग्रोथ का अनुमान लगा रहे हैं, लेकिन यह सब एग्जीक्यूशन पर टिका है।

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