शिखर वार्ता और पश्चिम एशिया का समीकरण
खासकर, अमेरिका और चीन के राष्ट्राध्यक्षों की शिखर वार्ता पर सबकी नजर है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या चीन पश्चिम एशिया में, खासकर ईरान पर, किसी तरह का दबाव बनाता है। यदि इस वार्ता से कोई सकारात्मक समाधान निकलता है, तो यह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण तेल शिपिंग रूट को लेकर चिंताओं को कम कर सकता है, जिससे सप्लाई में रुकावट के डर को कम किया जा सकता है।
तेल की ऊंची कीमतें और महंगाई का डर
हालांकि, तात्कालिक फोकस $106 प्रति बैरल के आसपास चल रही ब्रेंट क्रूड की कीमतों पर बना हुआ है, जो 0.4% ऊपर है। यह लगातार बने रहने वाले जियो-पॉलिटिकल जोखिमों को दर्शाता है। तेल की लगातार ऊंची कीमतें भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चिंता का विषय हैं, क्योंकि यह महंगाई की उम्मीदों को बढ़ाती हैं और घरेलू बॉन्ड यील्ड्स को ऊपर धकेल सकती हैं, जिससे किसी भी तत्काल लाभ को बेअसर किया जा सकता है।
यूएस ट्रेजरी यील्ड्स का संकेत
बाजार सहभागियों की नजरें यूएस ट्रेजरी यील्ड्स पर भी टिकी हैं। बेंचमार्क अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 4.50% के निशान के आसपास मंडरा रही है। यह अप्रैल के 3.5% के महंगाई आंकड़े के बाद आया है, जो अप्रैल 2022 के बाद सबसे अधिक था, और अमेरिकी अर्थव्यवस्था में निरंतर मूल्य दबावों को दर्शाता है।
भारत का महंगाई का हाल
भारत में, अप्रैल का महंगाई आंकड़ा 3.48% रहा, जो मार्च के 3.4% से थोड़ा अधिक है। यह डेटा, अस्थिर वैश्विक तेल कीमतों के साथ मिलकर, मौद्रिक नीति और फिक्स्ड-इन्कम मार्केट के लिए एक चुनौतीपूर्ण माहौल तैयार करता है।
