सरकार की ₹32,000 करोड़ की साप्ताहिक बॉन्ड नीलामी से पहले, भारतीय सरकारी बॉन्ड स्थिर बने हुए हैं। 10-वर्षीय यील्ड (Yield) **6.75%** पर है, क्योंकि निवेशक विदेशी खरीदारों से लगातार आ रही मांग और ग्लोबल कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बीच संतुलन बना रहे हैं।
बॉन्ड मार्केट में क्यों है स्थिरता?
17 जुलाई को भारतीय सरकारी बॉन्ड मार्केट में ज़्यादा हलचल देखने को नहीं मिली। इसका मुख्य कारण सरकार की साप्ताहिक बॉन्ड नीलामी है। इस नीलामी से पहले ट्रेडर्स (Traders) आमतौर पर सतर्क रहते हैं। बेंचमार्क 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड (Yield) पिछले दिन के मुकाबले लगभग 6.75% पर स्थिर है। बड़े उधार लेने वाले इवेंट्स से पहले यह एक आम बात है, क्योंकि निवेशक नई डेट सिक्योरिटीज (Debt Securities) के लिए मांग का इंतज़ार करते हैं।
₹32,000 करोड़ की नीलामी
आगामी नीलामी में सरकार तीन-वर्षीय और अल्ट्रा-लॉन्ग टेनर बॉन्ड (Ultra-long tenor bonds) बेचकर ₹32,000 करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखती है। इस नीलामी में तय होने वाले फाइनल यील्ड्स (Yields) मार्केट सेंटिमेंट (Market Sentiment) का अहम इंडिकेटर (Indicator) होंगे। यह वह ब्याज दर दर्शाएगा जो सरकार को बाजार से उधार लेने के लिए चुकानी पड़ेगी। ज़्यादा यील्ड्स का मतलब है कि निवेशक सरकारी डेट (Debt) रखने के लिए ज़्यादा रिटर्न की मांग कर रहे हैं, जबकि कम यील्ड्स ज़्यादा मांग का संकेत देते हैं।
ग्लोबल फैक्टर्स का असर
हालांकि घरेलू नीलामी पर मुख्य फोकस है, लेकिन ग्लोबल फैक्टर्स (Global Factors) बॉन्ड मार्केट को प्रभावित कर रहे हैं। तेल की कीमतें एक बड़ी चिंता बनी हुई हैं, ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) लगभग $85 प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है। तेल की ऊंची कीमतें महंगाई को बढ़ा सकती हैं, जिससे बॉन्ड यील्ड्स पर दबाव पड़ता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि निवेशक बढ़ती लागत से निपटने के लिए ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रहने की उम्मीद करते हैं। इसके अलावा, पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical tensions) ने ग्लोबल मार्केट्स को सतर्क कर दिया है, जिससे कुछ निवेशक इमर्जिंग मार्केट डेट (Emerging market debt) के बजाय सेफ-हेवन एसेट्स (Safe-haven assets) को तरजीह दे रहे हैं।
विदेशी निवेश और इंडेक्स सपोर्ट
इन ग्लोबल दबावों के बावजूद, भारतीय डेट (Debt) अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को आकर्षित कर रहा है। इस मांग का एक मुख्य कारण फुली एक्सेसिबल रूट (Fully Accessible Route - FAR) है, जो विदेशी निवेशकों को बिना किसी निवेश सीमा के विशेष भारतीय सरकारी बॉन्ड खरीदने की अनुमति देता है। डेटा से पता चलता है कि इस रूट से इनफ्लो (Inflow) मजबूत बना हुआ है, जो कुल मिलाकर $4.5 बिलियन से अधिक है। कई निवेशक भारतीय बॉन्ड के प्रमुख ग्लोबल इंडेक्स (Global Indices), जैसे ब्लूमबर्ग इंडेक्स (Bloomberg index) में संभावित शामिल होने की खबरों का भी इंतजार कर रहे हैं। यदि ऐसा होता है, तो यह उन ग्लोबल फंड्स (Global Funds) से बड़े पैमाने पर इनफ्लो को ट्रिगर कर सकता है जो इन इंडेक्स को ट्रैक करते हैं।
अमेरिका से राहत
संयुक्त राज्य अमेरिका में, बॉन्ड मार्केट कुछ राहत प्रदान कर रहा है। हाल के डेटा के अनुसार, महंगाई कम होने के संकेत मिले हैं, जिसके बाद अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड (U.S. 10-year Treasury yield) लगभग 4.55% पर चल रहा है। इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व (U.S. Federal Reserve) द्वारा आक्रामक ब्याज दर में बढ़ोतरी की चिंताएं कम हुई हैं, जिससे ग्लोबल बॉरोइंग कॉस्ट (Borrowing costs) अधिक अनुमानित बनी हुई है। अब निवेशक ₹32,000 करोड़ की नीलामी के नतीजों पर ध्यान केंद्रित करेंगे ताकि यह पता चल सके कि आने वाले दिनों में यील्ड्स को स्थिर रखने के लिए स्थानीय मांग पर्याप्त है या नहीं।
