भारतीय सरकारी बॉन्डों में लगातार दूसरे दिन तेजी देखी गई है। अमेरिका से आए महंगाई के आंकड़ों में नरमी के संकेत मिलने से वैश्विक ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंकाएं कम हो गई हैं। इसके चलते बेंचमार्क 2036 बॉन्ड पर यील्ड घटकर **6.74%** पर आ गई है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और सरकारी बैंकों व विदेशी निवेशकों की लगातार खरीदारी ने भी इस तेजी को सहारा दिया है।
अमेरिकी महंगाई और बॉन्ड मार्केट का कनेक्शन
गुरुवार की सुबह भारतीय सरकारी बॉन्ड की कीमतों में रिकवरी जारी रही, जो लगातार दूसरे दिन की बढ़त है। 2036 में मैच्योर होने वाले 6.94% वाले बेंचमार्क बॉन्ड की यील्ड सुबह 11:10 IST तक 3 बेसिस पॉइंट गिरकर 6.7436% पर पहुंच गई। इस हफ्ते की शुरुआत में यील्ड तीन सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंच गई थी, जिससे बॉन्ड मार्केट दबाव में था।
यह रिकवरी मुख्य रूप से अमेरिका से आए कमजोर इकोनॉमिक डेटा की वजह से हुई है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, पिछले महीने अमेरिका में प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) में अप्रत्याशित रूप से 0.3% की गिरावट आई है। इस खबर से निवेशकों को फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की उम्मीदें कम हो गई हैं। फ्यूचर्स मार्केट अब जुलाई में रेट हाइक की बहुत कम संभावना और सितंबर में बढ़ोतरी की घटती संभावना का संकेत दे रहे हैं, जिससे उभरते बाजारों (Emerging Markets) के डेट (Debt) को लेकर वैश्विक सेंटीमेंट में सुधार हुआ है।
ग्लोबल फैक्टर्स और डोमेस्टिक डिमांड का असर
अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नरमी अक्सर भारतीय डेट मार्केट को राहत देती है, क्योंकि इससे रुपये पर दबाव कम होता है और घरेलू उधार की लागत घटती है। इसके अलावा, ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें $85 प्रति बैरल से नीचे आ गई हैं। भारत के लिए यह गिरावट महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे इम्पोर्टेड इन्फ्लेशन (आयातित महंगाई) की चिंताएं कम होती हैं, जो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के मॉनेटरी पॉलिसी निर्णयों में एक बड़ा फैक्टर है।
घरेलू स्तर पर भी बॉन्ड में निवेश मजबूत बना हुआ है। सरकारी बैंकों ने पिछले तीन ट्रेडिंग सत्रों में लगभग ₹15,600 करोड़ के बॉन्ड खरीदे हैं, जिससे कीमतों को सहारा मिला है। इसके अलावा, विदेशी निवेशकों की भागीदारी भी एक महत्वपूर्ण थीम बनी हुई है। 1 जून से, इन निवेशकों ने फुली एक्सेसिबल रूट (FAR) बॉन्ड में $4.2 बिलियन से अधिक का निवेश किया है, जिसका मुख्य कारण ब्लूमबर्ग ग्लोबल एग्रीगेट इंडेक्स में भारत के संभावित शामिल होने को लेकर बाजार का ऑप्टिमिज्म है।
इन्फ्लेशन आउटलुक और मार्केट इंडिकेटर्स
घरेलू महंगाई को लेकर आर्थिक अनुमानों ने भी बाजार को कुछ राहत दी है। नोमुरा (Nomura) के विश्लेषकों का अनुमान है कि जुलाई में महंगाई दर 4.0% (YoY) रह सकती है, जो जून के 4.4% से कम है। वित्तीय वर्ष 2027 के लिए उनके अनुमानों के अनुसार, महंगाई 4.6% और करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) जीडीपी का 1.2% रहने की उम्मीद है। ये आंकड़े इस विचार का समर्थन करते हैं कि RBI ब्याज दरों को लंबे समय तक स्थिर रख सकता है।
टेक्निकल इंडिकेटर्स भी मौजूदा सेंटीमेंट को दर्शाते हैं, जिसमें बेंचमार्क यील्ड अब 21-दिन के मूविंग एवरेज से नीचे कारोबार कर रही है। इसके साथ ही, भारत के ओवरनाइट इंडेक्स स्वैप (OIS) में भी नरमी आई है। 1-year स्वैप रेट 3.5 बेसिस पॉइंट गिरकर 5.8975% पर आ गया, जबकि 2-year रेट 6 बेसिस पॉइंट गिरकर 6.06% पर पहुंच गया। निवेशक अमेरिकी इकोनॉमिक अपडेट्स और सेंट्रल बैंक की कमेंट्री में किसी भी बदलाव पर नजर बनाए रखेंगे, क्योंकि ये बॉन्ड यील्ड की अस्थिरता के मुख्य ड्राइवर बने रहेंगे।
