Indian Bonds Rally: तेल कीमतों और अमेरिकी यील्ड में गिरावट से बॉन्ड मार्केट में तेजी

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AuthorNeha Patil|Published at:
Indian Bonds Rally: तेल कीमतों और अमेरिकी यील्ड में गिरावट से बॉन्ड मार्केट में तेजी

भारतीय सरकारी बॉन्ड में लगातार तीसरे दिन तेजी आई है, क्योंकि क्रूड ऑयल की कीमतों और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट दर्ज की गई है। अब सभी की निगाहें ₹18,100 करोड़ के स्टेट डेट ऑक्शन पर हैं, जो बाजार की मांग का अहम संकेतक होगा।

Detailed Coverage

मंगलवार को भारतीय सरकारी बॉन्ड में मजबूती दिखी, जो लगातार तीसरे दिन की बढ़त को दर्शाता है। ग्लोबल मार्केट में अनुकूल माहौल बनने से यह तेजी आई है। सुबह के कारोबार में बेंचमार्क 6.94% 2036 बॉन्ड यील्ड 6.7613% तक गिर गया, जो सोमवार के ट्रेडिंग सेशन की तेजी को आगे बढ़ा रहा था।

इस तेजी के पीछे मुख्य वजह ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में नरमी है, जो 2% गिरकर $86.52 प्रति बैरल पर आ गई। चूंकि भारत अपनी क्रूड ऑयल की 90% से अधिक जरूरतें आयात करता है, इसलिए ऊर्जा की कम कीमतें देश की मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिरता और महंगाई पर सकारात्मक असर डालती हैं। इसके अलावा, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नरमी ने भी भारतीय यील्ड पर बढ़ते ग्लोबल इंटरेस्ट रेट्स के साथ तालमेल बिठाने के दबाव को कम किया है।

स्टेट डेट ऑक्शन और मार्केट लिक्विडिटी

निवेशक अब आज होने वाले स्टेट डेट ऑक्शन पर बारीकी से नजर रख रहे हैं, जिसमें ₹18,100 करोड़ जुटाने का लक्ष्य है। इस ऑक्शन के नतीजे बाजार की मांग की कसौटी साबित होंगे, और यह पता चलेगा कि निवेशक मौजूदा स्तर पर कम यील्ड स्वीकार करने को तैयार हैं या नहीं। मार्केट पार्टिसिपेंट्स विशेष रूप से इंस्टीट्यूशनल डिमांड की मजबूती का अंदाजा लगाने के लिए ऑक्शन कटऑफ पर ध्यान देंगे।

हालाँकि सेंटिमेंट में सुधार हुआ है, लेकिन डोमेस्टिक फैक्टर्स भी चिंता का विषय बने हुए हैं। क्लियरिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCIL) के आंकड़ों से पता चला है कि सरकारी बैंकों ने सोमवार को ₹33,700 करोड़ के बॉन्ड बेचे ताकि मुनाफावसूली की जा सके। स्थानीय बैंकों की यह सेलिंग प्रेशर एक टेक्निकल बैरियर का काम कर सकती है, जो निकट भविष्य में यील्ड को और गिरने से रोक सकती है। वहीं, फॉरेन इन्वेस्टर्स की दिलचस्पी फिर से बढ़ी है, जिन्होंने फुली एक्सेसिबल रूट के जरिए सोमवार को ₹4.83 बिलियन की खरीदारी की, जो पिछले हफ्ते के भारी आउटफ्लो से एक बड़ा बदलाव है।

ग्लोबल संकेत और इंटरेस्ट रेट आउटलुक

बॉन्ड मार्केट का सेंटिमेंट बुधवार देर रात आने वाले फेडरल रिजर्व के पॉलिसी निर्णय से भी जुड़ा है। हालाँकि अमेरिकी इंटरेस्ट रेट्स में बदलाव की उम्मीद नहीं है, फिर भी मार्केट पार्टिसिपेंट्स सितंबर में 25-बेसिस-पॉइंट की दर वृद्धि की उच्च संभावना को पहले ही प्राइस-इन कर चुके हैं। बढ़ते अमेरिकी इंटरेस्ट रेट्स भारतीय डेट के लिए एक लॉन्ग-टर्म जोखिम बने हुए हैं, क्योंकि वे अमेरिकी ट्रेजरी की तुलना में भारतीय बॉन्ड द्वारा दिए जाने वाले यील्ड एडवांटेज को कम कर सकते हैं।

इस सतर्क आउटलुक को दर्शाते हुए, विभिन्न टेन्योर के ओवरनाइट इंडेक्स स्वैप (OIS) में गिरावट आई है, जिसमें एक साल की स्वैप दर 5.87% तक गिर गई। आने वाले दिनों में निवेशकों के लिए मुख्य बात यह होगी कि ₹18,100 करोड़ के ऑक्शन में मांग बनी रहती है या बढ़ती डोमेस्टिक सप्लाई यील्ड को वापस ऊपर धकेल देती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.