भारतीय सरकारी बॉन्ड में गुरुवार, 2 जुलाई 2026 को जोरदार तेजी देखने को मिली। 10-साल की बॉन्ड यील्ड गिरकर **6.73%** पर आ गई, जो विदेशी निवेश में लगातार बढ़ोतरी और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का नतीजा है।
क्या हुआ?
गुरुवार, 2 जुलाई 2026 को भारतीय सरकारी बॉन्ड में व्यापक तेजी दर्ज की गई। खरीदारी बढ़ने से कीमतें बढ़ीं और यील्ड (Yield) गिरी। सुबह के कारोबार तक, बेंचमार्क 10-साल की सरकारी बॉन्ड यील्ड पिछले सत्र के लगभग 6.75% से घटकर 6.73% पर आ गई। यह सरकारी कर्ज के लिए मजबूत मांग का संकेत है, भले ही वैश्विक बाजारों में अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में 4.49% की वृद्धि देखी गई।
क्यों आ रही है तेजी?
इस मांग का मुख्य कारण विदेशी पूंजी का जबरदस्त अंतर्वाह (Inflows) है। जून के बाद से, अंतरराष्ट्रीय निवेशकों ने भारतीय बॉन्ड में ₹32,400 करोड़ ($3.40 बिलियन) से अधिक की शुद्ध खरीदारी की है। इसमें से अधिकांश रुचि 'फुल्ली एक्सेसिबल रूट' (FAR) के तहत आने वाले सिक्योरिटीज में है, जो वैश्विक निवेशकों को बिना किसी सीमा के निवेश करने की अनुमति देता है। बाजार सहभागियों का कहना है कि टैक्स सुधार और रुपये की स्थिरता जैसे कारक भी इस रुझान को बढ़ावा दे रहे हैं। इसके अलावा, ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें $70 प्रति बैरल के करीब रहने से घरेलू बॉन्ड बाजार को भी सहारा मिला है। चूँकि भारत एक प्रमुख ऊर्जा आयातक है, इसलिए तेल की कीमतों में नरमी से महंगाई और आयात बिल को लेकर चिंताएं कम होती हैं, जो फिक्स्ड-इनकम एसेट्स के लिए पारंपरिक रूप से सकारात्मक होता है।
ब्लूमबर्ग इंडेक्स का फैक्टर
बॉन्ड ट्रेडर्स के लिए एक प्रमुख भावना चालक (Sentiment Driver) ब्लूमबर्ग इंडेक्स सर्विसेज का भारतीय सरकारी बॉन्ड को अपने ग्लोबल एग्रीगेट इंडेक्स (Global Aggregate Index) में संभावित रूप से शामिल करने का निर्णय है। बाजार सहभागियों को जुलाई के मध्य में एक इंडेक्स समिति की बैठक होने की उम्मीद है। यदि यह सफल होता है, तो यह भारत के अन्य प्रमुख उभरते बाजार बॉन्ड सूचकांकों में पिछले प्रवेश की तरह, वैश्विक फंडों से महत्वपूर्ण पैसिव इनफ्लो को ट्रिगर कर सकता है। गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) के विश्लेषकों ने पहले अनुमान लगाया था कि ऐसे संरचनात्मक परिवर्तन 2026 तक भारतीय सरकारी बॉन्ड में $10 बिलियन तक विदेशी निवेश ला सकते हैं।
आगामी नीलामी और ऋण आपूर्ति
निवेशक अब प्राइमरी मार्केट की ओर देख रहे हैं, जहाँ सरकार शुक्रवार, 3 जुलाई 2026 को ₹34,000 करोड़ के 10-साल के नोट की नीलामी करने वाली है। बॉन्ड बाजार अक्सर ऐसी बड़ी आपूर्ति घटनाओं से पहले समेकन (Consolidation) या प्रॉफिट-बुकिंग का दौर देखता है, क्योंकि ट्रेडर्स नए कर्ज को अवशोषित करने की बाजार की क्षमता का आकलन करते हैं। इस नीलामी की सफलता - बिड-टू-कवर रेशियो (Bid-to-cover ratio) और कट-ऑफ यील्ड से मापी जाती है - निकट अवधि में अंतर्निहित मांग का एक प्रमुख संकेतक होगी।
जोखिम और निगरानी योग्य बातें
हालांकि मौजूदा भावना सकारात्मक है, बॉन्ड बाजार में अभी भी जोखिम बने हुए हैं। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में लगातार मजबूती भारतीय बॉन्ड के लचीलेपन का परीक्षण कर सकती है, यदि इससे ब्याज दर के अंतर (Interest Rate Differentials) व्यापक होते हैं। इसके अलावा, यदि अपेक्षित ब्लूमबर्ग इंडेक्स निर्णय स्थगित कर दिया जाता है, तो सट्टा स्थितियों (Speculative Positions) के वापस लेने पर यील्ड पर ऊपर की ओर दबाव पड़ सकता है। निवेशकों को आगामी नीलामी के परिणाम, जुलाई के मध्य की इंडेक्स समीक्षा बैठक के घटनाक्रम और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि ये संभवतः आने वाले हफ्तों में यील्ड की दिशा निर्धारित करेंगे।
