Indian Bond Yields में आई गिरावट, क्रूड ऑयल $93 के नीचे, RBI पर दबाव कम

ECONOMY
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Indian Bond Yields में आई गिरावट, क्रूड ऑयल $93 के नीचे, RBI पर दबाव कम

भारतीय बेंचमार्क 6.94% 2036 बॉन्ड यील्ड्स सोमवार को गिरकर **6.77%** पर आ गए। इसका मुख्य कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल के दाम $93 प्रति बैरल के नीचे चले जाना है। अमेरिका-ईरान के बीच तनाव कम होने से निवेशकों की चिंता घटी है, जिससे भारत के एनर्जी इंपोर्ट कॉस्ट और महंगाई पर दबाव कम होने की उम्मीद है। इससे RBI पर ब्याज दरों को लेकर दबाव भी कम हो सकता है।

Detailed Coverage

बॉन्ड मार्केट में आई बहार

सोमवार को शुरुआती ट्रेडिंग में भारतीय सरकारी बॉन्ड्स (Government Bonds) में जोरदार रिकवरी देखी गई। पिछले हफ्ते के नुकसान को रिकवर करते हुए, बेंचमार्क 6.94% 2036 बॉन्ड यील्ड्स शुक्रवार के 6.8253% के मुकाबले गिरकर 6.7767% पर आ गए। बॉन्ड मार्केट की इस चाल में ग्लोबल एनर्जी कीमतों में आई नरमी का सीधा असर दिखा।

तेल की कीमतों में गिरावट का असर

यह बदलाव तब आया जब ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में बड़ी गिरावट आई और यह $93 प्रति बैरल के नीचे फिसल गया। यह गिरावट अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम की रिपोर्टों के बाद आई है, जिसकी वजह से पिछले हफ्ते तेल की कीमतें $102 तक पहुंच गई थीं। चूँकि भारत कच्चे तेल का एक बड़ा आयातक (Importer) है, इसलिए एनर्जी की ऊंची कीमतें अक्सर देश के आयात बिल और घरेलू महंगाई (Inflation) को लेकर चिंता पैदा करती हैं। जब ये दबाव कम होते हैं, तो आमतौर पर सरकारी डेट (Debt) निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक हो जाता है, जिससे बॉन्ड की कीमतें बढ़ती हैं और यील्ड्स गिरती हैं।

भारतीय अर्थव्यवस्था को मिली राहत

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए तेल की कीमतों में यह कमी एक बड़ी राहत है। कम आयात बिल करंट अकाउंट बैलेंस (Current Account Balance) को बेहतर बनाने में मदद करता है और इंपोर्टेड इन्फ्लेशन के जोखिम को कम करता है। इससे मार्केट के इंटरेस्ट-रेट-सेंसिटिव (Interest-rate-sensitive) सेगमेंट में उम्मीद की लहर दौड़ गई है। खास तौर पर, ओवरनाइट इंडेक्स स्वैप रेट्स (Overnight Index Swap rates) में तेज गिरावट देखी गई। यह दर्शाता है कि मार्केट पार्टिसिपेंट्स निकट भविष्य में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा आक्रामक मॉनेटरी टाइटनिंग (Monetary Tightening) की आवश्यकता को कम मान रहे हैं।

मार्केट की स्थिरता पर नजर

हालांकि मौजूदा बॉन्ड मार्केट की तेजी राहत दे रही है, लेकिन निवेशक जियोपॉलिटिकल घटनाओं (Geopolitical events) से जुड़ी अस्थिरता के प्रति सतर्क हैं। मध्य पूर्व में संघर्ष अप्रत्याशित रहा है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में यह गिरावट कितनी टिकाऊ होगी, यह बॉन्ड मार्केट के लिए एक महत्वपूर्ण कारक रहेगा। निवेशक कच्चे तेल की कीमतों के रुझान और राजनयिक वार्ताओं (Diplomatic negotiations) पर किसी भी अपडेट पर नजर रखेंगे, क्योंकि ये सीधे महंगाई की उम्मीदों और केंद्रीय बैंक के भविष्य के नीतिगत फैसलों को प्रभावित करेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.