भारतीय बेंचमार्क 10- साल के बॉन्ड यील्ड (Bond Yield) में स्थिरता देखी जा रही है, जो कि करीब 6.69% पर बना हुआ है। फॉरेन इन्वेस्टर्स (Foreign Investors) द्वारा फुली एक्सेसिबल रूट (FAR) के ज़रिये लगभग $4 अरब के इनफ्लो ने इसे सहारा दिया है। बेहतर मॉनसून की उम्मीदों से महंगाई (Inflation) पर दबाव कम हुआ है, जिससे फिक्स्ड इनकम मार्केट्स (Fixed Income Markets) को राहत मिली है। फिलहाल, इन्वेस्टर्स की नजरें स्टेट डेट ऑक्शन्स (State Debt Auctions) पर हैं, जिनसे ₹21,350 करोड़ जुटाए जाने हैं।
फॉरेन कैपिटल इनफ्लो का असर
बॉन्ड मार्केट को मुख्य सहारा फुली एक्सेसिबल रूट (FAR) के ज़रिये लगातार हो रहे कैपिटल इनफ्लो से मिल रहा है। इस रूट के तहत फॉरेन इन्वेस्टर्स बिना किसी इन्वेस्टमेंट सीलिंग के कुछ खास सरकारी सिक्योरिटीज खरीद सकते हैं। जून में अकेले इस रूट से लगभग $3.7 अरब आए थे, और कुल इनफ्लो $4 अरब के करीब पहुंचने वाले हैं। ये इनफ्लो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा किए गए स्ट्रैटेजिक एडजस्टमेंट्स के बाद आए हैं, जिन्होंने इंडिया के फिक्स्ड इनकम सिक्योरिटीज में ग्लोबल पार्टिसिपेशन को बढ़ावा दिया है और वोलैटिलिटी (Volatility) के खिलाफ एक बफर प्रदान किया है।
मॉनसून की रिकवरी और महंगाई का आउटलुक
हाल के दिनों में बॉन्ड मार्केट में आई स्थिरता का एक बड़ा कारण मॉनसून की रिकवरी रही है। सीजन की धीमी शुरुआत के बाद, कुल वर्षा की कमी घटकर लॉन्ग-पीरियड एवरेज (Long-Period Average) से 24% नीचे आ गई है। यह जून के अंत में दर्ज की गई 43% की कमी से काफी बेहतर स्थिति है। बॉन्ड इन्वेस्टर्स के लिए, अच्छा मॉनसून फूड इन्फ्लेशन (Food Inflation) को कंट्रोल करने में महत्वपूर्ण है, जो कि सेंट्रल बैंक द्वारा ट्रैक किए जाने वाले ओवरऑल इन्फ्लेशन इंडेक्स (Inflation Index) का एक मुख्य हिस्सा है। जब महंगाई की उम्मीदें स्थिर रहती हैं, तो बॉन्ड यील्ड्स पर ऊपरी दबाव कम होता है, जिससे मौजूदा बॉन्डहोल्डर्स को फायदा होता है।
स्टेट डेट ऑक्शन्स पर फोकस
आज के मार्केट का मुख्य फोकस विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा शेड्यूल की गई बोरिंग (Borrowing) पर है। ये राज्य कम्पटीटिव बॉन्ड ऑक्शन्स (Competitive Bond Auctions) के ज़रिये कुल ₹21,350 करोड़ जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। इन ऑक्शन्स के नतीजों पर बारीकी से नजर रखी जाएगी, क्योंकि ये बैंकों और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन्स के बीच स्टेट-इश्यूएड डेट (State-Issued Debt) की डिमांड के लेवल को दर्शाएंगे। इन ऑक्शन्स में अगर डिमांड मजबूत रहती है, तो यह नियर-टर्म इकोनॉमिक आउटलुक (Economic Outlook) में कॉन्फिडेंस का संकेत दे सकता है, जबकि कमजोर डिमांड बॉन्ड प्राइसेस (Bond Prices) पर दबाव डाल सकती है और यील्ड्स को बढ़ा सकती है। इन्वेस्टर्स को इन ऑक्शन्स में सेट किए गए कटऑफ यील्ड्स (Cutoff Yields) को ट्रैक करना चाहिए ताकि राज्यों की मौजूदा कॉस्ट ऑफ बोरिंग (Cost of Borrowing) को समझा जा सके, जो ब्रॉडर मार्केट सेंटीमेंट (Market Sentiment) के लिए एक बेंचमार्क का काम करता है।
