भारत 80 साल पुराने सेंट्रल एक्साइज एक्ट को करेगा निरस्त, GST के अनुरूप नया आधुनिक कानून लाएगा

ECONOMY
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AuthorAkshat Lakshkar|Published at:
भारत 80 साल पुराने सेंट्रल एक्साइज एक्ट को करेगा निरस्त, GST के अनुरूप नया आधुनिक कानून लाएगा
Overview

भारतीय सरकार सेंट्रल एक्साइज एक्ट, 1944, जो 80 साल पुराना कानून है, उसे निरस्त करने और आगामी बजट में एक नया, आधुनिक कानून लाने की तैयारी कर रही है। इस सुधार का उद्देश्य एक्साइज ड्यूटी प्रक्रियाओं को गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) ढांचे के साथ संरेखित करना है, जिससे पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और तंबाकू जैसे विशिष्ट उत्पादों के लिए अनुपालन और प्रशासन सरल हो जाएगा।

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भारतीय सरकार सेंट्रल एक्साइज एक्ट, 1944, जो कि निर्मित वस्तुओं पर शुल्क लगाने वाला आजादी-पूर्व का कानून है, उसे निरस्त करने और आगामी बजट में एक नया, आधुनिक कानून पेश करने के लिए तैयार है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह कदम पुराने कर कानूनों को साफ करने और एक्साइज ढांचे को गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) प्रणाली के साथ संरेखित करने के बड़े प्रयास का हिस्सा है।

GST की 2017 में शुरुआत के बावजूद, वर्तमान सेंट्रल एक्साइज एक्ट में अभी भी पुराने प्रावधान हैं। नया कानून पूरे ढांचे को समेकित और पुनर्निर्मित करेगा, जिसमें नियम और प्रक्रियाएं शामिल हैं, ताकि यह GST के डिजिटल वर्कफ़्लो को प्रतिबिंबित कर सके। इससे ऑनलाइन पंजीकरण, रिटर्न फाइलिंग, इलेक्ट्रॉनिक ऑडिट ट्रेल्स, और मूल्यांकन और अपीलों के लिए एक एकीकृत प्रणाली सक्षम होगी, जिससे करदाताओं के लिए अनुपालन सरल हो जाएगा और प्रशासनिक बोझ कम होगा।

महत्वपूर्ण बात यह है कि यह एक्साइज ड्यूटी का विस्तार नहीं है। यह शुल्क केवल छह उत्पादों पर ही लागू होता रहेगा: कच्चा पेट्रोलियम, मोटर स्पिरिट (पेट्रोल), हाई-स्पीड डीजल, एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF), प्राकृतिक गैस, और तंबाकू व तंबाकू उत्पाद। आधुनिक कानून का उद्देश्य इन विशिष्ट वस्तुओं के लिए एक विशेष, सुव्यवस्थित ढांचा तैयार करना है।

यह सुधार सरकार द्वारा आयकर अधिनियम, 1961 को बदलने की घोषणा के बाद आया है, जो भारत के कर कानूनों को एक सरल, प्रौद्योगिकी-अनुकूल और अव्यवस्था-मुक्त व्यवस्था की ओर एक व्यापक पुनर्गठन का संकेत देता है।

प्रभाव:
यह खबर भारत में कर सरलीकरण और आधुनिकीकरण की दिशा में एक सकारात्मक कदम दर्शाती है। निर्दिष्ट वस्तुओं से संबंधित व्यवसायों को सुव्यवस्थित, डिजिटाइज्ड प्रक्रियाओं से लाभ होगा, जो उन्हें GST व्यवस्था के करीब लाएगा। निवेशक इसे व्यापार करने में आसानी को बढ़ाने वाला कदम मान सकते हैं, जो कर प्रशासन में आर्थिक दक्षता और पारदर्शिता को संभावित रूप से सुधार सकता है।
रेटिंग: 7/10।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.