भारतीय अर्थव्यवस्था पर नज़र रखने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। सरकार **14 जुलाई** को देश का पहला 'सर्विसेज प्रोडक्शन इंडेक्स' (Index of Services Production - ISP) लॉन्च करने वाली है। यह नया इंडिकेटर **2024-25** को बेस ईयर मानकर सर्विसेज सेक्टर की रफ्तार को ट्रैक करेगा, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
सर्विसेज सेक्टर पर खास फोकस
आंकड़ों के मुताबिक, भारत का सर्विसेज सेक्टर (Services Sector) देश के ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA) में 50% से ज्यादा का योगदान देता है। ऐसे में, इस सेक्टर की छोटी-छोटी हलचलों पर नज़र रखना इकोनॉमी की सेहत को समझने के लिए ज़रूरी है। 'इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन' (IIP) जहां मैन्युफैक्चरिंग और माइनिंग जैसे सेक्टर्स को ट्रैक करता है, वहीं नया ISP सर्विसेज की एक्टिविटीज़ को मासिक आधार पर दिखाएगा।
कौन से सेक्टर्स होंगे शामिल?
शुरुआत में, ISP में उन सर्विसेज को शामिल किया जाएगा जिनका डेटा आसानी से उपलब्ध है। इनमें ट्रेड, ट्रांसपोर्टेशन, टेलीकम्युनिकेशन, होटल, मनोरंजन और रियल एस्टेट जैसे प्रमुख सेक्टर्स शामिल हैं। सरकार गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स नेटवर्क (GSTN) के साथ-साथ रेलवे, एविएशन, बैंकिंग और इंश्योरेंस रेगुलेटर्स से मिले डेटा का इस्तेमाल करेगी।
हालांकि, यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि शुरुआती दौर में हेल्थ, एजुकेशन, डिफेंस और पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन जैसी पब्लिक सर्विसेज को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा। इसके अलावा, असंगठित (unorganized) सर्विसेज सेक्टर का एक बड़ा हिस्सा भी अभी बाहर रहेगा। इन सेक्टर्स को भविष्य में 'एनुअल सर्वे ऑफ इनकॉर्पोरेटेड सर्विसेज सेक्टर एंटरप्राइजेज' (ASISSE) पूरा होने के बाद जोड़ा जाएगा।
नीति-निर्माण और बाज़ार पर असर
NITI Aayog के पैनल ने सुझाव दिया है कि इस इंडेक्स को पहले ट्रायल बेस पर जारी किया जाए ताकि स्टेकहोल्डर्स से फीडबैक लिया जा सके। सरकार इसे हर महीने के खत्म होने के करीब 60 दिनों के अंतराल पर जारी करने की योजना बना रही है। पैनल डिजिटल इकोनॉमी को बेहतर ढंग से मापने के लिए भी एक रोडमैप तैयार कर रहा है।
बाजार पार्टिसिपेंट्स के लिए, ISP एक और अहम टूल होगा जो इकोनॉमिक साइकल्स को समझने में मदद करेगा। जैसे-जैसे सब-सेक्टर्स का विस्तृत डेटा उपलब्ध होगा, निवेशकों को कंज्यूमर स्पेंडिंग और विभिन्न सर्विस इंडस्ट्रीज में कंपनियों के प्रदर्शन की बेहतर जानकारी मिल सकेगी। अब सबकी निगाहें इस बात पर होंगी कि ट्रायल डेटा की क्वालिटी कैसी रहती है और सरकार कब तक छूटे हुए सेक्टर्स को इसमें शामिल कर पाती है।
