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GAAR का बड़ा फैसला: पुराने निवेशों को राहत, नए पर कसा शिकंजा!

ECONOMY
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AuthorMehul Desai|Published at:
GAAR का बड़ा फैसला: पुराने निवेशों को राहत, नए पर कसा शिकंजा!
Overview

भारत के डायरेक्ट टैक्स बोर्ड (CBDT) ने एक बड़ा ऐलान किया है। CBDT ने साफ कर दिया है कि **1 अप्रैल 2017** से पहले किए गए निवेशों पर जनरल एंटी-अवॉइडेंस रूल (GAAR) लागू नहीं होगा। इससे विदेशी निवेशकों को बड़ी राहत मिली है। हालांकि, **1 अप्रैल 2017** के बाद के निवेशों पर GAAR का शिकंजा कसता रहेगा और 'कॉमर्शियल सबस्टेंस' की जांच जारी रहेगी।

पुराने निवेशों को GAAR से मिली छूट, नई डील्स पर जांच जारी

भारत के डायरेक्ट टैक्स बोर्ड (CBDT) ने विदेशी निवेशकों के लिए एक बड़ी उलझन को दूर कर दिया है। नए नोटिफिकेशन (54 और 55 ऑफ 2026) के अनुसार, 1 अप्रैल 2017 से पहले किए गए निवेशों से होने वाली आय पर जनरल एंटी-अवॉइडेंस रूल (GAAR) लागू नहीं होगा, भले ही उन निवेशों को कब बेचा जाए। यह प्राइवेट इक्विटी (PE), वेंचर कैपिटल (VC) और सॉवरेन वेल्थ फंड्स (SWF) जैसी संस्थाओं को बड़ी राहत देगा, जिनके पास पुराने भारतीय एसेट्स हैं। टैक्स अथॉरिटीज को अब इन 'ग्रैंडफादर्ड' मामलों में GAAR लागू न करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे निवेशक समुदाय में अनिश्चितता कम हुई है।

टाइगर ग्लोबल केस ने सिखाई 'सबस्टेंस' की अहमियत

यह स्पष्टीकरण सुप्रीम कोर्ट के 15 जनवरी 2026 के टाइगर ग्लोबल मामले में आए फैसले के बाद आया है। कोर्ट ने मॉरीशस स्थित टाइगर ग्लोबल की फ्लिपकार्ट में अपनी हिस्सेदारी बेचकर बाहर निकलने की कोशिश को 'कॉमर्शियल सबस्टेंस' की कमी के कारण खारिज कर दिया था। टाइगर ग्लोबल ₹14,500 करोड़ के कैपिटल गेन पर टैक्स से बचने की कोशिश कर रहा था, लेकिन टैक्स अथॉरिटीज ने लगभग ₹967 करोड़ रोक लिए थे। इस फैसले से PE और VC फर्मों में चिंता बढ़ गई थी। नए नोटिफिकेशन पुराने निवेशों को तो बचा लेते हैं, लेकिन सभी डील्स के लिए 'ट्रीटी बेनिफिट्स' और 'कॉमर्शियल सबस्टेंस' का मूल्यांकन महत्वपूर्ण बना रहेगा। भारत का GAAR, जो 1 अप्रैल 2017 से लागू है, OECD के BEPS प्रोजेक्ट के अनुरूप है, और कई देशों में ऐसे नियम हैं।

दो-स्तरीय टैक्स सिस्टम का उदय

CBDT की इस घोषणा ने पुराने निवेशों को सुरक्षित तो कर दिया है, लेकिन यह एक दो-स्तरीय टैक्स सिस्टम को भी औपचारिक रूप देता है। 1 अप्रैल 2017 या उसके बाद किए गए निवेशों पर GAAR अभी भी लागू होगा। इसका मतलब है कि नए निवेशों के लिए ऑफशोर और ट्रीटी-आधारित स्ट्रक्चर की 'सबस्टेंस', व्यावसायिक उद्देश्य और नियंत्रण की पूरी तरह से जांच की जाएगी। यह कदम हालिया कानूनी लड़ाइयों के नतीजों को संबोधित करता है, लेकिन यह निश्चित टैक्स सुनिश्चित करने की दिशा में एक सक्रिय कदम नहीं है।

एग्जिट्स खुलेंगे, पर नई डील्स के लिए 'सबस्टेंस' ही कुंजी

विदेशी फंड्स अब उन एग्जिट्स (निवेश से बाहर निकलना) पर आगे बढ़ पाएंगे जो टैक्स की अनिश्चितता के कारण अटके हुए थे। इससे IPO सेल-डाउन, सेकेंडरी ट्रांजैक्शन और लंबी अवधि की होल्डिंग्स की रणनीतिक बिक्री में तेजी आ सकती है। हालांकि, 1 अप्रैल 2017 के बाद के निवेशों पर 'सबस्टेंस' पर लगातार जोर देने का मतलब है कि ट्रीटी बेनिफिट्स पाने के लिए जटिल या कृत्रिम स्ट्रक्चर का उपयोग करना अभी भी एक चुनौती है। निवेशकों को अपने निवेश स्ट्रक्चर के पीछे व्यावसायिक तर्क और वास्तविक व्यावसायिक उद्देश्य को स्पष्ट रूप से दिखाना होगा।

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