रोज़ाना ₹1,000 करोड़ का घाटा, सरकार का 'राष्ट्रीय मिशन'
ग्लोबल मार्केट में एनर्जी की कीमतों में जारी उथल-पुथल के बीच भारत बड़े आर्थिक संकट से गुजर रहा है। घरेलू ऑयल मार्केटिंग कंपनीज़ (OMCs) अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में तेल की कीमतों में हुई 30% से 70% तक की वृद्धि के बावजूद, ग्राहकों को राहत देने के लिए कीमतें नहीं बढ़ा रही हैं। इसकी वजह से उन्हें हर दिन करीब ₹1,000 करोड़ का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। अनुमान है कि 2026 की पहली तिमाही तक यह फिस्कल बर्डन (fiscal burden) बढ़कर ₹2 लाख करोड़ तक पहुँच सकता है। इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्यूल बचाने को देश की इकोनॉमी के लिए बेहद ज़रूरी बताया है और सरकार ने कोरोना महामारी की तरह ही जनता की भागीदारी वाला एक 'राष्ट्रीय मिशन' लॉन्च करने का फैसला किया है।
एनर्जी रिज़र्व दे रहा सहारा
फिलहाल देश की एनर्जी सुरक्षा मजबूत स्थिति में है। भारत के पास 60 दिनों का क्रूड ऑयल और प्राकृतिक गैस का स्टॉक है, वहीं 45 दिनों की एलपीजी (LPG) भी उपलब्ध है। यह स्ट्रेटेजिक रिज़र्व (strategic reserve) और मजबूत रिफाइनिंग क्षमताएं देश की मांग को पूरा करने और निर्यात करने में मदद करती हैं। यही वजह है कि भारत के उपभोक्ता कीमतों में उस तरह की तेज बढ़ोतरी से बचे हुए हैं जो दुनिया के दूसरे देशों में देखी जा रही है।
इकोनॉमिक पैट्रियॉटिज़्म का आह्वान
यह 'राष्ट्रीय मिशन' सिर्फ पेट्रोल-डीज़ल बचाने तक ही सीमित नहीं है। सरकार लोगों से कारपूलिंग, पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करने और गैर-ज़रूरी विदेशी यात्राओं (foreign travel) से बचने का भी आग्रह कर रही है, जिससे विदेशी मुद्रा (foreign exchange) की बचत हो सके। किसानों को भी रासायनिक उर्वरकों (chemical fertilizer) का इस्तेमाल आधा करने, प्राकृतिक खेती अपनाने और सोलर सिंचाई पंपों का उपयोग करने की सलाह दी गई है। इस तरह की खपत कम करने के प्रयासों को 'इकोनॉमिक पैट्रियॉटिज़्म' यानी आर्थिक देशभक्ति के तौर पर देखा जा रहा है, जो देश के इंपोर्ट बिल को कम करने और रुपये (Rupee) को स्थिर करने में अहम भूमिका निभाएगा।
भविष्य की ऊर्जा रणनीति
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देश की ऊर्जा रणनीति को बदलने की ज़रूरत पर जोर दिया है। इसमें रिन्यूएबल्स (renewables) यानी नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को बढ़ाना और एफिशिएंसी (efficiency) यानी ऊर्जा दक्षता में सुधार करना शामिल है। स्ट्रेटेजिक रिज़र्व की ज़रूरतों को अनुकूलित करना और एनर्जी सप्लाई को विभिन्न देशों से प्राप्त करके भविष्य की किसी भी बाधा के खिलाफ लचीलापन (resilience) बढ़ाना महत्वपूर्ण है। वर्तमान स्थिति को जिम्मेदार खपत को बढ़ावा देने और अधिक आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था बनाने के एक अवसर के रूप में देखा जा रहा है।
