ATF फंड का गणित
सरकार का यह ₹10,000 करोड़ का ब्याज-मुक्त फंड एक स्थायी सब्सिडी नहीं, बल्कि एक 'रिवॉल्विंग बफर' की तरह काम करेगा। तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के जरिए यह पैसा शेड्यूल एयरलाइंस को फिक्स्ड-प्राइस फ्यूल उपलब्ध कराने में मदद करेगा। अगर जेट फ्यूल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें तय बेंचमार्क से ऊपर जाती हैं, तो सरकार का यह फंड उस अंतर को संभालेगा। वहीं, जब वैश्विक कीमतें कम होंगी, तो OMCs को यह एडवांस वापस करना होगा। यह एक सेल्फ-करेक्शन मैकेनिज्म है जो एविएशन सेक्टर को भारी कीमतों से बचाएगा और सरकार पर स्थायी वित्तीय बोझ भी नहीं डालेगा।
एयरलाइंस की लागत पर असर
विमानन टर्बाइन ईंधन (ATF) एयरलाइन के कुल परिचालन खर्च का लगभग 40% होता है। हाल ही में पश्चिम एशिया संकट के बाद, जेट फ्यूल की कीमतें मार्च 2026 के ₹60.50 प्रति लीटर से बढ़कर मई 2026 तक ₹142 प्रति लीटर हो गई थीं। इसके अलावा, क्षेत्रीय हवाई क्षेत्र बंद होने से लंबी उड़ानें भी लागत बढ़ा रही थीं। इस वजह से बड़ी एयरलाइनों को अपनी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में कटौती करनी पड़ी थी। हालांकि, यह सरकारी मदद एयरलाइनों की प्लानिंग को बेहतर बनाने में मदद करेगी, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि यह फंड केवल कीमतों की अत्यधिक अस्थिरता को कम करेगा, आम यात्रियों के लिए टिकटों में बड़ी और स्थायी कमी की उम्मीद कम है।
सेक्टर के लिए चुनौतियां
सरकार के इस कदम के बावजूद, एविएशन सेक्टर अभी भी कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। मार्केट लीडर IndiGo, जिसकी घरेलू बाजार में 64% हिस्सेदारी है, को चौथी तिमाही में ₹2,536 करोड़ का घाटा हुआ है। यह घाटा सिर्फ फ्यूल की बढ़ी कीमतों के कारण नहीं, बल्कि फॉरेन एक्सचेंज के बड़े नुकसान और ऑपरेशनल दिक्कतों के कारण भी हुआ है। इंडिगो के पास ₹500 बिलियन से अधिक की मजबूत लिक्विडिटी है, लेकिन कंपनी अभी भी करेंसी में गिरावट के जोखिम से जूझ रही है। सरकारी योजना के तहत, एयरलाइंस को 36 महीने तक OMCs से ही फ्यूल खरीदना होगा, जिससे उन्हें वैकल्पिक सोर्सिंग के विकल्प सीमित हो जाएंगे।
आगे का रास्ता
ब्रोकरेज फर्मों की राय बंटी हुई है। Motilal Oswal और Goldman Sachs जैसी फर्मों ने इंडस्ट्री लीडर्स पर 'बाय' रेटिंग बरकरार रखी है, जिसका कारण सेक्टर में लंबी अवधि की क्षमता की कमी और प्राइसिंग पावर है। हालांकि, जोखिम अभी भी बने हुए हैं। मैनेजमेंट का ध्यान अब करेंसी के जोखिम को कम करने के लिए बेहतर हेजिंग प्रोग्राम पर है। अगस्त 2026 में नए CEO की नियुक्ति निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण फोकस पॉइंट होगी। इस प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड की असली परीक्षा जियो-पॉलिटिकल संघर्ष की अवधि और एयरलाइनों की ईंधन के अलावा अन्य लागतों को मैनेज करने की क्षमता पर निर्भर करेगी।
