बजट के ऐलान से शेयर बाज़ार में भारी गिरावट
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा बजट 2026 पेश किए जाने के तुरंत बाद शेयर बाज़ार में भारी गिरावट आई। सेंसेक्स (Sensex) में 1,500 अंकों से ज्यादा की और निफ्टी (Nifty) में 500 अंकों से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। बाज़ार की यह मायूसी मुख्य रूप से 4.3% के फिस्कल डेफिसिट (Fiscal Deficit) के अनुमान और ₹17.2 लाख करोड़ के सकल बाज़ार उधारी (Gross Market Borrowing) के लक्ष्य के कारण थी।
इसके अलावा, वायदा (Futures) पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% करने और शेयर बायबैक (Share Buyback) को सभी शेयरधारक श्रेणियों के लिए कैपिटल गेन (Capital Gain) के तौर पर टैक्सेबल (Taxable) बनाने के ऐलान ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी।
हालांकि, इस मायूसी के बीच इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) से जुड़े स्टॉक्स (Stocks) में मजबूती दिखी, क्योंकि सरकार ने फाइनेंशियल ईयर 2027 (FY27) के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) को बढ़ाकर ₹12.2 लाख करोड़ करने का ऐलान किया है।
Income Tax Act, 2025: सरलीकरण और नई समय-सीमाएं
बजट का मुख्य आकर्षण Income Tax Act, 2025 है, जो 1 अप्रैल 2026 से छह दशक पुराने 1961 के कानून की जगह लेगा। इस नए एक्ट का लक्ष्य डायरेक्ट टैक्स (Direct Tax) के नियमों को काफी सरल बनाना है, जिसमें लगभग 50% सेक्शन (Sections) कम किए जाएंगे।
- रिटर्न फाइलिंग (Return Filing): अब रिटर्न भरने की समय-सीमाओं को अलग-अलग किया गया है। इंडिविजुअल्स (Individuals) जो ITR 1 और ITR 2 का उपयोग करते हैं, उन्हें 31 जुलाई तक फाइल करना होगा। वहीं, गैर-ऑडिट वाले बिजनेस (Non-audit Business) और ट्रस्ट (Trusts) के लिए यह डेडलाइन 31 अगस्त होगी।
- रिवीजन (Revision): टैक्स रिटर्न को रिवाइज (Revise) करने की अवधि को 31 दिसंबर से बढ़ाकर 31 मार्च कर दिया गया है, हालांकि इसके लिए मामूली फीस लगेगी।
- टैक्स ईयर (Tax Year): अब 'पिछले साल' (Previous Year) और 'मूल्यांकन वर्ष' (Assessment Year) का अंतर खत्म कर एक 'यूनिफाइड टैक्स ईयर' (Unified Tax Year) सिस्टम लागू होगा।
- TDS रिफंड (TDS Refund): टैक्सपेयर्स (Taxpayers) को डेडलाइन के बाद रिटर्न फाइल करने पर भी TDS का रिफंड मिल सकेगा, बिना किसी पेनल्टी (Penalty) के।
खास राहतें और सेक्टोरल इनिशिएटिव्स
नए टैक्स एक्ट के अलावा, सरकार ने कुछ विशेष राहतें भी दी हैं:
- मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (Motor Accident Claims Tribunals) द्वारा प्राकृतिक व्यक्तियों (Natural Persons) को दिए जाने वाले ब्याज पर अब इनकम टैक्स (Income Tax) नहीं लगेगा।
- ओवरसीज़ टूर पैकेज (Overseas Tour Packages) और लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत शिक्षा व मेडिकल के लिए किए जाने वाले रेमिटेंस (Remittances) पर टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स (TCS) को घटाकर 2% कर दिया गया है।
- छोटे टैक्स अपराधों (Minor Tax Offences) को अब अपराध की श्रेणी से हटाकर सिर्फ फाइन (Fine) के दायरे में लाया गया है।
इसके साथ ही, सरकार ने ₹10,000 करोड़ के निवेश से बायोफार्मा (Biopharma) सेक्टर को बढ़ावा देने, सेमीकंडक्टर (Semiconductor) मैन्युफैक्चरिंग (Manufacturing), MSMEs और केमिकल पार्क्स (Chemical Parks) के लिए भी पहल की है। इनकम टैक्स स्लैब (Income Tax Slabs) में कोई बदलाव नहीं किया गया है।