अप्रैल में बेरोजगारी दर में मामूली उछाल
अप्रैल 2024 में भारतीय श्रम बाजार में बेरोजगारी की दर थोड़ी बढ़ी है और यह 5.2% पर पहुंच गई है। यह रॉयटर्स पोल की उम्मीदों के मुताबिक है, जिसका मतलब है कि बाजार में कोई बड़ा झटका देखने को नहीं मिला। हालांकि, यह सामान्य सी बढ़ोतरी श्रम बाजार के अंदरूनी मुद्दों की ओर इशारा कर रही है, जो अर्थव्यवस्था की सुस्ती का संकेत हो सकती है।
छिपी हुई कमजोरियां: लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट में गिरावट
बेरोजगारी दर के headline आंकड़े से परे, महत्वपूर्ण इंडिकेटर कम आशावादी तस्वीर दिखाते हैं। लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट (LFPR) में गिरावट देखी गई, जो फरवरी 2026 में 55.9% से घटकर मार्च 2026 में 55.4% हो गई। इसी तरह, वर्कर पॉपुलेशन रेशियो (WPR) भी मार्च में गिरकर 52.6% पर आ गया। पार्टिसिपेशन में यह गिरावट दर्शाती है कि नौकरी की तलाश करने वाले लोगों की संख्या कम हो गई है, जिससे बेरोजगारी दर कम दिख सकती है, भले ही नौकरी बाजार की असल मजबूती न बढ़ी हो।
शहरी-ग्रामीण और लैंगिक असमानता
इसके अलावा, शहरी इलाकों में बेरोजगारी दर ग्रामीण इलाकों की तुलना में काफी अधिक बनी हुई है। महिलाओं, खासकर शहरी युवाओं में बेरोजगारी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। मार्च में शहरी महिला बेरोजगारी 9.0% दर्ज की गई। यह नौकरी बाजार में मौजूदा स्किल गैप और लैंगिक असमानताओं को उजागर करता है।
आर्थिक दृष्टिकोण और बाहरी दबाव
एशियाई विकास बैंक (ADB) ने वित्त वर्ष 2026 के लिए 6.9% जीडीपी ग्रोथ का अनुमान लगाया है, और ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स (Trading Economics) 2026 के अंत तक 6.50% की भविष्यवाणी करता है। हालांकि, मूडीज रेटिंग्स (Moody's Ratings) ने ऊर्जा की ऊंची लागत और धीमी औद्योगिक गतिविधि के कारण 2026 के लिए अपने जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को घटाकर 6.0% कर दिया है। अप्रैल में 3.48% पर रही महंगाई (Inflation), मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण बढ़ते ग्लोबल एनर्जी प्राइस से ऊपर जा सकती है। यह रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के लिए महंगाई को बढ़ने दिए बिना ग्रोथ को सपोर्ट करने की चुनौती खड़ी करता है।
अंतर्निहित मुद्दे और नीतिगत चुनौतियां
भारत का विशाल अनौपचारिक क्षेत्र (informal sector), जो अधिकांश लोगों को रोजगार देता है, एक बड़ी कमजोरी है। इस क्षेत्र का डेटा अक्सर अपर्याप्त होता है, जिससे राष्ट्रीय बेरोजगारी पर इसके प्रभाव को मापना मुश्किल हो जाता है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि भले ही आधिकारिक आंकड़े स्थिर दिखें, अनौपचारिक क्षेत्र पर बाहरी आर्थिक झटकों का असर ज्यादा हो रहा है। एक बड़ी चुनौती स्किल गैप है: अक्सर ग्रेजुएट नौकरी के लिए जरूरी स्किल्स, खासकर AI और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में, नहीं रखते।
हायरिंग इंटेंशन्स और बाजार की चुनौतियां
इन चिंताओं के बावजूद, एम्प्लॉयर का भरोसा मजबूत बना हुआ है। मैनपावरग्रुप (ManpowerGroup) के नेट एम्प्लॉयमेंट आउटलुक (NEO) ने अप्रैल-जून 2026 तिमाही के लिए 68% का रिकॉर्ड स्तर छुआ है, जो हायरिंग की मजबूत योजनाओं का संकेत देता है। हालांकि, यह सकारात्मक हायरिंग सेंटीमेंट, घटते पार्टिसिपेशन रेट के विपरीत खड़ा है, जो एक जटिल नौकरी बाजार की ओर इशारा करता है। आरबीआई (RBI) के लिए कीमतों में स्थिरता और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाना एक कठिन काम है।