2 फरवरी 2026 को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त रौनक दिखी। अमेरिका के साथ हुए इस व्यापार समझौते ने बाजार को एक नई दिशा दी है। इस समझौते के तहत, अमेरिका द्वारा भारतीय सामानों पर लगाए जाने वाले टैरिफ को 25% से घटाकर 18% कर दिया गया है। यह पहले रूस से तेल खरीद से जुड़े शुल्कों को मिलाकर 50% तक पहुंच जाता था। इस बड़ी राहत ने विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार को फिर से आकर्षक बना दिया है।
इस खबर का असर बाजार पर तुरंत देखने को मिला। गिफ्ट सिटी में ट्रेड हुए निफ्टी 50 फ्यूचर्स (Nifty 50 Futures) में रात भर में करीब 4.5% का उछाल आया, जिसने मंगलवार के ट्रेडिंग सेशन के लिए उम्मीदें बढ़ा दीं। इसी का नतीजा रहा कि मुख्य बेंचमार्क NSE Nifty 50 इंडेक्स 2 फरवरी को 1.06% की बड़ी बढ़त के साथ बंद हुआ, जो पिछले दो महीनों में सबसे बड़ी एकदिनी तेजी है। इससे भारतीय एसेट्स (Assets) में निवेशकों की दिलचस्पी फिर से बढ़ी है।
यह समझौता ऐसे समय में आया है जब इस साल अब तक करीब $3.2 अरब और पिछले साल $18.8 अरब का भारी-भरकम एफआईआई (FII) आउटफ्लो देखा गया था। विश्लेषकों का मानना है कि यह डील भारत में फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट (Foreign Portfolio Investment) को फिर से शुरू करने की दिशा में एक अहम कदम साबित होगी। हाल के वर्षों में, भारत का वैल्यूएशन प्रीमियम (Valuation Premium) अपने एशियाई साथियों की तुलना में अपने सबसे निचले स्तर पर आ गया था, जिसकी वजह ट्रेड टेंशन और अर्निंग्स में आई सुस्ती थी।
इस व्यापार डील के फाइनल होने से ठीक पहले, 1 फरवरी 2026 को पेश हुए यूनियन बजट (Union Budget) ने निर्यातकों (Exporters) और कुछ प्रमुख उद्योगों को लक्षित सहायता प्रदान की थी। इसने निवेशकों के आत्मविश्वास को थोड़ा और मजबूत किया है। हालांकि, पिछले कुछ समय से भारतीय शेयरों ने बाकी इमर्जिंग मार्केट्स (Emerging Markets) के मुकाबले थोड़ा पीछे प्रदर्शन किया है। 30 जनवरी 2026 तक MSCI इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स में भारत का वेटेज (Weightage) घटकर 13.3% रह गया था।
फिलहाल, निफ्टी 50 का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो लगभग 21.8 है और मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Capitalisation) ₹2,00,82,831 करोड़ है। यह दर्शाता है कि बाजार अभी भी वैल्यूड (Valued) है, लेकिन इसका प्रीमियम कुछ हद तक कम हुआ है। घरेलू चिंताओं, जैसे कि डेरिवेटिव्स (Derivatives) पर संभावित टैक्स वृद्धि और मेटल की कीमतों में गिरावट, के बावजूद बाजार की मजबूती यह संकेत देती है कि निवेशक तात्कालिक चुनौतियों से आगे देख रहे हैं।
सकारात्मक व्यापार विकास के बावजूद, कुछ चुनौतियाँ बनी हुई हैं। इस तिमाही के अर्निंग्स रिपोर्ट्स मिले-जुले रहे हैं। साथ ही, इस बात पर अभी भी स्पष्टता आनी बाकी है कि क्या भारत इस डील के तहत अमेरिका से $500 अरब का सामान खरीदेगा। इसके अलावा, मॉनेटरी ईजिंग (Monetary Easing) की गुंजाइश भी सीमित दिख रही है। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि 6 फरवरी को होने वाली पॉलिसी मीटिंग में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) मौजूदा ब्याज दरों को बरकरार रखेगा।
Morgan Stanley जैसे फर्मों के एनालिस्ट्स का अनुमान है कि कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex), सर्विसेज सेक्टर का विस्तार और AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) को अपनाने से अप्रैल 2026 से शुरू होने वाले फाइनेंशियल ईयर में अर्निंग्स ग्रोथ (Earnings Growth) को बढ़ावा मिलेगा। Jefferies के स्ट्रेटेजिस्ट्स का मानना है कि यह ट्रेड डील विदेशी निवेशकों के सेंटीमेंट को भारतीय एसेट्स की ओर मोड़ सकती है, जिससे रुपये को मजबूती मिल सकती है और फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट आकर्षित हो सकता है। कुल मिलाकर, 2026 के लिए इमर्जिंग मार्केट्स का ग्रोथ आउटलुक मजबूत दिख रहा है, जिसमें भारत भी इन ट्रेंड्स से लाभान्वित होने की अच्छी स्थिति में है।