India-US Trade Deal: शेयर बाजार में तेजी, पर एयरलाइंस की हालत खस्ता!

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorMehul Desai|Published at:
India-US Trade Deal: शेयर बाजार में तेजी, पर एयरलाइंस की हालत खस्ता!
Overview

भारत और अमेरिका के बीच हुए नए व्यापार समझौते (Trade Deal) ने भारतीय शेयर बाजार में जोश भर दिया है। US की ओर से भारतीय सामानों पर Tariffs में बड़ी कटौती से निर्यात को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार उछाल आया है। हालांकि, एयरलाइन सेक्टर में सब कुछ ठीक नहीं है, जहां IndiGo जैसी कंपनियां अच्छा कर रही हैं, वहीं SpiceJet जैसी एयरलाइंस भारी नुकसान और परिचालन (Operations) संबंधी समस्याओं से जूझ रही हैं।

व्यापार समझौते से बाज़ार को मिली रफ्तार

भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच एक अहम व्यापार समझौते (Trade Deal) को अंतिम रूप देने से भारतीय अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत मिली है। इस डील के तहत, अमेरिका ने भारतीय सामानों पर लगने वाले आयात शुल्क (Tariffs) को पहले के 50% से घटाकर तुरंत प्रभाव से 18% कर दिया है। इस फैसले से भारत के निर्यात (Exports) की प्रतिस्पर्धात्मकता (Competitiveness) बढ़ेगी, खास तौर पर टेक्सटाइल, एग्री और टेक्नोलॉजी जैसे सेक्टरों में, और यह चीन व वियतनाम जैसे देशों को कड़ी टक्कर देगा। वहीं, भारत ने अमेरिका से ऊर्जा, टेक्नोलॉजी और एयरक्राफ्ट जैसे उत्पादों की 500 अरब डॉलर से अधिक की खरीद का वादा किया है। इस समझौते से महत्वपूर्ण मिनरल्स और सप्लाई चेन को लेकर सहयोग भी गहरा होने की उम्मीद है। इस खबर के आते ही बाजार में गजब का उत्साह दिखा, जिसके चलते BSE Sensex 5% से ज़्यादा और Nifty 4.99% तक चढ़ गए। InterGlobe Aviation (IndiGo) और Reliance Industries जैसी कंपनियों के शेयरों में भी अच्छी तेजी देखी गई।

एविएशन सेक्टर: अच्छे दिन और बुरे हालात

भारतीय सिविल एविएशन सेक्टर में ज़बरदस्त ग्रोथ का अनुमान है। यह सेक्टर 2025 में 14.78 अरब डॉलर से बढ़कर 2031 तक 28.96 अरब डॉलर का हो सकता है। यात्रियों की बढ़ती संख्या, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और UDAN जैसी सरकारी योजनाओं के कारण इस सेक्टर में तेजी की उम्मीद है। फिलहाल, लो-कॉस्ट कैरियर्स (LCCs) मार्केट का 69% हिस्सा कंट्रोल करते हैं। इस सेक्टर की यह शानदार तस्वीर कुछ घरेलू एयरलाइंस की असलियत से बिल्कुल अलग है। मार्केट लीडर IndiGo, जिसके पास लगभग 62% शेयर है, का मार्केट कैप 1.8 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा है और P/E रेश्यो करीब 56.4x है, जो निवेशकों के विश्वास और प्रीमियम वैल्यूएशन को दर्शाता है। इसके विपरीत, राष्ट्रीय एयरलाइन Air India और उसकी सहायक कंपनी Air India Express ने फाइनेंशियल ईयर 2025 में टैक्स से पहले 9,568.4 करोड़ रुपये का घाटा दर्ज किया है, और अनुमान है कि 2026 तक यह घाटा 15,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा हो सकता है।

SpiceJet का मुश्किल सफर

सकारात्मक व्यापार समझौते और सेक्टर की ग्रोथ की उम्मीदों के बावजूद, SpiceJet Ltd. की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। जून 2025 को समाप्त तिमाही में कंपनी को 234 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड नेट लॉस हुआ, और सितंबर 2025 की तिमाही में यह घाटा बढ़कर 633.80 करोड़ रुपये हो गया। फाइनेंशियल ईयर 2020 से 2024 के बीच कंपनी की नेट सेल्स में 42.7% की भारी गिरावट आई है। परिचालन (Operations) की बात करें तो, फाइनेंशियल ईयर 2025 की दूसरी तिमाही तक कंपनी के पास केवल 28 एयरक्राफ्ट ही एक्टिव थे, जो कभी 90 हुआ करते थे। यात्रियों की संख्या में भी भारी गिरावट आई है। एनालिस्ट्स का अनुमान नकारात्मक (Bearish) है, EPS अनुमानों में लगातार कटौती की जा रही है, और 'होल्ड' (Hold) की सलाह दी गई है। लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट के लिए फंडामेंटल्स को 'खराब' (Poor) रेटिंग दी गई है। पिछले एक साल में स्टॉक 53.82% तक गिर चुका है और निगेटिव P/E रेश्यो पर ट्रेड कर रहा है, जिसका मार्केट कैप करीब 3,500 करोड़ रुपये है। भले ही व्यापार समझौते से लॉजिस्टिक्स या कार्गो ऑपरेशंस को अप्रत्यक्ष लाभ हो, लेकिन यह SpiceJet की हाई डेट, परिचालन अक्षमताओं और बड़े वित्तीय नुकसान जैसी मूल समस्याओं का समाधान नहीं करता।

भविष्य की राह

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भारत की निर्यात क्षमता को बढ़ाने और समग्र आर्थिक विकास का वादा करता है। यह सकारात्मक मैक्रो-इकोनॉमिक डेवलपमेंट बाजार की भावनाओं को समर्थन देना जारी रखेगा और अच्छी स्थिति वाली कंपनियों को लाभान्वित करेगा। हालांकि, SpiceJet जैसी एयरलाइनों के लिए आगे का रास्ता बेहद चुनौतीपूर्ण है। कंपनी की अपनी बड़ी वित्तीय देनदारियों, परिचालन बाधाओं और प्रतिस्पर्धी दबावों से निपटने की क्षमता ही उसके भविष्य का निर्धारण करेगी, चाहे बड़े व्यापारिक समझौते कुछ भी कहें। एविएशन सेक्टर की ग्रोथ की कहानी शायद उन सभी नावों को ऊपर उठाने वाली लहर साबित न हो, खासकर जो गहरी संरचनात्मक समस्याओं से जूझ रही हैं।

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.