भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड रिलेशन्स को स्थिर करने के लिए एक नए ट्रेड फ्रेमवर्क पर सहमति बन गई है। इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय निर्यातकों को अमेरिका द्वारा लगाए जाने वाले प्रस्तावित सेक्शन 301 टैरिफ से बचाना है। हालांकि, अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए बाजार पहुंच और लेबर प्रैक्टिस से जुड़े मुद्दों पर अभी भी बड़े मतभेद बने हुए हैं, जिससे डील फाइनल होने में देरी हो रही है।
सेक्शन 301 की जांच का असर
यह प्रस्तावित ट्रेड डील अभी भी कई बड़ी रुकावटों का सामना कर रही है, जो मुख्य रूप से अमेरिका द्वारा की जा रही दो जांचों के कारण हैं। अमेरिका ने जबरन मजदूरी (forced labor practices) की चिंताओं का हवाला देते हुए भारतीय सामानों पर 12.5% का टैरिफ लगाने का प्रस्ताव दिया है। भारतीय अधिकारियों ने इन निष्कर्षों को औपचारिक रूप से चुनौती दी है और जांच प्रक्रिया की पूरी समीक्षा की मांग की है। इसके साथ ही, इंडस्ट्रियल कैपेसिटी (excess industrial capacity) से जुड़ी एक दूसरी जांच भी चल रही है, जिससे अगर इसका समाधान नहीं निकला तो अतिरिक्त ड्यूटी लग सकती है। इन जांचों की फाइनल रिपोर्ट का आना डील के आगे बढ़ने के लिए सबसे अहम होगा, जिसके नतीजे अगले कुछ हफ्तों में आने की उम्मीद है।
बाजार पहुंच और ट्रेड टेंशन
तकनीकी जांचों से परे, दोनों देशों के बीच पॉलिसी को लेकर भी बड़े अंतर हैं। कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल और यूएसटीआर जैमीसन ग्रीर के बीच हाई-लेवल मीटिंग्स के बावजूद, अमेरिका की ओर से भारत के एग्रीकल्चर सेक्टर में अधिक पहुंच की मांग एक बड़ा मुद्दा बनी हुई है। भारतीय अधिकारी इस मामले पर अपनी बात पर कायम हैं, और अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए बाजार की पहुंच (market access) अभी भी एक ऐसा बिंदु है जहाँ दोनों देशों में मतभेद हैं, जो आगे की प्रगति को सीमित कर रहा है।
बदलते ट्रेड डायनामिक्स
मई 2026 के ट्रेड डेटा से दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। अमेरिका के साथ भारत का एक्सपोर्ट सरप्लस 40% से ज्यादा कम हो गया है, जो पिछले साल की समान अवधि के $2.94 बिलियन की तुलना में काफी गिरावट है। यह बदलाव एक लंबे ट्रेंड का हिस्सा है, जहां अमेरिका भारत का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट डेस्टिनेशन बन गया है, और अब यह भारत के कुल एक्सपोर्ट का लगभग 20% हिस्सा है। इसके अलावा, एनर्जी ट्रेड (energy trade) इस रिश्ते का एक अहम हिस्सा बन गया है, जिसमें भारत ने अमेरिका से एनर्जी प्रोडक्ट्स का इम्पोर्ट बढ़ाया है। निवेशकों को लंबित सेक्शन 301 रिपोर्ट्स के नतीजों और एग्रीकल्चर मार्केट एक्सेस पर किसी भी अपडेट पर करीब से नजर रखनी चाहिए, क्योंकि ये फैक्टर अमेरिकी बाजार में काम करने वाली भारतीय कंपनियों के लिए फाइनल टैरिफ और भविष्य की एक्सपोर्ट कंडीशन तय करेंगे।
