ट्रेड डील में क्यों आया मोड़?
भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर बातचीत में बड़ी रुकावट आ गई है। मामला तब बिगड़ा जब ब्रिटेन ने भारतीय स्टील के आयात पर कुछ पाबंदियां लगाने का प्रस्ताव रखा। इसके जवाब में, भारत ने भी कड़ा रुख अपना लिया है। भारत अब यूके से आने वाली स्कॉच व्हिस्की पर 150% की इंपोर्ट ड्यूटी कम करने के वादे से पीछे हट सकता है।
इंडस्ट्री का टकराव
यूके का कहना है कि स्टील पर लगने वाले शुल्क (tariffs) का FTA से कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन भारत का मानना है कि यह दोनों देशों के बीच व्यापार में एक बड़ी रुकावट है। भारत चाहता है कि यूके अपनी स्टील पाबंदियों को हटाए, ताकि स्कॉच व्हिस्की पर ड्यूटी कट का रास्ता साफ हो सके। यह भारत की तरफ से एक बड़ा संकेत है कि अब एकतरफा रियायतें नहीं चलेंगी।
निवेशकों के लिए चिंता
इस तनातनी का सीधा असर उन कंपनियों पर पड़ेगा जो भारत में स्कॉच व्हिस्की बेचने की उम्मीद कर रही थीं। अगर 150% की ड्यूटी जारी रहती है, तो भारतीय प्रीमियम स्पिरिट्स मार्केट यूके की कंपनियों के लिए बंद ही रहेगा। अगर यूके स्टील कोटा लागू करता है, तो भारत भी ऑटोमोबाइल और टेक्सटाइल जैसे दूसरे सेक्टर में जवाबी कार्रवाई कर सकता है। ऐसे में, इस ट्रेड डील के पूरी होने में देरी होना तय है, जो 2026 के आखिर तक भी खिंच सकती है।
