भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (CETA) 15 जुलाई 2026 से लागू हो रहा है। इस समझौते के तहत, भारत से यूके को होने वाले लगभग 99% एक्सपोर्ट पर टैरिफ (Tariff) खत्म हो जाएंगे। इससे टेक्सटाइल, फुटवियर, ऑटोमोबाइल और आईटी सेवाओं जैसे सेक्टर्स पर बड़ा असर पड़ने की उम्मीद है। निवेशकों को इस बात पर नज़र रखनी चाहिए कि ये ट्रेड बेनिफिट्स (Trade Benefits) एक्सपोर्ट मार्जिन (Export Margins) और लग्जरी गुड्स (Luxury Goods) व गाड़ियों के घरेलू कॉम्पिटिशन (Domestic Competition) को कैसे प्रभावित करते हैं।
लेबर-इंटेंसिव एक्सपोर्ट्स को मिलेगी बड़ी राहत
यूके ने भारतीय एक्सपोर्ट्स पर लगभग 99% टैरिफ खत्म करने पर सहमति जताई है। फिलहाल, भारत के गारमेंट्स (Garments), टेक्सटाइल (Textiles), फुटवियर (Footwear) और प्रोसेस्ड फूड (Processed Foods) जैसे प्रोडक्ट्स पर यूके में 4% से लेकर 16% तक का इंपोर्ट ड्यूटी (Import Duty) लगता है। इन लागतों के खत्म होने से, इन सेक्टर्स के भारतीय मैन्युफैक्चरर्स (Manufacturers) को ब्रिटिश मार्केट में बेहतर प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margins) और बढ़ी हुई डिमांड देखने को मिल सकती है। जो कंपनियां यूके को भारी एक्सपोर्ट करती हैं, वे इस बदलाव से सबसे ज़्यादा फायदे में रह सकती हैं।
ऑटोमोबाइल और प्रीमियम गुड्स में बड़े बदलाव
सबसे बड़े बदलावों में से एक ऑटोमोटिव सेक्टर (Automotive Sector) से जुड़ा है। अगले 15 सालों में भारत यूके-निर्मित पैसेंजर व्हीकल्स (Passenger Vehicles) पर इंपोर्ट ड्यूटी को 110% से घटाकर धीरे-धीरे 10% कर देगा। हालांकि, इससे घरेलू लग्जरी कार निर्माताओं के लिए कॉम्पिटिशन बढ़ सकता है, लेकिन सरकार ने इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेगमेंट के लिए सुरक्षा उपाय किए हैं। यूके-निर्मित इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और हाइड्रोजन-पावर्ड व्हीकल्स को छठे साल से ही प्रेफरेंशियल एक्सेस (Preferential Access) मिलेगा, जिससे लोकल ईवी (EV) निर्माताओं को अपने ऑपरेशंस बढ़ाने के लिए समय मिलेगा।
उपभोक्ता प्रीमियम ब्रिटिश सामानों के लिए कम कीमतों की भी उम्मीद कर सकते हैं। स्कॉच व्हिस्की (Scotch Whisky), जो एक प्रमुख प्रीमियम प्रोडक्ट है, उस पर इंपोर्ट ड्यूटी शुरू में 150% से घटकर 75% हो जाएगी, और एक दशक में यह 40% तक पहुंच जाएगी। इस कटौती से प्रीमियम सेगमेंट में स्थानीय स्पिरिट उत्पादकों की प्राइसिंग पावर (Pricing Power) पर असर पड़ सकता है।
आईटी और प्रोफेशनल सर्विसेज पर असर
गुड्स से परे, इस समझौते में डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन (Double Contribution Convention) भी शामिल है। यूके में अस्थायी रूप से काम करने वाले भारतीय प्रोफेशनल्स (Professionals) को अब दोनों देशों में 5 सालों तक सोशल सिक्योरिटी कंट्रीब्यूशन्स (Social Security Contributions) का भुगतान करने से छूट मिलेगी। यह बदलाव टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (Tata Consultancy Services) और इंफोसिस (Infosys) जैसी भारतीय आईटी सर्विस फर्मों के लिए ऑपरेशनल कॉस्ट (Operational Costs) को कम करेगा, जिनकी यूके में एक महत्वपूर्ण वर्कफोर्स (Workforce) उपस्थिति है।
निवेशकों के लिए जरूरी बातें
निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि CETA के फायदे धीरे-धीरे लागू होंगे। उदाहरण के लिए, ऑटोमोबाइल और स्पिरिट्स पर ड्यूटी में कटौती कई सालों में फैलाई गई है, जिसका मतलब है कि कंपनी के बैलेंस शीट (Balance Sheets) पर इसका असर तुरंत नहीं, बल्कि धीरे-धीरे दिखेगा। इसके अलावा, समझौते में थर्ड-पार्टी देशों को टैरिफ से बचने के लिए इन रास्तों का इस्तेमाल करने से रोकने के लिए सख्त रूल्स ऑफ ओरिजिन (Rules of Origin) शामिल हैं। लिस्टेड कंपनियों के लिए इस डील की लॉन्ग-टर्म सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे इन नए मार्केट एक्सेस पॉइंट्स (Market Access Points) का फायदा कैसे उठा पाती हैं, साथ ही भारतीय घरेलू बाजार में आयातित ब्रिटिश सामानों से बढ़ते कॉम्पिटिशन को कैसे मैनेज करती हैं।
