India-UK Trade Deal: भारतीय निर्यातकों के लिए खुला ब्रिटेन का बाज़ार, 99% प्रोडक्ट्स पर ड्यूटी माफ़

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
India-UK Trade Deal: भारतीय निर्यातकों के लिए खुला ब्रिटेन का बाज़ार, 99% प्रोडक्ट्स पर ड्यूटी माफ़

भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) अब लागू हो गया है। इस समझौते के तहत, 99% भारतीय एक्सपोर्ट को UK मार्केट में ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलेगा। इस ट्रेड पैक्ट का लक्ष्य 2040 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को हर साल £25.5 बिलियन तक बढ़ाना है।

क्या हैं समझौते के मुख्य बिंदु?

भारत और UK के बीच हुआ यह कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA), जो जुलाई 2025 में साइन किया गया था, अब आधिकारिक तौर पर लागू हो गया है। यह समझौता दोनों देशों के बीच संबंधों में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसका मकसद 2040 तक सालाना व्यापार को £25.5 बिलियन तक पहुंचाना है। भारतीय व्यवसायों के लिए सबसे बड़ा फायदा यह है कि उनके 99% प्रोडक्ट्स पर अब UK में कोई ड्यूटी नहीं लगेगी। इससे वियतनाम और बांग्लादेश जैसे क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धियों की तुलना में भारतीय सामानों की कीमत और प्रतिस्पर्धी हो जाएगी।

प्रमुख सेक्टरों पर असर और टैरिफ में कटौती

यह समझौता अलग-अलग सेक्टरों के लिए खास फायदे लेकर आया है। कुछ इंडस्ट्रीज को तुरंत राहत मिलेगी, जबकि कुछ के लिए टैरिफ में कटौती धीरे-धीरे होगी।

  • टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स: UK में शिपमेंट पर ड्यूटी खत्म होने से भारतीय टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स को सीधा फायदा होगा, जिससे लागत कम होगी और मुनाफा बढ़ेगा।
  • फार्मा सेक्टर: भारतीय दवा कंपनियों को अब UK मार्केट में तुरंत जीरो-ड्यूटी एक्सेस मिल गया है, जिससे उन्हें इस क्षेत्र में अपनी पैठ बढ़ाने में मदद मिलेगी।
  • अन्य सेक्टर: कुछ इंडस्ट्रीज के लिए व्यापार बाधाओं को चरणबद्ध तरीके से कम किया जाएगा। उदाहरण के लिए, भारत में स्कॉच व्हिस्की पर लगने वाला 150% का इंपोर्ट ड्यूटी अगले दशक में घटकर 75% हो जाएगा। इसी तरह, एयरोस्पेस इंडस्ट्री में एयरक्राफ्ट इंजन पर ड्यूटी पांच साल में खत्म होगी, जबकि अन्य पुर्जों पर तुरंत ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलेगा।

इंडस्ट्रियल इंटीग्रेशन और लेबर मोबिलिटी

सिर्फ टैरिफ कटौती ही नहीं, बल्कि यह समझौता 'क्यूमुलेशन' (Cumulation) के नियम भी लाया है। इसके तहत, दोनों देशों से सोर्स किए गए मटेरियल को फिनिश्ड गुड्स के ओरिजिन (उत्पत्ति) की जरूरतों को पूरा करने के लिए गिना जा सकेगा। इसका मकसद इंटीग्रेटेड सप्लाई चेन को बढ़ावा देना है, जिससे निर्माता दोनों देशों के कंपोनेंट्स को अधिक कुशलता से जोड़ सकें।

इसके अलावा, यह ट्रेड एग्रीमेंट 'इंडिया-यूके डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन' (DCC) के साथ मिलकर काम करेगा। यह कन्वेंशन UK में अस्थायी असाइनमेंट पर जाने वाले भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए दोहरे सोशल सिक्योरिटी कंट्रीब्यूशन की जरूरत को खत्म करता है। माना जा रहा है कि इससे 75,000 से ज्यादा प्रोफेशनल्स और 900 कंपनियों को फायदा होगा, जिससे बिजनेस करने की लागत कम होगी और दोनों देशों के बीच टैलेंट मूवमेंट को बढ़ावा मिलेगा।

निवेशकों को यह देखना होगा कि कंपनियां इन नई व्यापार शर्तों का फायदा उठाने के लिए अपने इंटरनेशनल ऑपरेशंस को कैसे एडजस्ट करती हैं। कंपनियों की कमाई पर वास्तविक असर UK मार्केट की डिमांड, भारतीय निर्यातकों की प्रोडक्शन बढ़ाने की क्षमता और कंपनियों द्वारा इन नए टैरिफ फ्रेमवर्क को अपनी मौजूदा सप्लाई चेन में कितनी तेजी से इंटीग्रेट करने की क्षमता पर निर्भर करेगा। भविष्य में कंपनियों से UK में एक्सपोर्ट वॉल्यूम और रीजनल ऑपरेशनल कॉस्ट में बदलावों पर अपडेट्स, इस डील की असल सफलता के महत्वपूर्ण संकेतक होंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.