भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच नया ट्रेड एग्रीमेंट (Trade Agreement) लागू हो गया है, जिससे 99% भारतीय एक्सपोर्ट्स (Exports) को ब्रिटेन में ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलेगा। वहीं, लागत बढ़ने से स्मार्टफ़ोन की बिक्री में 10-12% की गिरावट आई है, लेकिन डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन (Direct Tax Collection) 16% बढ़ा है।
भारत-यूके ट्रेड डील: क्या है खास?
15 जुलाई 2026 को भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच बहुप्रतीक्षित कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (Comprehensive Economic and Trade Agreement) लागू हो गया है। इस डील के तहत, अब 99% भारतीय एक्सपोर्ट्स (Exports) बिना किसी कस्टम ड्यूटी के ब्रिटिश बाज़ार में बेचे जा सकेंगे। इस समझौते से टेक्सटाइल, फुटवियर और प्रोसेस्ड फ़ूड जैसे सेक्टर्स को बड़ा फायदा होने की उम्मीद है। भारतीय निर्यातकों के लिए यह एक बड़ी राहत है, क्योंकि अब उनके प्रोडक्ट्स की कीमत यूके मार्केट में ज्यादा कॉम्पिटिटिव (Competitive) हो जाएगी।
हालांकि, इस डील में यूके के कुछ खास प्रोडक्ट्स जैसे प्रीमियम कारें और एल्कोहॉलिक बेवेरेजेज़ (Alcoholic Beverages) पर भी टैरिफ (Tariff) कम किया गया है। साथ ही, यूके में काम करने वाले भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए सोशल सिक्योरिटी (Social Security) के नियमों को आसान बनाने का भी प्रावधान है, जिससे आईटी और सर्विसेज सेक्टर को लाभ मिल सकता है।
स्मार्टफ़ोन मार्केट में मंदी और बढ़ती कीमतें
एक तरफ जहां एक्सपोर्ट्स (Exports) को बूस्ट मिलने की उम्मीद है, वहीं भारत का स्मार्टफ़ोन मार्केट (Smartphone Market) मुश्किल दौर से गुज़र रहा है। अप्रैल-जून तिमाही में स्मार्टफ़ोन शिपमेंट्स (Shipments) में 10% से 12% तक की गिरावट आने का अनुमान है। इसकी मुख्य वजह मेमोरी कंपोनेंट्स (Memory Components) की बढ़ती लागत है, जिसके कारण कंपनियों को अपने हैंडसेट की कीमतें करीब 15% तक बढ़ानी पड़ी हैं। इस बढ़ोतरी का सबसे ज़्यादा असर एंट्री-लेवल सेगमेंट (Entry-Level Segment) पर पड़ा है, जहाँ ग्राहक या तो खरीदारी टाल रहे हैं या अपने पुराने फ़ोन्स को ही इस्तेमाल करना जारी रख रहे हैं।
सरकारी खजाने में मजबूती
वित्तीय मोर्चे पर, सरकार का टैक्स कलेक्शन (Tax Collection) मज़बूत बना हुआ है। 1 अप्रैल से 15 जुलाई 2026 के बीच नेट डायरेक्ट टैक्स रेवेन्यू (Net Direct Tax Revenue) में 16% से ज़्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसमें कॉर्पोरेट टैक्स (Corporate Tax) का बड़ा योगदान रहा, जो 22% बढ़कर ₹2.4 लाख करोड़ तक पहुँच गया। इस तरह, नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन ₹6.5 लाख करोड़ से ज़्यादा हो गया है, जिससे सरकार अपने सालाना लक्ष्य ₹26.97 लाख करोड़ को हासिल करने की राह पर है। यह मजबूत टैक्स कलेक्शन व्यापक कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए एक अच्छा संकेत है।
फॉक्सवैगन इंडिया की रणनीति
ऑटोमोटिव सेक्टर (Automotive Sector) की बात करें तो, फॉक्सवैगन ग्रुप (Volkswagen Group) ने साफ किया है कि 2030 तक की उनकी ग्लोबल स्ट्रेटेजी (Global Strategy) भारत में नहीं बदलेगी। कंपनी इंपोर्ट (Import) पर निर्भर रहने के बजाय लोकल मैन्युफैक्चरिंग (Local Manufacturing) पर ध्यान केंद्रित करेगी। शेयर्ड व्हीकल प्लेटफॉर्म्स (Shared Vehicle Platforms) का इस्तेमाल करके, कंपनी भारतीय बाज़ार और एक्सपोर्ट के लिए गाड़ियां बनाएगी। निवेशक इस बात पर नज़र रखेंगे कि लोकल मैन्युफैक्चरिंग पर यह फोकस कंपनी के ऑपरेटिंग मार्जिन (Operating Margins) को कैसे प्रभावित करता है।
