आज, 15 जुलाई से भारत और यूके के बीच कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) लागू हो गया है। इस समझौते के तहत, भारतीय निर्यातकों के लिए यूके में **99.5%** उत्पादों पर लगने वाली ड्यूटी खत्म कर दी गई है। इसका लक्ष्य 2030 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को **$100 बिलियन** तक पहुंचाना है।
व्यापार को मिलेगी नई उड़ान
15 जुलाई 2026 से लागू हुए इस नए समझौते के तहत, भारत से यूके जाने वाले 99.5% सामान पर कस्टम ड्यूटी (Custom Duty) नहीं लगेगी। इसका सीधा मतलब है कि भारतीय उत्पादों की लागत कम होगी और वे यूके मार्केट में ज़्यादा कॉम्पिटिटिव (Competitive) बन पाएंगे। इस कदम से दोनों देशों के बीच सालाना व्यापार को $100 बिलियन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
किन सेक्टरों को होगा सबसे ज़्यादा फायदा?
इस समझौते का सबसे ज़्यादा असर टेक्सटाइल और गारमेंट इंडस्ट्री पर देखने को मिलेगा, जहाँ पहले 12% तक की ड्यूटी लगती थी। अब 1,143 टेक्सटाइल आइटम्स पर ड्यूटी खत्म होने से भारतीय मैन्युफैक्चरर्स बांग्लादेश और चीन जैसे देशों के मुकाबले बेहतर स्थिति में होंगे। इसके अलावा, लेदर, फुटवियर, जेम्स, ज्वैलरी और केमिकल एक्सपोर्टर्स को भी बड़ी राहत मिलेगी, क्योंकि उन पर पहले 16% तक की ड्यूटी लगती थी।
इंजीनियरिंग गुड्स (Engineering Goods) भी इस डील से काफी फ़ायदा उठा सकते हैं। फिलहाल भारत यूके को लगभग $4.28 बिलियन के इंजीनियरिंग गुड्स एक्सपोर्ट करता है, जबकि यूके का इंपोर्ट मार्केट $190 बिलियन से भी ज़्यादा का है। कम इंपोर्ट ड्यूटी की वजह से भारतीय कंपनियाँ इस बड़े बाज़ार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकती हैं, बशर्ते वे क्वालिटी और दूसरे स्टैंडर्ड्स को पूरा करें।
सर्विसेज और प्रोफेशनल्स के लिए भी खुशखबरी
यह समझौता सिर्फ़ सामानों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सर्विसेज सेक्टर (Services Sector) को भी कवर करता है। IT, फाइनेंशियल सर्विसेज, टेलीकॉम और एजुकेशन जैसे 137 सब-सेक्टर्स को इसमें शामिल किया गया है।
खास बात यह है कि इसमें डबल कॉन्ट्रिब्यूशन कन्वेंशन (DCC) भी शामिल है। इसके तहत, यूके में अस्थायी तौर पर काम करने वाले भारतीय प्रोफेशनल्स अगले 5 साल तक यूके की नेशनल इंश्योरेंस में कंट्रीब्यूट (Contribute) करने से छूट पा सकेंगे। इससे वे भारत के सोशल सिक्योरिटी सिस्टम में ही पैसे जमा करते रहेंगे, जिससे लगभग 75,000 प्रोफेशनल्स और उनकी कंपनियों को सालाना $600 मिलियन से ज़्यादा की बचत होने की उम्मीद है।
आगे क्या?
हालांकि, ड्यूटी में छूट का पूरा फायदा उठाने के लिए भारतीय कंपनियों को 'रूल्स ऑफ ओरिजिन' (Rules of Origin) और इंटरनेशनल प्रोडक्ट स्टैंडर्ड्स (International Product Standards) जैसी नई शर्तों का पालन करना होगा। कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके सप्लाई चेन (Supply Chain) और डॉक्यूमेंटेशन (Documentation) इन नए नियमों के मुताबिक हों। इसके अलावा, भारतीय कंपनियाँ अब यूके के £90 बिलियन के सरकारी प्रोक्योरमेंट मार्केट (Government Procurement Market) में भी बिड (Bid) कर सकेंगी। अब देखना यह होगा कि भारतीय कंपनियाँ कितनी तेज़ी से इन बदलावों के साथ तालमेल बिठा पाती हैं।
