व्यापार घाटा (Trade Deficit) हुआ और गहरा
फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में भारत और UAE के बीच मर्चेंडाइज ट्रेड (Merchandise Trade) $101.25 अरब पर पहुंच गया, जो पिछले साल के $100.03 अरब से मामूली बढ़त दिखाता है। इस दौरान भारत का निर्यात (Exports) लगभग 2% बढ़कर $37.36 अरब हुआ। हालांकि, UAE से आयात (Imports) 0.77% बढ़कर $63.89 अरब हो गया। इसके कारण FY 2025-26 में भारत का व्यापार घाटा बढ़कर $26.53 अरब हो गया। यह घाटा लगातार बढ़ रहा है, जो 2021 में $17.7 अरब और 2024 की पहली छमाही में $9.47 अरब था। UAE का व्यापार अधिशेष (Trade Surplus) मुख्य रूप से तेल और गैस से आता है, जबकि भारत के आयात में खनिज ईंधन, कीमती पत्थर और मोती हावी हैं।
UAE से FDI में आई भारी कमी
व्यापार असंतुलन के अलावा, UAE से भारत में आने वाले फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) में भी खासी गिरावट देखी गई है। अप्रैल से दिसंबर 2025-26 के दौरान UAE से भारत में $2.45 अरब का FDI आया, जबकि पूरे फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में यह $4.34 अरब था। यह आंकड़ा पिछले वर्षों के मुकाबले काफी कम है, जब UAE भारत के FDI में 7.28% हिस्सेदारी के साथ सातवां सबसे बड़ा निवेशक (Investor) था। कुल मिलाकर, अप्रैल 2000 से मार्च 2025 तक UAE से भारत में $22.84 अरब का कुल FDI आया है। FDI में यह गिरावट और बढ़ता व्यापार घाटा UAE की निवेश रणनीतियों में संभावित बदलाव का संकेत दे रहा है।
सेक्टरों में ग्रोथ के बावजूद व्यापार संतुलन चिंताजनक
CEPA ने निश्चित रूप से जेम्स और ज्वेलरी, इंजीनियरिंग गुड्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और एग्रीकल्चर जैसे प्रमुख सेक्टरों में व्यापार को बढ़ावा दिया है। FY 2024-2025 में इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे गैर-तेल निर्यात (Non-oil Exports) में तेज बढ़ोतरी देखी गई। हालांकि, कुल मिलाकर व्यापार का परिदृश्य चिंताजनक बना हुआ है, क्योंकि ऊर्जा उत्पादों और कीमती पत्थरों जैसे आयातों की वृद्धि, इन बढ़ते गैर-तेल निर्यात से कहीं आगे निकल गई है, जिससे व्यापार का अंतर और बढ़ गया है। UAE से भारत के मुख्य आयात में मोती, कीमती पत्थर, पेट्रोलियम उत्पाद और विमान के पुर्जे शामिल हैं।
महत्वाकांक्षी व्यापार लक्ष्यों की राह में चुनौतियाँ
CEPA का लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को $100 अरब और 2032 तक $200 अरब तक पहुंचाना है। भले ही समझौते ने व्यापार की मात्रा बढ़ाई है, लेकिन बढ़ता घाटा बताता है कि भारत निर्यात से ज्यादा मूल्य का आयात कर रहा है। वैश्विक कमोडिटी कीमतों में वृद्धि और विशिष्ट आयात मांगों ने इस पैटर्न को और खराब कर दिया है। FY 2025-26 में भारत का कुल व्यापार घाटा $119.30 अरब रहा। यह स्थिति भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए भी भू-राजनीतिक अस्थिरता (Geopolitical Instability) के कारण जोखिम पैदा कर सकती है।
आगे की राह: व्यापार और निवेश में संतुलन
इन चुनौतियों के बावजूद, दोनों देश 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर $200 अरब करने का लक्ष्य रख रहे हैं। CEPA से बाजार पहुंच (Market Access) का विस्तार करके इसे हासिल करने की उम्मीद है। हालांकि, इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए भारत के निर्यात विकास में तेजी लाने, उच्च-मूल्य वाले निर्यात में विविधता लाने और निरंतर FDI आकर्षित करने पर ध्यान केंद्रित करना होगा। वर्तमान व्यापार की स्थिरता घाटे को संतुलित करने और UAE से निरंतर FDI प्रवाह सुनिश्चित करने पर निर्भर करेगी।
