जून 2026 में भारत का ट्रेड डेफिसिट (Trade Deficit) बढ़कर **$15.32 बिलियन** हो गया है। यह मुख्य रूप से आयात (Imports) में **26.85%** की तेज वृद्धि के कारण हुआ है, जो **$88.76 बिलियन** तक पहुंच गया। हालांकि निर्यात (Exports) में **9.5%** की बढ़ोतरी हुई, लेकिन आयात की तेज रफ्तार ने पहली तिमाही (Q1 FY27) में व्यापार संतुलन पर दबाव बढ़ा दिया।
व्यापार संतुलन पर असर
जून 2026 के लिए जारी विदेशी व्यापार के आंकड़ों से पता चलता है कि देश के निर्यात और आयात के बीच असंतुलन बढ़ रहा है। जून 2026 में, कुल निर्यात (माल और सेवाएं दोनों) में पिछले साल की तुलना में 9.48% की वृद्धि हुई और यह $73.45 बिलियन तक पहुंच गया। लेकिन, आयात में इससे कहीं अधिक यानी 26.85% की वृद्धि देखी गई, जो $88.76 बिलियन पर पहुंच गया। जून 2025 में यह आंकड़ा $69.97 बिलियन था।
आयात में इस तेज उछाल का सीधा असर व्यापार घाटे पर पड़ा। मासिक व्यापार घाटा बढ़कर $15.32 बिलियन हो गया, जो पिछले साल जून के $2.89 बिलियन के घाटे से काफी ज्यादा है। खासकर मर्चेंडाइज (Merchandise) यानी माल के व्यापार में भारी दबाव देखा गया, जहां घाटा $30.43 बिलियन रहा। इस सेगमेंट में आयात 31% बढ़कर $70.84 बिलियन तक पहुंच गया। यह दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में आयातित वस्तुओं की लागत, निर्यात की जा रही वस्तुओं के मूल्य की तुलना में तेजी से बढ़ रही है।
निर्यात क्षेत्र और तिमाही प्रदर्शन
व्यापक व्यापार अंतर के बावजूद, कुछ निर्यात क्षेत्रों ने मजबूत प्रदर्शन दिखाया है। इंजीनियरिंग सामान, जो भारत के निर्यात का एक प्रमुख हिस्सा है, में 20.74% की वृद्धि हुई और यह $11.48 बिलियन तक पहुंच गया। इसी तरह, रत्न और आभूषण (Gems and Jewellery) के निर्यात में 34.64% की वृद्धि के साथ $2.41 बिलियन दर्ज किया गया, जबकि इलेक्ट्रॉनिक सामानों का निर्यात 18.93% बढ़कर $4.93 बिलियन हो गया। सेवा क्षेत्र (Services Sector) में निर्यात $33.03 बिलियन पर स्थिर रहा, जिससे वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही के लिए $49.43 बिलियन का मजबूत सर्विसेज ट्रेड सरप्लस (Services Trade Surplus) बनाए रखने में मदद मिली।
जून में देखी गई यह प्रवृत्ति वित्तीय वर्ष 2026-27 (अप्रैल से जून) की पहली तिमाही में भी जारी रही। इस अवधि के दौरान, कुल निर्यात में 11.37% की वृद्धि हुई और यह $232.73 बिलियन तक पहुंच गया। वहीं, कुल आयात 17.55% बढ़कर $270.15 बिलियन हो गया। इसके परिणामस्वरूप, तिमाही के लिए कुल व्यापार घाटा बढ़कर $37.42 बिलियन हो गया, जो पिछले साल की इसी अवधि में $20.85 बिलियन था।
व्यापार भागीदार और भविष्य का दृष्टिकोण
भारत के व्यापार प्रवाह पर प्रमुख अंतरराष्ट्रीय भागीदारों का गहरा प्रभाव बना हुआ है। सिंगापुर, चीन और दक्षिण अफ्रीका जैसे बाजारों में निर्यात वृद्धि उल्लेखनीय रही। वहीं, रूस, चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका, यूएई और ताइवान से आयात की मात्रा अधिक रही। निवेशक और अर्थशास्त्री अक्सर इन घाटे के रुझानों पर नजर रखते हैं क्योंकि वे मुद्रा की स्थिरता और देश के चालू खाता शेष (Current Account Balance) को प्रभावित करते हैं। भविष्य में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आयात वृद्धि की गति धीमी होती है या नहीं और क्या विशिष्ट क्षेत्र आने वाले महीनों में अपने निर्यात की गति को बनाए रख पाते हैं।
