जून महीने में भारत का ट्रेड डेफिसिट (Trade Deficit) बढ़कर **$30.4 बिलियन** पहुंच गया है। इसका मुख्य कारण कच्चे तेल और फर्टिलाइजर की शिपमेंट में हुई भारी बढ़ोतरी है, जिसके चलते आयात (Imports) में **31%** की जबरदस्त तेजी देखी गई। निर्यात (Exports) **15.4%** बढ़कर **$40.4 बिलियन** रहा, लेकिन आयात की तेज रफ्तार देश के करंट अकाउंट बैलेंस (Current Account Balance) पर दबाव बढ़ा सकती है।
आयात में आई तूफानी तेजी, वजहें क्या?
साल 2026 की शुरुआत के बाद से यह सबसे बड़ा ट्रेड गैप है। कुल आयात (Total Imports) में 31% की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो $70.8 बिलियन तक पहुंच गया। वहीं, निर्यात (Exports) 15.4% बढ़कर $40.4 बिलियन रहा। आयात की रफ्तार निर्यात की तुलना में कहीं ज्यादा तेज रही।
आयात में इस उछाल का मुख्य कारण कच्चे तेल (Crude Oil) की शिपमेंट में 40% से ज्यादा की वृद्धि है, जो महीने के लिए $19.3 बिलियन रहा। ग्लोबल कमोडिटी की ऊंची कीमतें और घरेलू मांग में स्थिरता इसके प्रमुख कारण बने। इसके अलावा, फर्टिलाइजर (Fertilizer) का आयात तीन गुना बढ़कर $2.3 बिलियन हो गया। दूसरी ओर, चांदी (Silver) के आयात में 74% की भारी गिरावट आई और यह $60 मिलियन पर आ गया। ऐसा संभवतः ग्लोबल कीमतों में नरमी और आयात शुल्क में हुए बदलावों के कारण हुआ। सोने (Gold) का आयात 7% बढ़कर करीब $2 बिलियन पर स्थिर रहा।
निर्यात का हाल, सेक्टर-वार
निर्यात की बात करें तो इंजीनियरिंग गुड्स (Engineering Goods) 21% बढ़कर $11.5 बिलियन के साथ भारत का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट सेक्टर बना रहा। इलेक्ट्रॉनिक्स (Electronics) के एक्सपोर्ट में भी 19% की बढ़ोतरी हुई और यह $4.9 बिलियन तक पहुंच गया। इस प्रदर्शन के दम पर इलेक्ट्रॉनिक्स, पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स (Petroleum Products) को पीछे छोड़कर दूसरा सबसे बड़ा एक्सपोर्ट सेक्टर बन गया, जिसके निर्यात में 9.2% की बढ़ोतरी के साथ $4.8 बिलियन दर्ज किए गए। जून में जेम्स एंड ज्वैलरी, फार्मास्यूटिकल्स और केमिकल्स जैसे अन्य सेक्टरों में भी पॉजिटिव ग्रोथ देखने को मिली।
आर्थिक संकेत और आगे का रास्ता
यह ट्रेड डेटा भारत के बाहरी संतुलन के लिए एक मिली-जुली तस्वीर पेश करता है। जहां इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में वृद्धि भारत के एक्सपोर्ट बास्केट में एक सकारात्मक बदलाव का संकेत देती है, वहीं ऊर्जा और कमोडिटी आयात पर भारी निर्भरता समग्र व्यापार संतुलन को प्रभावित कर रही है। रेटिंग एजेंसी ICRA का कहना है कि आयात में बढ़ोतरी कई चीजों के कारण हुई, लेकिन तेल और फर्टिलाइजर जैसे आइटम प्रमुख थे। ICRA की चीफ इकोनॉमिस्ट अदिति नायर का अनुमान है कि फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए करंट अकाउंट डेफिसिट (Current Account Deficit) जीडीपी (GDP) का कम से कम 1.0% तक बढ़ सकता है। निवेशक ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतों पर नजर रखेंगे और यह भी देखेंगे कि क्या हालिया निर्यात वृद्धि की रफ्तार बनी रहती है, खासकर अमेरिका जैसे प्रमुख बाजारों में घटती मांग के बीच, जहां जून में निर्यात में मामूली 1% की गिरावट आई थी।
