ट्रेड डील से मिली एनर्जी शॉक से बड़ी राहत
IMF के एशिया-पैसिफिक डिपार्टमेंट के डायरेक्टर, कृष्णा श्रीनिवासन (Krishna Srinivasan) के मुताबिक, वेस्ट एशिया में चल रहे संघर्ष ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को झकझोर दिया है। ऐसे में, भारत ने अमेरिका के साथ हुए अंतरिम ट्रेड डील (India-US interim trade deal) के चलते ऊँचे एनर्जी प्राइसेज (Energy Prices) के प्रभाव को काफी हद तक कम कर लिया। इस डील के तहत भारतीय सामानों पर टैरिफ (Tariff) में कटौती की गई, जिसने भारत को एक बड़ी मजबूती दी। भारत ने इन वैश्विक झटकों का सामना मजबूत आर्थिक गति, काबू में इन्फ्लेशन (Inflation) और उपलब्ध फिस्कल रिसोर्सेज (Fiscal Resources) के साथ किया। यही वजह है कि IMF ने भारत के ग्रोथ आउटलुक (Growth Outlook) में मामूली ही बदलाव किया है, क्योंकि देश की आर्थिक मजबूती एनर्जी शॉक के असर को काफी हद तक बेअसर कर रही है।
पड़ोसी देशों से बेहतर भारत की स्थिति
अगर पड़ोसी देशों से तुलना की जाए, तो भारत की आर्थिक स्थिति काफी मजबूत नजर आती है। पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे देश फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी (Financial Flexibility) की कमी और आयातित ऊर्जा पर भारी निर्भरता के कारण मौजूदा एनर्जी क्रंच (Energy Crunch) से ज्यादा प्रभावित हैं।
दुनिया भर की आर्थिक उथल-पुथल के बावजूद, भारत के ग्रोथ फोरकास्ट (Growth Forecast) मजबूत बने हुए हैं। IMF का अनुमान है कि भारत का GDP ग्रोथ 6.5% रहेगा (FY2026-27 के लिए)। एशियन डेवलपमेंट बैंक (Asian Development Bank) और UN जैसे संस्थान भी आने वाले सालों के लिए ऐसी ही दरें बता रहे हैं, जो भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनाती है।
IMF की फूड इन्फ्लेशन और तेल की कीमतों पर मुख्य चिंताएं
अपनी मजबूती के बावजूद, IMF ने कुछ गंभीर चिंताओं पर भी प्रकाश डाला है। श्रीनिवासन ने बताया कि अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊँचे बनी रहीं, तो इसका अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है। अनुमान है कि अगर एनर्जी कॉस्ट (Energy Cost) इसी तरह बढ़ती रही, तो 2027 तक देश के कुल आउटपुट (Output) में 1-2% तक का नुकसान हो सकता है।
एक बड़ा खतरा फूड इन्फ्लेशन (Food Inflation) का है। संघर्ष की वजह से फर्टिलाइजर सप्लाई चेन (Fertilizer Supply Chain) में आई रुकावटों से खाने-पीने की चीजों के दाम और बढ़ सकते हैं। मार्च 2026 तक भारत की इन्फ्लेशन दर RBI के टारगेट रेंज में थी, लेकिन सप्लाई की दिक्कतें इस स्थिति को बिगाड़ सकती हैं।
भारत अपनी कच्चे तेल की 85% जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। ऐसे में, अगर तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो करेंसी डेप्रिसिएशन (Currency Depreciation) का खतरा बढ़ जाता है, जिससे आयात और महंगा हो जाएगा। फ्यूल एक्साइज ड्यूटी (Fuel Excise Duty) में कटौती और फर्टिलाइजर सब्सिडी (Fertilizer Subsidy) जैसे कदम तत्काल राहत देते हैं, लेकिन ये पब्लिक फाइनेंस (Public Finances) पर दबाव बढ़ाते हैं। अगर संकट लंबा चला, तो ये सपोर्ट मेजर्स सरकार के बजट को लक्ष्य से पार ले जा सकते हैं।
आउटलुक पॉजिटिव, पर जोखिमों से सतर्क रहने की जरूरत
भविष्य को देखें तो भारत की आर्थिक ग्रोथ अच्छी रहने की उम्मीद है। विभिन्न संस्थान 2026 और 2027 के लिए 6.4% से 6.9% के बीच ग्रोथ रेट का अनुमान लगा रहे हैं, जो डोमेस्टिक डिमांड (Domestic Demand) और पॉलिसी रिफॉर्म्स (Policy Reforms) से संचालित होगी।
इन्फ्लेशन के टारगेट लेवल पर वापस आने की उम्मीद है, हालांकि IMF का अनुमान है कि ग्लोबल एनर्जी और फूड प्राइस प्रेशर (Global Energy and Food Price Pressures) के कारण 2026 में यह अस्थायी रूप से बढ़कर 4.7% तक जा सकती है। ऐसे में, लगातार ग्रोथ बनाए रखने और इन बाहरी झटकों को झेलने के लिए फिस्कल डिसिप्लिन (Fiscal Discipline) और चुस्त मॉनेटरी पॉलिसी (Agile Monetary Policy) की जरूरत होगी।
