भारत का सेवा क्षेत्र, जो देश की GDP का आधे से ज़्यादा हिस्सा है, अब हर महीने ट्रैक किया जाएगा। मिनिस्ट्री ऑफ स्टैटिस्टिक्स (Ministry of Statistics) जल्द ही 'इंडेक्स ऑफ सर्विसेज़ प्रोडक्शन' (Index of Services Production) लॉन्च करने वाली है। यह नया इंडेक्स 19 सब-सेक्टरों पर नज़र रखेगा और रियल-टाइम इकोनॉमिक ग्रोथ (real-time economic growth) को समझने में मदद करेगा।
इकोनॉमी की सेहत का नया पैमाना
अभी तक भारतीय अर्थव्यवस्था में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर (manufacturing sector) की तरह सेवाओं (services) के लिए कोई सरकारी मंथली आउटपुट इंडिकेटर (monthly output indicator) नहीं था। लेकिन अब मिनिस्ट्री ऑफ स्टैटिस्टिक्स एंड प्रोग्राम इम्प्लीमेंटेशन (Ministry of Statistics and Programme Implementation) अगले कुछ महीनों में 'इंडेक्स ऑफ सर्विसेज़ प्रोडक्शन' (Index of Services Production) का एक कंसोलिडेटेड हेडलाइन फिगर (consolidated headline figure) जारी करने की तैयारी में है। यह उन निवेशकों और पॉलिसीमेकर्स (policymakers) के लिए एक बड़ी खुशखबरी है जो रियल-टाइम में इकोनॉमिक ग्रोथ (economic growth) को समझना चाहते हैं।
ट्रायल डेटा क्या कहता है?
सरकार ने पहले ही 19 सर्विस सब-सेक्टरों (service sub-sectors) के लिए ट्रायल मंथली इंडेक्स पब्लिश किए हैं, जो फॉर्मल सर्विसेज इकोनॉमी (formal services economy) का लगभग 60% हिस्सा कवर करते हैं। स्टैटिस्टिक्स सेक्रेटरी सौरभ गर्ग (Saurabh Garg) के मुताबिक, मिनिस्ट्री का लक्ष्य इस मौजूदा डेटा का इस्तेमाल करके हेडलाइन फिगर लॉन्च करना है। साथ ही, हेल्थ (health) और एजुकेशन (education) जैसे और सेक्टर्स को भी इसमें शामिल करने का काम चल रहा है, जो डेटा की उपलब्धता और रिलायबिलिटी (reliability) पर निर्भर करेगा।
अप्रैल के शुरुआती ट्रायल डेटा (trial data) के मुताबिक, 19 में से 14 सब-सेक्टरों में डबल-डिजिट ईयर-ऑन-ईयर ग्रोथ (double-digit year-on-year growth) देखने को मिली है। खासकर, अकॉमोडेशन (accommodation), फूड सर्विसेज (food services), रिटेल ट्रेड (retail trade) और एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विसेज (administrative services) में ज़बरदस्त बढ़त दर्ज की गई। वहीं, एयर ट्रांसपोर्ट (air transport) में गिरावट आई, जबकि रेलवे ट्रांसपोर्ट (railway transport) में स्थिति स्थिर बनी रही।
निवेशकों के लिए क्या मायने?
यह नया इंडेक्स निवेशकों और एनालिस्ट्स (analysts) को सर्विसेज सेक्टर की बेहतर तस्वीर देगा, जो रोज़गार (employment) और खपत (consumption) का एक बड़ा जरिया है। हर महीने सर्विस आउटपुट (service output) का पता चलने से इकोनॉमिक साइकिल (economic cycles) और डिमांड ट्रेंड्स (demand trends) को समझना आसान होगा। सरकार का मानना है कि यह डेटा, मौजूदा लेबर (labor) और इंडस्ट्रियल मेट्रिक्स (industrial metrics) के साथ मिलकर, नेशनल GDP एस्टिमेट्स (GDP estimates) को और ज़्यादा सटीक और मजबूत बनाएगा।
निवेशकों को यह देखना होगा कि सरकार फाइनल हेडलाइन इंडेक्स (headline index) बनाने के लिए इन 19 सब-सेक्टरों की अलग-अलग ग्रोथ रेट्स (growth rates) को कैसे एडजस्ट (adjust) करती है। ट्रायल डेटा से ऑफिशियल लॉन्च तक का सफर इस इंडेक्स की असली अहमियत तय करेगा, जो भारत की इकोनॉमिक हेल्थ (economic health) और बिजनेस डिमांड (business demand) को समझने का एक ज़रूरी टूल बन सकता है।
