1 अप्रैल 2026 से भारत में इनकम टैक्स के नियमों में बड़ा फेरबदल होने वाला है, जिसका सीधा असर कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाओं (Perks) पर टैक्स लगाने के तरीके पर पड़ेगा। सरकार ने कंपनी द्वारा दी जाने वाली कई सुविधाओं, खासकर कंपनी की गाड़ियों, को महंगा कर दिया है, जबकि कैश पेमेंट जैसे फायदों को टैक्स में अधिक छूट दी जाएगी।
कंपनी की गाड़ियों पर बढ़ेगा टैक्स का बोझ
इस नए नियम का सबसे बड़ा असर कंपनी की गाड़ियों पर दिखेगा। अब कंपनी की कार का टैक्सेबल वैल्यू काफी बढ़ जाएगा। उदाहरण के लिए, एक 1.8-लीटर SUV, जिसका इस्तेमाल ऑफिस और पर्सनल काम के लिए होता है, उसकी हर महीने की टैक्सेबल वैल्यू ₹2,400 से बढ़कर ₹7,000 तक हो सकती है। अगर आप ड्राइवर भी रखते हैं, तो इसके लिए हर महीने ₹3,000 अतिरिक्त देने होंगे, जो पहले सिर्फ ₹900 थे। इससे सीनियर एग्जीक्यूटिव्स की एनुअल टैक्सेबल इनकम ₹1.2 लाख से ज्यादा बढ़ सकती है, जिससे कंपनी कारें कम आकर्षक हो जाएंगी।
इन फायदों पर टैक्स में मिलेगी बड़ी छूट
वहीं, दूसरी तरफ कुछ ऐसी सुविधाएं हैं जिन पर टैक्स में बड़ी राहत मिलने वाली है। कंपनी की तरफ से दिए जाने वाले ब्याज-मुक्त लोन (Interest-Free Loans) पर टैक्स-फ्री लिमिट ₹20,000 से सीधे ₹2 लाख कर दी गई है, जो कि दस गुना बढ़ोतरी है। रोजमर्रा के खर्चों के लिए मिलने वाले मील वाउचर (Meal Vouchers) की टैक्स-फ्री लिमिट भी चार गुना बढ़कर ₹50 से ₹200 प्रति मील हो गई है। इसके अलावा, गिफ्ट वाउचर पर मिलने वाली सालाना टैक्स छूट ₹5,000 से बढ़ाकर ₹15,000 कर दी गई है।
कंपनियों के लिए नई चुनौतियां
इन बदलावों के बाद कंपनियों को अपने पेरोल प्रोसेसिंग और सैलरी प्लानिंग में बड़े बदलाव करने होंगे। कई सुविधाओं के वैल्यूएशन काफी सालों से बदले नहीं थे, इसलिए अब उन्हें अपडेट करने की जरूरत पड़ेगी। सरकार ने यह भी साफ किया है कि कुल भुगतान (Total Compensation) में बेसिक पे और डियरनेस अलाउंस (DA) का हिस्सा कम से कम 50% होना चाहिए। इस वजह से कई कंपनियां अपना सैलरी स्ट्रक्चर बदलेंगी, जिसमें हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और लीव ट्रेवल अलाउंस (LTA) जैसे फ्लेक्सिबल अलाउंस कम हो सकते हैं।
नया टैक्स रिजीम बन सकता है ज्यादा आकर्षक
इन टैक्स सुधारों के चलते, हो सकता है कि अब कर्मचारी पुराने टैक्स रिजीम की तुलना में नए टैक्स रिजीम (New Tax Regime) को ज्यादा पसंद करें। नए रिजीम में टैक्स की दरें कम हैं, लेकिन डिडक्शन (कटौती) कम मिलते हैं। वहीं, पुराने रिजीम में कई तरह की छूटें मिलती थीं। इन बदलावों के कारण कर्मचारियों को अपनी पर्सनल फाइनेंशियल एनालिसिस करके यह तय करना होगा कि उनके लिए कौन सा टैक्स रास्ता बेहतर रहेगा।
आगे क्या?
कुल मिलाकर, अप्रैल 2026 से होने वाले ये टैक्स बदलाव कर्मचारियों के भुगतान (Compensation) में पारदर्शिता लाएंगे। कंपनियों को अपने कंपनसेशन पैकेज को रेगुलेटरी जरूरतों और टैलेंट को आकर्षित करने के बीच संतुलन बनाना होगा। वहीं, कर्मचारियों को अपनी सैलरी, टैक्स देनदारियों और कॉर्पोरेट परक्स की वैल्यू को ध्यान से समझना होगा।