वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में टैक्स अनुपालन को आसान बनाने और समय पर फाइलिंग को बढ़ावा देने के लिए कई अहम ऐलान किए हैं। इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की रिवाइज्ड डेडलाइन को 31 दिसंबर से बढ़ाकर अगले साल 31 मार्च कर दिया गया है। हालांकि, इसके लिए एक मामूली फीस चुकानी होगी।
पहले से तय फाइलिंग समय-सीमा में भी कुछ बदलाव किए गए हैं। ITR-1 और ITR-2 फाइल करने वालों के लिए 31 जुलाई की डेडलाइन बरकरार है। वहीं, नॉन-ऑडिट वाले बिजनेसेज और ट्रस्ट्स के लिए ओरिजिनल रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारीख बढ़ाकर 31 अगस्त कर दी गई है। रिवाइज्ड रिटर्न, जो ओरिजिनल डेडलाइन के बाद फाइल किए जाते हैं, उन पर फीस का स्ट्रक्चर भी तय किया गया है: ₹1,000 उन लोगों के लिए जिनकी कुल आय ₹5 लाख तक है, और ₹5,000 बाकी सभी के लिए, अगर वे टैक्स ईयर खत्म होने के 9 महीने बाद फाइल करते हैं। इन कदमों का मकसद टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन को कम मुश्किल बनाना और बेवजह के लिटिगेशन को कम करना है। आने वाला नया इनकम टैक्स एक्ट, 2025, 1 अप्रैल, 2026 से लागू होगा, जिससे आम नागरिकों के लिए नियमों को सरल बनाने और फॉर्म्स को रीडिजाइन करने का वादा किया गया है।
एक और खास पहल की गई है, जो एक बार की 6 महीने की फॉरेन एसेट डिस्क्लोजर स्कीम है। यह खास तौर पर छोटे टैक्सपेयर्स, जैसे स्टूडेंट्स, यंग प्रोफेशनल्स, टेक एम्प्लॉईज और NRI (Non-Resident Indians) के लिए है। यह स्कीम उन लोगों को विदेशी आय या संपत्ति घोषित करने का मौका देती है, जिन पर पहले टैक्स नहीं लगा था या जिन्हें पिछले रिटर्न में रिपोर्ट नहीं किया गया था। इसके बदले, उन्हें टैक्स, पेनल्टी और अभियोजन (prosecution) से छूट मिल जाएगी।
स्कीम के तहत दो कैटेगरी बनाई गई हैं। पहली कैटेगरी उन लोगों के लिए है जिन्होंने अपनी विदेशी आय या संपत्ति का खुलासा नहीं किया है। ₹1 करोड़ तक की ऐसी अनडिस्क्लोज्ड इनकम या संपत्ति पर, ऐसे टैक्सपेयर्स को संपत्ति या अनडिस्क्लोज्ड इनकम के फेयर मार्केट वैल्यू का 30% और साथ में 30% अतिरिक्त इनकम टैक्स (पेनल्टी के बदले) देना होगा। इससे उन्हें अभियोजन से सुरक्षा मिल जाएगी। दूसरी कैटेगरी में वो लोग शामिल हैं जिन्होंने इनकम तो घोषित की, लेकिन संपत्ति घोषित करना भूल गए। ₹5 करोड़ तक की संपत्ति के लिए, उन्हें सिर्फ ₹1 लाख की फीस भरनी होगी, जिससे उन्हें पेनल्टी और अभियोजन दोनों से छूट मिल जाएगी। भारत में इस तरह की एमनेस्टी स्कीम्स (amnesty schemes) पहले भी आती रही हैं, जिनका मकसद ब्लैक मनी को बाहर लाना होता है। हालांकि, लगातार अनुपालन (sustained compliance) को बढ़ावा देने में उनकी लंबी अवधि की प्रभावशीलता पर हमेशा बहस होती रही है।
इन मुख्य घोषणाओं के अलावा, बजट में डायरेक्ट टैक्स से जुड़े कुछ और एडजस्टमेंट भी प्रस्तावित हैं। इनकम टैक्स एक्ट के तहत कुछ अपराधों के लिए अधिकतम सजा को 7 साल से घटाकर 2 या 3 साल कर दिया गया है, जिसमें टैक्स राशि के आधार पर टियर वाली पेनल्टी होगी। असेसमेंट (Assessment) और पेनल्टी की कार्यवाही को एक कॉमन ऑर्डर के तहत इंटीग्रेट किया जाएगा, ताकि कार्यवाही की मल्टीपल प्रोसेस को कम किया जा सके। गलत रिपोर्टिंग (misreporting) के मामलों में पेनल्टी और अभियोजन से छूट का दायरा भी बढ़ाया गया है, बशर्ते टैक्सपेयर अतिरिक्त इनकम टैक्स का भुगतान करे। सरकार का साफ लक्ष्य है कि टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन को कम लिटिगियस और ज्यादा फ्रेंडली बनाया जाए, जिससे सिस्टम में भरोसा बढ़े। यह ध्यान देने वाली बात है कि बजट 2026 में पुराने और नए दोनों ही टैक्स रिजीम के तहत इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है।