### टैक्स नियमों में बड़ा फेरबदल, कर्मचारियों को मिल सकती है बड़ी राहत
भारत में इनकम टैक्स के नियमों में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है, जिसका सीधा असर कर्मचारियों की सैलरी पर पड़ने वाली टैक्स स्लैब पर पड़ेगा। सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) ने ड्राफ्ट इनकम टैक्स रूल्स, 2026 को सार्वजनिक डोमेन में जारी कर दिया है। ये नए नियम 1 अप्रैल, 2026 से लागू हो सकते हैं, जो नई इनकम टैक्स एक्ट, 2025 के साथ चलेंगे। मुख्य तौर पर, कर्मचारियों को मिलने वाले भत्ते (Perquisites) जैसे भोजन, गिफ्ट और लोन पर टैक्स छूट की सीमा बढ़ाई गई है, वहीं कंपनी की ओर से दी जाने वाली गाड़ियों के टैक्सेबल वैल्यू को भी महंगाई के हिसाब से एडजस्ट किया गया है। यह कदम कर्मचारियों को बढ़ती महंगाई के बीच राहत देने और टैक्स कंप्लायंस को आधुनिक बनाने की दिशा में एक प्रयास है। इन प्रस्तावों पर 22 फरवरी, 2026 तक जनता से राय मांगी गई है।
### भोजन और गिफ्ट पर टैक्स-फ्री लिमिट में भारी बढ़ोतरी
पुरानी टैक्स वैल्यू, जो सालों से अपरिवर्तित थीं, अब महंगाई को देखते हुए अपडेट की जा रही हैं। सबसे बड़ा बदलाव भोजन और पेय पदार्थों पर है। काम के दौरान एम्प्लॉयर द्वारा दिए जाने वाले भोजन या नॉन-अल्कोहलिक पेय पदार्थ पर अब ₹200 प्रति मील तक की राशि टैक्स-फ्री होगी, जबकि पहले यह सीमा केवल ₹50 थी। इसी तरह, कर्मचारियों को साल भर में मिलने वाले गिफ्ट्स (जैसे जन्मदिन, सालगिरह या फेस्टिवल गिफ्ट) पर टैक्स-फ्री लिमिट ₹5,000 से बढ़ाकर ₹15,000 कर दी गई है। इसके अलावा, एम्प्लॉयर द्वारा दिए जाने वाले बिना ब्याज वाले या कम ब्याज वाले लोन की लिमिट भी ₹20,000 से बढ़ाकर ₹2 लाख कर दी गई है। इन कदमों से कर्मचारियों की खर्च करने की क्षमता बढ़ेगी, खासकर ऐसे समय में जब वेतन वृद्धि अक्सर महंगाई की दर से पिछड़ जाती है।
### कंपनी की गाड़ियों के मूल्यांकन में भी हुआ इजाफा
कर्मचारियों को मिलने वाली कंपनी की गाड़ियों के टैक्सेबल वैल्यू में भी महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित हैं। ये वैल्यूएशन महंगाई और बढ़ती रनिंग-मेंटेनेंस लागतों को ध्यान में रखकर किए गए हैं। 1.6 लीटर तक इंजन कैपेसिटी वाली गाड़ियों के लिए मासिक टैक्सेबल वैल्यू ₹2,700 से बढ़कर ₹8,000 कर दी गई है। इसमें कार के लिए ₹5,000 और ड्राइवर के लिए ₹3,000 शामिल हैं। वहीं, 1.6 लीटर से बड़ी गाड़ियों के लिए मासिक वैल्यू ₹3,300 से बढ़कर ₹10,000 हो गई है, जिसमें कार के ₹7,000 और ड्राइवर के ₹3,000 शामिल हैं। विश्लेषण बताते हैं कि इन बढ़ी हुई वैल्यूएशन के कारण, खासकर वे कर्मचारी जिनके रनिंग खर्चों का भुगतान कंपनी करती है, उन्हें कुछ ज्यादा टैक्स देना पड़ सकता है।
### सीबीडीसी (CBDC) इंटीग्रेशन: डिजिटल भुगतान की ओर एक अहम कदम
इन टैक्स नियमों के ड्राफ्ट में एक और महत्वपूर्ण बात सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) का उल्लेख है। इसे टैक्स भुगतान के लिए एक स्वीकृत इलेक्ट्रॉनिक माध्यम के तौर पर शामिल किया गया है। यह भारत के डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने और वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को बढ़ाने की व्यापक योजना का हिस्सा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह CBDC को भविष्य में व्यापक रूप से अपनाने के लिए एक मजबूत नियामक आधार तैयार करेगा।
### नियमों को सरल बनाने का भी लक्ष्य
सरकार का इरादा टैक्स कंप्लायंस को और आसान बनाना भी है। ड्राफ्ट रूल्स के तहत, कुल नियमों की संख्या 511 से घटाकर लगभग 333 और फॉर्म्स की संख्या 399 से घटाकर 190 करने का प्रस्ताव है। इसका मकसद करदाताओं के लिए टैक्स प्रक्रिया को सरल और स्पष्ट बनाना है। अंतिम नियम 22 फरवरी, 2026 तक प्राप्त होने वाली जनता की राय के बाद तय किए जाएंगे, जिसके बाद मार्च की शुरुआत में नोटिफिकेशन जारी होने की उम्मीद है। ये बदलाव जहां एक ओर कर्मचारियों को कुछ राहत दे सकते हैं, वहीं दूसरी ओर बढ़ी हुई टैक्सेबल वैल्यू कुछ लोगों के लिए अतिरिक्त टैक्स का कारण भी बन सकती है।