भारत का बड़ा दांव: इंफ्रा के लिए पेंशन फंड और बीमा कंपनियों को सौंपी बड़ी ज़िम्मेदारी

ECONOMY
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
भारत का बड़ा दांव: इंफ्रा के लिए पेंशन फंड और बीमा कंपनियों को सौंपी बड़ी ज़िम्मेदारी
Overview

भारत सरकार देश के बुनियादी ढांचा (Infrastructure) क्षेत्र को मजबूती देने के लिए एक बड़ा कदम उठा रही है। सरकार ने अब पेंशन फंड (Pension Funds) और बीमा कंपनियों (Insurers) जैसे दीर्घकालिक निवेशकों (Long-term investors) से मिलने वाले फंड को सीधे इंफ्रा प्रोजेक्ट्स में लगाने का निर्देश दिया है। इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए एक नई समिति का गठन किया गया है।

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लंबी अवधि के निवेश से इंफ्रा को मिलेगी रफ्तार

आर्थिक मामलों की सचिव, अनुराधा ठाकुर ने बताया कि एक नई समिति इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में पेंशन फंड और बीमा कंपनियों के निवेश को सुव्यवस्थित (streamline) करेगी। देश में बुनियादी ढांचे के लिए फंड की भारी कमी है, जो GDP के 5% से भी ज़्यादा है। World Bank का अनुमान है कि भारत को $1.7 ट्रिलियन तक की ज़रूरत है। National Infrastructure Pipeline (NIP) का लक्ष्य 2030 तक लगभग ₹147 ट्रिलियन ($1.7 ट्रिलियन USD) जुटाना है।

PPPs, मोनेटाइजेशन और FDI - ये हैं भारत के फंड जुटाने के तरीके

भारत अपने इंफ्रास्ट्रक्चर लक्ष्यों को पूरा करने के लिए कई तरीकों का इस्तेमाल कर रहा है। Public-Private Partnerships (PPPs) एक आजमाया हुआ तरीका है, जिसके तहत 1990 से 2022 के बीच 1,265 से ज़्यादा प्रोजेक्ट्स पर सहमति बनी, जिनमें करीब $295.56 बिलियन का निवेश हुआ। अकेले रोड PPPs में 2000 से 2020 के बीच ₹2575 बिलियन से ज़्यादा का निवेश हुआ। National Monetisation Pipeline (NMP) के ज़रिए FY 2023-24 के अंत तक ₹3.85 लाख करोड़ ($46 बिलियन USD) की संपत्ति को मोनेटाइज किया गया है। NMP का लक्ष्य FY25 तक ₹6 लाख करोड़ ($72 बिलियन USD) और 2025-30 के लिए ₹10 लाख करोड़ ($120 बिलियन USD) है। Canada Pension Plan Investment Board और Ontario Teachers' Pension Plan जैसे ग्लोबल फंड्स ने भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर ट्रस्ट्स (InvITs) में भी निवेश किया है।

बीमा सेक्टर में 100% FDI, विदेशी पूंजी की राह खुली

बीमा (Insurance) सेक्टर में 100% Foreign Direct Investment (FDI) की इजाज़त देना एक बड़ा बदलाव है, जो पहले 74% तक सीमित था। इससे बड़े पैमाने पर विदेशी पूंजी (foreign capital) आने, नए प्रोडक्ट्स की शुरुआत होने और बाज़ार के विस्तार की उम्मीद है। भारत 2032 तक दुनिया का छठा सबसे बड़ा बीमा बाज़ार बनने की राह पर है, जो 'Insurance for All by 2047' लक्ष्य के लिए अहम है। फिलहाल, संस्थागत निवेशक (institutional investors) अपने पोर्टफोलियो का केवल लगभग 6% ही इंफ्रास्ट्रक्चर में लगाते हैं। सरकार पारदर्शिता बढ़ाकर और NMP और PPP जैसे स्पष्ट रोडमैप पेश करके इसे बढ़ाने का लक्ष्य रखती है।

इंफ्रा फंडिंग में अभी भी हैं चुनौतियां

इन योजनाओं के बावजूद, महत्वपूर्ण चुनौतियां बनी हुई हैं। PPP प्रोजेक्ट्स और एसेट मोनेटाइजेशन में ज़मीन अधिग्रहण, रेगुलेटरी अनिश्चितता और लागत बढ़ने जैसी दिक्कतें आ सकती हैं। कुछ लोगों को चिंता है कि एसेट मोनेटाइजेशन से एकाधिकार (monopolies) बढ़ सकता है, कीमतें महंगी हो सकती हैं या वैल्यूएशन की समस्याएँ आ सकती हैं। विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ रही है, लेकिन कानूनी और रेगुलेटरी बाधाएँ अभी भी एक बड़ा अवरोध हैं। इसके अलावा, घरेलू संस्थागत निवेशकों द्वारा इंफ्रास्ट्रक्चर में कम निवेश करना भी फंड जुटाने की राह में एक बड़ी बाधा है। वैश्विक आर्थिक मंदी (slowdown) भी बीमा प्रीमियम की ग्रोथ को धीमा कर सकती है, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए उपलब्ध पूंजी पर असर पड़ सकता है।

निवेशक विश्वास बढ़ाना ही आगे की राह

सरकार का 2047 तक 'Viksit Bharat' (विकसित भारत) का दीर्घकालिक लक्ष्य टिकाऊ विकास के प्रति प्रतिबद्धता दिखाता है। एक स्थिर और पारदर्शी नीतिगत माहौल लगातार निवेश को आकर्षित करने में मदद करेगा। घरेलू और विदेशी पूंजी के समन्वय से इन योजनाओं का सफल कार्यान्वयन भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक लक्ष्यों के लिए महत्वपूर्ण है। विश्लेषक (Analysts) सतर्कता के साथ आशावादी हैं, वे भारत को एक आकर्षक इंफ्रास्ट्रक्चर बाज़ार मानते हैं जिसमें विकास की अपार संभावनाएं हैं, बशर्ते निष्पादन (execution) जोखिमों को प्रभावी ढंग से संभाला जाए।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.