FY26 में इनडायरेक्ट टैक्स का दमदार प्रदर्शन
फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) के अंत में इनडायरेक्ट टैक्स रेवेन्यू ने सरकार की उम्मीदों को पार कर लिया। कस्टम्स ड्यूटी कलेक्शन रिवाइज्ड एस्टिमेट का 102% रहा, एक्साइज ड्यूटी 101% पर पहुंची, और सेंट्रल GST (CGST) ने 100.8% का आंकड़ा छुआ। इन सभी के मिले-जुले प्रदर्शन से कुल इनडायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 101.2% के रिवाइज्ड एस्टिमेट से भी ऊपर रहा, जो कि FY26 के लिए ₹15.52 लाख करोड़ से अधिक था। यह मजबूत डोमेस्टिक इकोनॉमी और प्रभावी टैक्स कम्प्लायंस का नतीजा माना जा रहा है।
नया सेस अपने लक्ष्य से काफी पीछे
इस शानदार प्रदर्शन के बीच, एक बड़ी चूक हेल्थ और नेशनल सिक्योरिटी सेस (Health and National Security Cess) की रही। 1 फरवरी 2026 से लागू हुए इस नए लेवी ने अपने रिवाइज्ड एस्टिमेट का मात्र 63% ही जुटा पाया, जो कि ₹2,330 करोड़ तय किया गया था। यह नए टैक्सेस को कलेक्ट करने में आ रही चुनौतियों को दिखाता है। हालांकि, सरकार ने FY27 के लिए इस सेस से ₹14,000 करोड़ जुटाने का बजट बनाया है, जो कि एक बड़ी उम्मीद है।
FY27 में टैक्स कट्स और वैश्विक चुनौतियाँ
FY26 की मजबूत क्लोजिंग के बावजूद, फिस्कल अथॉरिटीज आने वाले साल (FY27) को लेकर सतर्क हैं। ग्लोबल सप्लाई चेन की दिक्कतों को दूर करने के लिए नियोजित ड्यूटी कंसेशन्स (Duty Concessions) और हाल ही में पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में की गई कटौती, रेवेन्यू ग्रोथ को धीमा कर सकती हैं। अकेले फ्यूल पर एक्साइज ड्यूटी घटाने से FY27 में ₹1 से ₹1.2 लाख करोड़ तक के रेवेन्यू लॉस का अनुमान है, जो एक बड़ी फिस्कल चुनौती है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया में बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनावों के कारण सरकार की FY27 फिस्कल प्लानिंग और जटिल हो गई है।
FY27 के लिए स्ट्रक्चरल शिफ्ट्स और रेवेन्यू रिस्क
FY27 के लिए अनुमानित ग्रॉस टैक्स रेवेन्यू (GTR) ₹44.04 लाख करोड़ है, जिसमें से डायरेक्ट टैक्सेस का हिस्सा 61.2% रहेगा। कॉर्पोरेट टैक्स की बजाय पर्सनल इनकम टैक्स पर बढ़ती निर्भरता, रेवेन्यू कलेक्शन के स्ट्रक्चरल बदलाव को दर्शाती है। FY26 का मजबूत इनडायरेक्ट टैक्स प्रदर्शन FY27 की चिंताओं को पूरी तरह कम नहीं करता। फ्यूल एक्साइज ड्यूटी कट से होने वाला रेवेन्यू लॉस, और नए सेस का कम कलेक्शन, फिस्कल कंसॉलिडेशन के प्रयासों को खतरे में डालता है। FY27 के लिए अनुमानित ₹17.07 लाख करोड़ का इनडायरेक्ट टैक्स कलेक्शन (FY26 के ₹15.52 लाख करोड़ RE से अधिक) भी खतरे में पड़ सकता है, अगर कंज्यूमर स्पेंडिंग धीमी होती है या वैश्विक मंदी बढ़ती है।
फिस्कल डेफिसिट की चिंताएँ और आगे की राह
सरकार ने FY27 के लिए 8.0% GTR ग्रोथ का बजट रखा है, जो 10% नॉमिनल GDP ग्रोथ की उम्मीद पर आधारित है। हालांकि, कुछ एनालिस्ट्स का मानना है कि GDP डेटा रिवीजन के कारण FY26 का फिस्कल डेफिसिट (Fiscal Deficit) 4.4% के रिवाइज्ड एस्टिमेट को पार कर 4.5% तक पहुंच सकता है। FY27 के लोअर डेफिसिट टारगेट पर भी फ्यूल ड्यूटी कट से होने वाले रेवेन्यू सैक्रिफाइस और जारी खर्चों के दबाव से असर पड़ सकता है। सरकार की रणनीति में मुख्य रूप से रेवेन्यू स्ट्रीम्स की कड़ी निगरानी शामिल होगी, खासकर नए सेस के प्रदर्शन और कस्टम्स ड्यूटी में बदलावों का ट्रेड पर पड़ने वाले असर पर।