MSME सेक्टर को बड़ा सहारा: TReDS रिफॉर्म से वर्किंग कैपिटल की राह खुली, ₹7.5 लाख करोड़ से ज्यादा की उम्मीद

ECONOMY
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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
MSME सेक्टर को बड़ा सहारा: TReDS रिफॉर्म से वर्किंग कैपिटल की राह खुली, ₹7.5 लाख करोड़ से ज्यादा की उम्मीद
Overview

केंद्र सरकार MSME (माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज) के लिए बड़ी सौगात लेकर आई है। वर्किंग कैपिटल (Working Capital) की पुरानी समस्या को दूर करने के लिए ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (TReDS) को और मजबूत किया जा रहा है। सरकार ने कई नए कदम उठाए हैं, जिनमें सेंट्रल पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज (CPSEs) के लिए TReDS पर MSME ट्रांजेक्शन को अनिवार्य करना, क्रेडिट गारंटी स्कीम लाना और गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) को इंटीग्रेट करना शामिल है। इन कदमों से MSME सेक्टर को **₹7.5 लाख करोड़** से अधिक का फंड मिलने की उम्मीद है।

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MSME फाइनेंसिंग के लिए बड़े स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स

भारत का कदम MSME फाइनेंसिंग के लिए बड़े स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स की ओर बढ़ रहा है। सरकार का ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (TReDS) को एक्टिव बनाने पर जोर, MSME के लिए वर्किंग कैपिटल (Working Capital) जुटाने के तरीके में एक बड़ा बदलाव लाएगा। यह पहल सिर्फ पारंपरिक क्रेडिट लाइन्स से आगे बढ़कर, छोटे व्यवसायों के लिए वित्तीय तनाव के मूल कारण - यानी बड़े खरीदारों से पेमेंट में देरी - को सीधे संबोधित करती है।

वर्ल्ड बैंक की सिफारिशें शामिल

ताजा बजट प्रस्तावों में वर्ल्ड बैंक (World Bank) की फाइनेंशियल सेक्टर असेसमेंट प्रोग्राम (FSAP) की चिंताओं को सीधे उठाया गया है। इसमें एक दूसरे विंडो और फैक्टरिंग के लिए क्रेडिट गारंटी (Credit Guarantee) को ऑपरेशनल बनाना शामिल है, साथ ही बड़े खरीदारों, खासकर सरकारी कंपनियों को इनवॉइस अपलोड करने के लिए प्रोत्साहित करना या अनिवार्य करना भी शामिल है। TReDS, जो पहले से ही सालाना ₹2 लाख करोड़ से अधिक की फंडिंग की सुविधा दे रहा है, अब इन रिफॉर्म्स के लिए मुख्य प्लेटफॉर्म के तौर पर तैयार है।

CPSEs की अनिवार्यता और क्रेडिट गारंटी

सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि सभी सेंट्रल पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज (CPSEs) को MSME के साथ TReDS के माध्यम से ही ट्रांजेक्शन करना होगा। इस कदम का मकसद पावर एसिमेट्री को खत्म करना, इनवॉइस की समय पर पुष्टि और पेमेंट सुनिश्चित करना है, जिससे MSME पर लिक्विडिटी का बोझ कम होगा। इसके अलावा, क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज (CGTMSE) द्वारा समर्थित इनवॉइस डिस्काउंटिंग के लिए एक नई क्रेडिट गारंटी (Credit Guarantee) मैकेनिज्म सीधे लेंडर के जोखिम को कम करेगी। यह हाल ही में RBI द्वारा MSME के लिए कोलैटरल-फ्री लेंडिंग लिमिट्स में की गई बढ़ोतरी का भी पूरक है और सिर्फ लिक्विडिटी की कमी नहीं, बल्कि क्रेडिट जोखिम की धारणा और मूल्य निर्धारण को भी टारगेट करता है।

मार्केट एफिशिएंसी में होगा इजाफा

गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) का TReDS के साथ इंटीग्रेशन भी एक स्ट्रेटेजिक कदम है। फाइनेंसर्स को वेरिफाइड प्रोक्योरमेंट डेटा तक पहुंच प्रदान करके, ड्यू डिलिजेंस की लागत कम हो जाती है, फ्रॉड का जोखिम घटता है, और ट्रांजेक्शन का समय कम हो जाता है। यह पब्लिक प्रोक्योरमेंट इकोसिस्टम के भीतर एलोकेटिव एफिशिएंसी (allocative efficiency) को बढ़ाता है।

सेकेंडरी मार्केट का विकास

शायद सबसे फॉरवर्ड-लुकिंग प्रस्ताव TReDS रिसीवेबल्स को एसेट-बैक्ड सिक्योरिटीज (asset-backed securities) के रूप में विकसित करना है। यह एक सेकेंडरी मार्केट बनाएगा, जिससे फाइनेंसर्स को कैपिटल को रीसायकल करने और जोखिम को डाइवर्सिफाई करने का मौका मिलेगा। यह इनवॉइस डिस्काउंटिंग को इंडिया के व्यापक डेट कैपिटल मार्केट (debt capital market) में इंटीग्रेट करता है, वित्तीय बाजारों को गहरा करता है और रेजिलिएंस को बढ़ावा देता है। ट्रेड क्रेडिट एक्सपोजर को एक रेगुलेटेड फ्रेमवर्क में लाकर, TReDS पारदर्शिता बढ़ाता है और जोखिम फैलाता है, जिसका अंतिम लक्ष्य MSME के लिए नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPAs) को कम करना है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.