आज बाजार में तेजी के संकेत के पीछे की मुख्य वजहें हैं कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट और पश्चिम एशिया में जियोपॉलिटिकल टेंशन (Geopolitical Tension) के कम होने की उम्मीदें। 25 मार्च 2026 को ब्रेंट क्रूड (Brent crude) $100 प्रति बैरल के नीचे खिसककर करीब $99.71 पर आ गया, जबकि WTI क्रूड $88.90 के आसपास ट्रेड कर रहा है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह बड़ी राहत की बात है, क्योंकि इससे इंफ्लेशन (Inflation) पर लगाम लगाने और ऊर्जा पर निर्भर सेक्टर्स के इकोनॉमिक आउटलुक (Economic Outlook) को सहारा मिलेगा। अमेरिकी डिप्लोमेटिक एफर्ट्स (Diplomatic Efforts), जैसे कि ईरान के साथ 15-पॉइंट का प्लान साझा करना, ने भी थोड़ी उम्मीद जगाई है। इस खबर का असर एशियाई बाजारों पर भी दिखा, जहाँ जापान के Nikkei 225 और दक्षिण कोरिया के Kospi में उछाल देखा गया, साथ ही चीन और हांगकांग के बाजार भी चढ़े।
भारतीय इक्विटी (Indian Equities) के वैल्यूएशन की बात करें तो Nifty 50 का P/E रेश्यो लगभग 20.0 और Sensex का 20.4 है, जो ऐतिहासिक रूप से उचित दायरे में माने जाते हैं। हालांकि, 22 P/E के ऊपर थोड़ी सावधानी ज़रूरी है। यह ध्यान रखना अहम है कि तेल की कीमतों में झटके अक्सर बाजार में गिरावट लाते हैं, पर Nifty ने आम तौर पर महीनों या एक साल में वापसी की है। पर, इस बार का माहौल अलग है। मार्च 2025 में जहां FIIs ने इसी महीने के दूसरे हाफ में भारतीय शेयरों में ₹26,000 करोड़ का भारी इनफ्लो (Inflow) किया था, वहीं मार्च 2026 में ऐसी इनफ्लो का ट्रेंड नहीं दिख रहा। Barclays का अनुमान है कि अगर तेल $100 से ऊपर बना रहा, तो भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट (Current Account Deficit) 0.8% तक बढ़ सकता है और जीडीपी ग्रोथ (GDP Growth) 0.5% घट सकती है। वहीं, वित्त मंत्री के मुताबिक, RBI के टारगेट के करीब इंफ्लेशन, तेल की कीमतों में अल्पकालिक उछाल के असर को सीमित रखेगा।
हालांकि, बाजार के लिए असली चुनौती अभी बाकी है। विदेशी इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) की बिकवाली में लगातार तेजी देखी जा रही है, जो मार्च 2025 के बिल्कुल उलट है। ईरान द्वारा सीधे टॉक (Talk) से इनकार करना स्थिति को और अनिश्चित बना रहा है। साथ ही, अमेरिका द्वारा सैन्य कार्रवाई तेज करने का पोटेंशियल (Potential) किसी भी सकारात्मक सेंटीमेंट (Sentiment) को तुरंत पलट सकता है। फिलहाल, डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) और रिटेल निवेशकों (SIPs) के लगातार निवेश से FII की बिकवाली को संभाला जा रहा है। पर, अगर जियोपॉलिटिकल रिस्क (Geopolitical Risk) और बढ़ते हैं या लगातार ऊंची तेल कीमतें अर्थव्यवस्था पर हावी होने लगती हैं, तो यह घरेलू सपोर्ट बड़े पैमाने पर फॉरेन कैपिटल फ्लाइट (Foreign Capital Flight) को कब तक रोक पाएगा, कहना मुश्किल है।
टेक्निकली (Technically), 23 मार्च 2026 तक Nifty में थोड़ी बियरिश बायस (Bearish Bias) दिख रही थी, जिसमें 23,067 के आसपास एक अहम रेजिस्टेंस (Resistance) लेवल था और नीचे की ओर के टारगेट भी थे, जो बढ़ी हुई वोलेटिलिटी (Volatility) की ओर इशारा कर रहे थे।
संक्षेप में, आज बाजार में शुरुआती तेजी की उम्मीद है, लेकिन इसका भविष्य पश्चिम एशिया में घटनाओं और FII की चाल पर निर्भर करेगा। टेंशन (Tension) में कमी से तेजी का रास्ता खुल सकता है, लेकिन इसके विपरीत स्थिति या लगातार विदेशी बिकवाली आशाओं पर पानी फेर सकती है। निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए और मजबूत फंडामेंटल (Fundamental) वाले शेयरों पर ध्यान देना चाहिए।