भारतीय शेयर बाज़ारों में लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट जारी रही। BSE Sensex 893 अंक यानी 1.17% लुढ़क कर 75,121.66 के स्तर पर आ गया, वहीं NSE Nifty 50 में 1% की गिरावट के साथ यह 23,577.85 पर पहुंच गया। इस बिकवाली के कारण निवेशकों की कुल संपत्ति में लगभग ₹3.6 लाख करोड़ की कमी आई। BSE पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Capitalization) घटकर ₹462.98 लाख करोड़ रह गया। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली भी बाजार पर दबाव बना रही है, जो इस साल ₹2 लाख करोड़ से अधिक हो चुकी है।
इस गिरावट की मुख्य वजहें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में आई नई हलचल और कच्चे तेल के दामों में आई जबरदस्त तेजी थीं। AI कंपनी OpenAI ने 'Deployment Company' के लॉन्च का ऐलान किया है, जिसका मकसद सीधे व्यवसायों के लिए AI सिस्टम बनाना और उन्हें लागू करना है। यह कदम पारंपरिक IT आउटसोर्सिंग मॉडल को सीधे चुनौती देता है, जो इम्प्लीमेंटेशन और इंटीग्रेशन के लिए अपने वर्कफोर्स पर निर्भर करते हैं। इसके चलते TCS, Infosys और Wipro जैसी प्रमुख IT कंपनियों के शेयरों में 3% से 5% तक की गिरावट देखी गई, और Nifty IT इंडेक्स 3.5% से अधिक टूट गया। एनालिस्ट्स का मानना है कि इस कदम से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और भारतीय IT फर्मों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है। उन्हें केवल स्टाफ मुहैया कराने से आगे बढ़कर अपने AI समाधान विकसित करने होंगे।
दूसरी ओर, कच्चे तेल की कीमतें भी ऊपरी स्तरों पर बनी हुई हैं। Brent क्रूड लगभग $105 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण आपूर्ति संबंधी चिंताएं बनी हुई हैं, जिससे Brent क्रूड 0.66% बढ़कर $104.90 पर पहुंच गया। भारत अपनी ज़रूरत का लगभग 85% तेल आयात करता है, ऐसे में ऊंची तेल की कीमतें सीधे तौर पर देश के आयात खर्च को बढ़ाती हैं, व्यापार घाटे (Trade Deficit) को चौड़ा करती हैं और भारतीय रुपये को कमजोर करती हैं। पिछले महीने में रुपया 1.27% गिरकर ₹95.6 प्रति डॉलर के स्तर पर आ गया है। अनुमान है कि तेल की कीमतों में प्रति $10 की बढ़ोतरी भारत के चालू खाते के घाटे (Current Account Deficit) को GDP के 0.4-0.5% तक बढ़ा सकती है और महंगाई (Inflation) को 30-50 बेसिस पॉइंट तक बढ़ा सकती है। इससे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव है, जो आर्थिक विकास को धीमा कर सकता है।
निवेशक भारत के प्रमुख IT सेक्टर की संरचनात्मक कमजोरियों और व्यापक आर्थिक कारकों पर इसकी निर्भरता को करीब से देख रहे हैं। भारतीय IT कंपनियां बड़े पैमाने पर वर्कफोर्स पर निर्भर करती हैं, बजाय इसके कि वे अपनी खुद की AI तकनीक या कोर इंफ्रास्ट्रक्चर की मालिक हों। जबकि बड़ी अमेरिकी टेक कंपनियां फाउंडेशनल AI मॉडल बना रही हैं, भारतीय फर्में मुख्य रूप से सेवाएँ प्रदान करती हैं। कम रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) खर्च इन कंपनियों के लिए वैश्विक प्रतिस्पर्धियों की तुलना में उच्च मूल्यांकन (Valuations) हासिल करना मुश्किल बना देता है। इसके अलावा, OpenAI की सीधे क्लाइंट्स के साथ इंजीनियरों को जोड़ने की रणनीति पारंपरिक IT सेवा भागीदारों को दरकिनार कर सकती है और भारतीय आउटसोर्सिंग फर्मों के राजस्व को कम कर सकती है। आर्थिक मोर्चे पर, भारत की ऊर्जा आयात पर भारी निर्भरता उसे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील बनाती है। यह माना जा रहा है कि लंबे समय तक उच्च तेल की कीमतें GDP ग्रोथ को 0.7% तक धीमा कर सकती हैं और EBITDA (ब्याज, कर, मूल्यह्रास और परिशोधन से पहले की कमाई) को 15-25% तक कम कर सकती हैं। 2026 में FIIs की रिकॉर्ड बिकवाली जोखिम भरी संपत्तियों से वैश्विक बदलाव का संकेत देती है।
भविष्य के लिए आउटलुक (Outlook) सतर्क बना हुआ है। यह मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों के भविष्य के पथ और भू-राजनीतिक तनाव के कम होने पर निर्भर करेगा। कमजोर रुपया और FIIs की लगातार बिकवाली जारी रहने की संभावना है, जो व्यापक बाजार पर दबाव बनाए रखेगी। आने वाले दिनों में बाज़ार की चाल काफी हद तक कच्चे तेल की कीमतों, निवेशकों के जोखिम लेने की क्षमता और बाज़ारों में फंड के फ्लो पर निर्भर करेगी।
