दरअसल, आज बाज़ार में आई इस तूफानी गिरावट की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में लगी आग है। वैश्विक बाज़ार में ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude Oil) $100 प्रति बैरल का आंकड़ा पार कर गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ने और ईरान द्वारा जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों पर कथित हमले की वजह से कीमतें भड़की हैं।
भारत जैसे देश के लिए, जो तेल का बड़ा आयातक है, यह स्थिति सीधे तौर पर महंगाई (Inflation) को न्योता दे सकती है और चालू खाते के घाटे (Current Account Deficit) को भी बढ़ा सकती है।
इस गिरावट में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली ने भी अहम् भूमिका निभाई। कल, यानी 22 अप्रैल 2026 को, FIIs ने बाज़ार से ₹1,480.59 करोड़ का पैसा निकाला। इसके अलावा, भारतीय रुपया (Rupee) भी लगातार चौथे दिन कमजोर हुआ, जिससे आयात लागत बढ़ गई।
बाज़ार में बढ़ी घबराहट का अंदाज़ा इंडिया VIX (India VIX) के आंकड़े से लगाया जा सकता है, जो 3% उछलकर 18.84 के स्तर पर पहुँच गया है। यह बताता है कि निवेशक कितने चिंतित हैं।
इस तेल की मार से ऑटोमोबाइल, एविएशन और केमिकल जैसे सेक्टर्स पर सीधा असर पड़ने की आशंका है। वहीं, IT स्टॉक्स भी AI और पिछली कमजोर रिपोर्टों के कारण पहले से ही दबाव में हैं। बैंकिंग और फाइनेंसियल सेक्टर भी मुनाफावसूली का शिकार हो सकते हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि मध्य-पूर्व की अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों को देखते हुए बाज़ार में फिलहाल अस्थिरता (Volatility) बनी रह सकती है। निवेशकों को सावधानी बरतने और मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी गई है।
