टैरिफ कटौती का बड़ा असर, बाज़ार में लौटी रौनक
अमेरिकी सरकार की ओर से भारतीय सामानों पर टैरिफ (Tariff) घटाने की खबर ने भारतीय शेयर बाज़ारों में नई जान फूंक दी। इस ऐलान ने महीनों से चल रही ट्रेड वॉर (Trade War) की चिंताओं को खत्म कर दिया, और मार्केट पर छाए अनिश्चितता के बादल छंट गए। Nifty 50 ने दिन के कारोबार के दौरान 26,341 का स्तर छुआ और आखिर में 639 पॉइंट की भारी बढ़त के साथ 25,727 पर क्लोज हुआ। यह पिछले साल मई 2025 के बाद किसी एक दिन में सबसे बड़ी प्रतिशत वाली तेज़ी थी। इस तेज़ी से BSE लिस्टेड कंपनियों की मार्केट कैप (Market Cap) में तकरीबन ₹20 लाख करोड़ का इजाफा हुआ। वहीं, बैंक Nifty ने भी 61,764 का नया ऑल-टाइम हाई (All-time High) बनाते हुए कमाल किया। इस ब्रॉड-बेस्ड रैली (Broad-based Rally) में रियलटी (Realty), केमिकल्स (Chemicals) और फाइनेंशियल सर्विसेज (Financial Services) सेक्टर सबसे आगे रहे, और मिडकैप 100 (Midcap 100) व स्मॉलकैप 100 (Smallcap 100) इंडेक्स भी करीब 2.8% की शानदार बढ़त दर्ज की।
वैल्यूएशन पर पैनी नज़र, आगे क्या?
हालांकि, बाज़ार में आई इस ज़बरदस्त तेज़ी के बाद अब एनालिस्ट्स (Analysts) की नज़र मार्केट के वैल्यूएशन (Valuation) पर जा टिकी है। Nifty 50 इंडेक्स फिलहाल अपने प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो के हिसाब से करीब 25 गुना पर ट्रेड कर रहा है, जो MSCI इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स (MSCI Emerging Markets Index) के करीब 17 गुना P/E से काफी ज़्यादा है। यह प्रीमियम वैल्यूएशन बताता है कि बाज़ार का सेंटिमेंट तो सुधरा है, लेकिन आगे की तेज़ी अब कंपनी की कमाई (Earnings Growth) पर टिकी रहेगी, जो मौजूदा वैल्यूएशन को सही ठहरा सके। ऐतिहासिक तौर पर, 2024 के अंत में अमेरिका-भारत के बीच हुई ऐसी ही सकारात्मक ट्रेड खबरों के बाद बाज़ार में एक हफ़्ते के अंदर 3-5% तक की तेज़ी आई थी, जिसके बाद कंसॉलिडेशन (Consolidation) देखने को मिला था। वहीं, 2023 के मध्य में ट्रेड डिस्प्यूट (Trade Dispute) के कारण Nifty में एक महीने के दौरान 7% की भारी गिरावट आई थी।
मैक्रो इकोनॉमिक फैक्टर्स और FIIs का रुख
मौजूदा मैक्रो इकोनॉमिक (Macroeconomic) माहौल की बात करें तो, प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में महंगाई (Inflation) घटकर 2-3% पर आ गई है और ब्याज दरों (Interest Rates) में 2026 की दूसरी छमाही तक स्थिरता या मामूली कटौती की उम्मीद है। 2025 में 10 अरब डॉलर की बिकवाली के बाद, फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) ने जनवरी 2026 में 1 अरब डॉलर का नेट इनफ्लो (Net Inflow) दिखाया है। यह रुपए की स्थिरता और इक्विटी में बढ़ते निवेश का एक पॉजिटिव संकेत है। 2026 तक भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 83-84 के स्तर पर बना रहने का अनुमान है।
एनालिस्ट्स का आउटलुक और टेक्निकल लेवल्स
एनालिस्ट्स (Analysts) भारतीय इक्विटीज़ (Equities) के लिए पॉजिटिव आउटलुक (Outlook) बनाए हुए हैं। सिद्धार्थ खेमका (Siddhartha Khemka) ऑफ मोतीलाल ओसवाल (Motilal Oswal) का मानना है कि FIIs की बिकवाली का रुकना, रुपए का मज़बूत होना और बाज़ार सेंटिमेंट में सुधार आगे भी तेज़ी को सपोर्ट करेगा। टेक्निकल चार्ट्स (Technical Charts) पर Nifty ने 200-DMA 25,250 और 100-DMA 25,630 के महत्वपूर्ण लेवल्स को पार कर लिया है, जो एक बुलिश रिवर्सल (Bullish Reversal) का मज़बूत संकेत दे रहा है। कुछ ब्रोकरेज हाउसेस (Brokerages) जैसे CLSA और Morgan Stanley ने भारत पर 'ओवरवेट' (Overweight) रेटिंग बरकरार रखी है। हालांकि, कुछ एनालिस्ट्स कमाई में उम्मीद के मुताबिक तेज़ी न आने पर वैल्यूएशन को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। Nifty के लिए ईयर-एंड (Year-end) तक 27,000-27,500 तक के टारगेट देखे जा रहे हैं, बशर्ते ग्लोबल ट्रेड में शांति बनी रहे और घरेलू अर्थव्यवस्था मज़बूत प्रदर्शन करे।