शांति की उम्मीदों और घटते तेल से बाजार में आई जान
25 मार्च 2026 का दिन भारतीय शेयर बाजारों के लिए शानदार रहा। Sensex और Nifty दोनों में जबरदस्त उछाल देखा गया। यह तेजी मुख्य रूप से मध्य पूर्व (Middle East) में तनाव कम होने और इसके चलते कच्चे तेल (Crude oil) की कीमतों में आई गिरावट के कारण आई। इस राहत ने निवेशकों के बीच आशावाद बढ़ाया, लेकिन आर्थिक तस्वीर अभी भी जटिल है।
Sensex लगभग 1,205 अंक बढ़कर 75,273.45 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 50 ने 394.05 अंक की बढ़त के साथ 23,306.45 का स्तर छुआ। ऑटो, बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज, मेटल्स और कंज्यूमर जैसे कई सेक्टर्स में जोरदार खरीदारी देखने को मिली। कच्चे तेल का दाम $100 प्रति बैरल से नीचे आना भारत के लिए बड़ी राहत है, क्योंकि इससे महंगाई पर लगाम लगती है और आयात बिल कम होता है।
आर्थिक अनुमानों में टकराव और FIIs की बिकवाली
इस तेजी के बावजूद, प्रमुख वित्तीय संस्थाएं भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर अलग-अलग राय रख रही हैं। Goldman Sachs ने 2026 के लिए भारत के GDP ग्रोथ अनुमान को 7% से घटाकर 5.9% कर दिया है। बैंक ने महंगाई का अनुमान भी बढ़ाकर 4.6% किया है और RBI द्वारा 50 बेसिस पॉइंट की दर वृद्धि की आशंका जताई है।
इसके विपरीत, S&P Global Ratings ने FY26 के लिए भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7.6% किया है, वहीं FY27 के लिए 7.1% रहने का अनुमान जताया है। Fitch Ratings ने भी FY26 के लिए 7.5% ग्रोथ का अनुमान दिया है।
चिंता की बात यह है कि मार्च 2026 में Foreign Institutional Investors (FIIs) ने अब तक $11.37 बिलियन की रिकॉर्ड बिकवाली की है। Domestic Institutional Investors (DIIs) ने कुछ हद तक इस बिकवाली को संभाला है। इसके अलावा, भारतीय रुपया 2026 में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग 4% कमजोर हुआ है, जिससे आयात महंगा हो रहा है।
बाजार की तेजी के पीछे छिपे जोखिम
बाजार में आई इस राहत भरी तेजी के बावजूद, मौजूदा आर्थिक हालात कुछ नाजुक दिख रहे हैं। Goldman Sachs का GDP ग्रोथ को 6% से नीचे का अनुमान यह दर्शाता है कि वर्तमान अनुमान अति-आशावादी हो सकते हैं और बाहरी झटकों के प्रति संवेदनशील हैं। FIIs की लगातार बिकवाली यह संकेत देती है कि उन्हें निकट भविष्य में भारतीय अर्थव्यवस्था की संभावनाओं पर ज्यादा भरोसा नहीं है।
बढ़ती महंगाई, कमजोर होता रुपया और बढ़ता चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) आर्थिक कमजोरी की ओर इशारा करते हैं। हाल के हफ्तों में बाजार का भू-राजनीतिक घटनाओं पर तेज रिएक्शन, जैसे कि 9 मार्च और 23 मार्च को हुई गिरावट, जोखिमों के प्रति उसकी संवेदनशीलता को उजागर करता है।
फिलहाल, बाजार की दिशा अगले कुछ दिनों तक मध्य पूर्व के घटनाक्रमों और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी। विश्लेषकों का कहना है कि भले ही सेंटीमेंट सुधरा है, लेकिन बड़ी आर्थिक चुनौतियों और FIIs की बिकवाली के कारण इस तेजी के टिके रहने पर सवाल बने हुए हैं।