मार्च की गिरावट को धो डाला: ₹1,186 अंक उछला सेंसेक्स!
आज के कारोबार में शेयर बाज़ार ने निवेशकों को मालामाल कर दिया। भू-राजनीतिक तनाव में आई कमी और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की तरफ से मिले सपोर्ट ने बाज़ार को नई ऊंचाई दी। BSE सेंसेक्स (Sensex) 1,186.77 अंकों की बढ़त के साथ 73,134.32 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 (Nifty 50) 348 अंक चढ़कर 22,679.40 के स्तर पर पहुंच गया। यह उछाल मार्च 2026 में दोनों इंडेक्स द्वारा दर्ज की गई सबसे बड़ी मासिक गिरावट को पलटने वाला रहा।
बाज़ार को क्यों मिली संजीवनी?
बाज़ार में तेज़ी के पीछे सबसे बड़ा कारण मिडिल ईस्ट में युद्ध जैसे हालात के कम होने की खबरें रहीं। इससे वैश्विक स्तर पर निवेशकों का सेंटीमेंट सुधरा। इसी के साथ, RBI ने मार्केट में लिक्विडिटी (liquidity) बनाए रखने का भरोसा दिलाया है और अपनी मॉनेटरी पॉलिसी को न्यूट्रल (neutral) रखा है, जिसमें रेपो रेट (repo rate) 5.25% पर स्थिर है। मार्च के महीने में भारी बिकवाली का माहौल था, जिसमें विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने ₹1 लाख करोड़ से ज़्यादा का पैसा निकाला, भारतीय रुपया (Rupee) कमजोर हुआ और क्रूड ऑयल (Crude Oil) की कीमतें आसमान छू रही थीं। आज की तेज़ी ने इन चिंताओं को कुछ हद तक कम किया है।
बैंकिंग और आईटी ने दिखाई दमदारी
मार्च 2025 की तरह ही, मार्च 2026 में भी बाज़ार में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया था। पिछले साल की तरह इस साल भी फाइनेंशियल ईयर (Financial Year) के अंत में इंडेक्स गिरावट पर बंद हुए थे। हालांकि, इस बार की तेज़ी में बैंकिंग और आईटी (IT) सेक्टर के शेयरों ने सबसे ज़्यादा दम दिखाया, जो निवेशकों के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। नए फाइनेंशियल ईयर की शुरुआत में अक्सर नई पूंजी का निवेश होता है, जो बाज़ार को और गति दे सकता है।
आगे क्या? सतर्कता ज़रूरी
भले ही अप्रैल की शुरुआत अच्छी हुई हो, लेकिन बाज़ार में जोखिम अभी भी बने हुए हैं। मिडिल ईस्ट की स्थिति अभी भी नाजुक है और किसी भी पल बदल सकती है, जिससे निवेशकों की चिंताएं फिर बढ़ सकती हैं। मार्च में FIIs द्वारा की गई रिकॉर्ड बिकवाली यह बताती है कि ग्लोबल अनिश्चितताओं के बीच निवेशक उभरते बाज़ारों को लेकर सतर्क हैं। भारतीय रुपये का लगातार गिरना और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भी कॉर्पोरेट मार्जिन पर दबाव डाल सकती हैं। RBI भले ही सपोर्टिव हो, लेकिन विदेशी बाज़ारों में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आहट भी एक बड़ा फैक्टर है।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा तेज़ी के बावजूद निवेशकों को सतर्क रहने की ज़रूरत है। बाज़ार की आगे की दिशा जियोपॉलिटिकल डेवलपमेंट, क्रूड ऑयल की कीमतों और विदेशी पूंजी प्रवाह (foreign capital flows) पर निर्भर करेगी। RBI की लिक्विडिटी मैनेजमेंट (liquidity management) की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी।