ग्लोबल राहत से भारतीय बाजारों में तेजी की उम्मीद
ग्लोबल वित्तीय बाजारों में आज राहत के संकेत मिल रहे हैं। मिडिल ईस्ट में जियोपॉलिटिकल टेंशन में कमी आने की उम्मीद से निवेशक खुश हैं, जिसका असर भारतीय शेयरों पर भी पड़ने वाला है। GIFT Nifty फ्यूचर्स 470 अंक यानी 2.10% बढ़कर 22,880 पर ट्रेड कर रहे हैं, जो बाजार में एक मजबूत ओपनिंग का इशारा है।
यह तेजी ग्लोबल मार्केट के लिए भी अच्छी खबर है। 31 मार्च 2026 को डाउ जोन्स, नैस्डैक और एसएंडपी 500 जैसे प्रमुख अमेरिकी इंडेक्स 3% तक चढ़ गए। वहीं, एशियन बाजारों में जापान का निक्केई 3.51% और साउथ कोरिया का कोस्पी करीब 5% उछला।
पिछली बिकवाली के बाद रिकवरी की कोशिश
यह उछाल सोमवार के भारी बिकवाली के बिल्कुल उलट है, जब NSE Nifty 50 488 अंक यानी 2.14% गिरकर 22,331 पर बंद हुआ था, और BSE Sensex 1,635.67 अंक यानी 2.22% लुढ़ककर 71,947 पर आ गया था।
FIIs का रिकॉर्ड आउटफ्लो और DIIs की खरीदारी
पिछली बिकवाली की एक बड़ी वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की भारी बिकवाली रही। मार्च 2026 में FIIs ने रिकॉर्ड ₹1.14 लाख करोड़ (लगभग $12.3 बिलियन) का शुद्ध बिकवाली की। यह पैसा मिडिल ईस्ट टेंशन, कमजोर रुपया और बढ़ते क्रूड ऑयल के चलते बाजार से बाहर निकला। हालांकि, डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) ने इसी महीने करीब ₹1.28 लाख करोड़ की खरीदारी की।
महंगे क्रूड ऑयल का दोहरा झटका
क्रूड ऑयल की कीमतें $100 प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं, जो भारत जैसे तेल आयात करने वाले देश के लिए एक बड़ी आर्थिक चुनौती है। भारत अपनी लगभग 85-90% तेल की जरूरतें आयात से पूरी करता है। विश्लेषकों का मानना है कि क्रूड ऑयल की हर $10 की बढ़ोतरी भारत के करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) को जीडीपी का 0.3-0.4% बढ़ा सकती है। इसके अलावा, एनर्जी की बढ़ती कीमतों से महंगाई (GDP ग्रोथ का 0.5% तक) बढ़ सकती है और एविएशन, सीमेंट व फर्टिलाइजर जैसे सेक्टर्स के प्रॉफिट पर असर पड़ सकता है। करीब ₹92 के स्तर पर रुपया भी आयात लागत को बढ़ा रहा है।
निवेशकों की सावधानी और आउटलुक
मिडिल ईस्ट के जियोपॉलिटिकल टेंशन में कमी आने से भले ही ग्लोबल मार्केट में तेजी दिख रही हो, लेकिन मार्च में FIIs का रिकॉर्ड आउटफ्लो निवेशकों की गहरी चिंता को दर्शाता है। ऐसा लगता है कि विदेशी पूंजी तब तक दूर रह सकती है जब तक कि बड़े रिस्क कम न हो जाएं।
भारतीय शेयरों का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि जियोपॉलिटिकल टेंशन कितनी देर तक शांत रहती है और महंगे क्रूड ऑयल का महंगाई व कंपनियों के मुनाफे पर कितना असर पड़ता है। ग्लोबल मार्केट से सकारात्मक मोमेंटम जरूर है, लेकिन भारी FII बिकवाली और आर्थिक कमजोरियां तत्काल रिकवरी को अस्थिर बना सकती हैं।