विदेशी निवेश की वापसी और Capex का दम, फिर भी बाज़ार में दिख रही है 'दोहरी तस्वीर'
ताज़ा बाज़ार की तेज़ी, विदेशी पूंजी की वापसी और घरेलू निवेश संकेतकों से भले ही हौसला मिला हो, लेकिन यह कई खास सेक्टर्स की कमजोरियों और कुछ बाज़ार हिस्सों के लिए मिले-जुले संकेतकों को छुपाती है। जहाँ एक ओर प्रमुख इंडेक्स में आशावाद दिख रहा है, वहीं गहराई से देखने पर एक द्विभाजित बाज़ार (bifurcated market) नज़र आता है, जहाँ मज़बूती के कुछ क्षेत्रों के साथ-साथ नई चुनौतियाँ, खासकर टेक्नोलॉजी सेक्टर में, उभर रही हैं।
FIIs का 'कमबैक' और DIIs का दबदबा
इस फरवरी में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय बाज़ार में लगभग ₹4,900.17 करोड़ का नेट निवेश किया है। यह 2025 के दौरान हुए बड़े बिकवाली के बाद आया है, जब FIIs ने कुल ₹1.66 लाख करोड़ निकाले थे। इस वापसी का मुख्य कारण भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का अंतिम रूप लेना बताया जा रहा है, जिसने टैरिफ कम किए और भू-राजनीतिक अनिश्चितता को दूर किया। यह तब हो रहा है जब घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) बाज़ार में हावी हो रहे हैं, जिन्होंने हाल ही में Nifty50 कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी के मामले में FIIs को पीछे छोड़ दिया है। DIIs ने 2025 में लगातार निवेश करते हुए ₹3 लाख करोड़ से अधिक लगाए हैं।
Capex साइकल में तेज़ी, आर्थिक विकास को मिलेगा बूस्ट
आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले निजी कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) में मज़बूती के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं। फाइनेंशियल ईयर 26 (FY26) की पहली छमाही के आंकड़ों के अनुसार, पिछले फाइनेंशियल ईयर की दूसरी छमाही की तुलना में निजी क्षेत्र की नई Capex योजनाओं में 41% की प्रभावशाली वृद्धि देखी गई है, जो कुल ₹24 ट्रिलियन तक पहुँच गई। इस उछाल में मुख्य रूप से मैन्युफैक्चरिंग और बिजली परियोजनाओं का योगदान है। विदेशी निवेशकों की Capex योजनाओं में भी 130% की भारी वृद्धि हुई है, जो ₹3.56 ट्रिलियन से अधिक है। यह मज़बूती बैंक क्रेडिट में बढ़ोतरी से भी समर्थित है।
AI का 'शॉक', IT सेक्टर पर मंडराता बड़ा ख़तरा
जहां एक ओर बाज़ार में तेज़ी है, वहीं सूचना प्रौद्योगिकी (IT) सेक्टर को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेज़ विकास से भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। Anthropic के Claude Cowork जैसे AI टूल्स, जिनमें ऑटोमेशन की ज़बरदस्त क्षमता है, आईटी सेवाओं, एप्लिकेशन डेवलपमेंट और टेस्टिंग जैसे कामों को स्वचालित कर सकते हैं। इस डर ने शेयर बाज़ार में हड़कंप मचा दिया है, जिसके चलते प्रमुख भारतीय IT शेयरों में भारी गिरावट आई है और फरवरी की शुरुआत में लगभग ₹2 लाख करोड़ का मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Capitalization) वाष्पित हो गया। विश्लेषकों का मानना है कि ये AI एजेंट्स बड़े पैमाने पर कंपनियों के लिए लागत कम कर सकते हैं, जिससे राजस्व (Revenue) और मार्जिन पर असर पड़ सकता है। हालांकि कुछ उद्योगपतियों का कहना है कि बाज़ार की यह प्रतिक्रिया ज़रूरत से ज़्यादा है, लेकिन AI के कारण होने वाली मंदी की चिंता निवेशकों के मन में घर कर गई है। Motilal Oswal का अनुमान है कि अगले चार वर्षों में IT इंडस्ट्री के 9-12% रेवेन्यू का जोखिम AI-आधारित व्यवधानों के कारण हो सकता है।
स्मॉल-कैप्स पर वैल्यूएशन का दबाव, सावधानी बरतने की सलाह
जहां बड़े बाज़ार में स्थिरता दिख रही है, वहीं स्मॉल-कैप सेगमेंट एक मुश्किल दौर से गुज़र रहा है। Nifty Small Cap 100 इंडेक्स ने 2025 में अपने सात साल के सबसे खराब प्रदर्शन में से एक देखा, जिसमें लगभग 7% की गिरावट आई। कई शेयरों में आई भारी गिरावट के बावजूद, विश्लेषक चेतावनी दे रहे हैं कि मिड-कैप और स्मॉल-कैप सेगमेंट में वैल्यूएशन अभी भी बढ़े हुए हैं, जो अपने दीर्घकालिक औसत से काफी ऊपर फॉरवर्ड P/E मल्टीपल पर ट्रेड कर रहे हैं। हालांकि यह गिरावट लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए आकर्षक एंट्री पॉइंट पेश कर सकती है, लेकिन लगातार कमाई में कमी और ऊंचे वैल्यूएशन के कारण और गिरावट का जोखिम एक महत्वपूर्ण चिंता बनी हुई है।
फाइनेंशियल सेक्टर में तेज़ी जारी, स्थिरता की उम्मीद
IT सेक्टर की मुश्किलों के विपरीत, फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर में तेज़ी जारी रहने की उम्मीद है। मूडीज़ रेटिंग्स (Moody's Ratings) ने भारत के बैंकिंग सेक्टर के लिए स्थिर आउटलुक बनाए रखा है, जो मजबूत आर्थिक विकास के समर्थन से कम नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPAs) और स्थिर लाभप्रदता (Profitability) का अनुमान लगाता है। लोन ग्रोथ जमा वृद्धि के अनुरूप रहने की उम्मीद है, और बैंक अच्छी तरह से पूंजीकृत (well-capitalized) हैं। नेट इंटरेस्ट मार्जिन (Net Interest Margins) में धीरे-धीरे बढ़ोतरी होने और एसेट क्वालिटी में सुधार होने की उम्मीद है, जो FY27 में दोहरे अंकों की कमाई वृद्धि को बढ़ावा देगा।
ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य और मैक्रो रुझान
2025 में भारतीय इक्विटी बाज़ार का प्रदर्शन, जिसमें 8-10% की मामूली वृद्धि देखी गई, वैश्विक बेंचमार्क से काफी पिछड़ गया, जिन्होंने 20% से अधिक की उछाल दर्ज की। इस अंडरपरफॉर्मेंस का एक कारण ऊंचे वैल्यूएशन और वर्ष के दौरान विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) का बड़े पैमाने पर बाहर निकलना था। FIIs की वर्तमान वापसी भारत-अमेरिका व्यापार सौदे और स्थिर हो रही वैश्विक दरों से जुड़ी है, जो 2025 में देखे गए बहिर्वाह (outflows) के रुझान में संभावित उलटफेर का संकेत देती है। हालिया गिरावट से उबरता हुआ मजबूत होता रुपया भी विदेशी पूंजी को आकर्षित करने में भूमिका निभा रहा है। हालांकि 2026 के लिए मैक्रो स्थितियां अधिक सहायक दिख रही हैं, जिसमें लगभग 6.9% जीडीपी वृद्धि का अनुमान है, वर्तमान रैली की स्थिरता IT में AI व्यवधान और निजी Capex में निरंतर वृद्धि जैसे क्षेत्र-विशिष्ट मुद्दों के समाधान पर निर्भर करेगी।