बाजार में आई तेजी, पर चिंता की लहरें
भारतीय शेयर बाजार (Indian Equities) 25 मार्च 2026 को लगातार दूसरे दिन चढ़ा। भू-राजनीतिक तनावों में नरमी और कच्चे तेल के दाम $100 प्रति बैरल से नीचे आने से बाजार को बड़ी राहत मिली। इस तेजी ने निवेशकों की संपत्ति में ₹8.23 लाख करोड़ का इजाफा किया, लेकिन रुपया 93.98 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर लुढ़क गया और विदेशी निवेशकों (FPIs) ने भारी बिकवाली जारी रखी, जो बाजार की चिंताओं को रेखांकित करता है।
शेयर बाजार में जोरदार उछाल
Sensex 1.63% चढ़कर 75,273.45 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 1.72% की मजबूती के साथ 23,306.45 पर रहा। इस उछाल ने BSE पर कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन को ₹431.02 लाख करोड़ तक पहुंचा दिया। कच्चे तेल की कीमतों का $100 से नीचे आना भारत के लिए आयात लागत और महंगाई की चिंता को कम करने वाला साबित हुआ।
रुपया रिकॉर्ड लो पर, विदेशी बिकवाली जारी
जहां शेयर बाजार में तेजी थी, वहीं भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93.98 के नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया, दिन के अंत में 93.97 पर बंद हुआ। इस फाइनेंशियल ईयर (Financial Year) में यह 9.96% गिर चुका है, जो 12 सालों में सबसे बड़ी गिरावट है और इसे एशिया का सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला करेंसी बना दिया है। इसकी वजह तेल आयातकों की डॉलर की मजबूत मांग और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) द्वारा ₹1,805.37 करोड़ की जोरदार बिकवाली है। RBI ने रुपये को 94 के पार जाने से रोकने के लिए हस्तक्षेप किया, लेकिन गिरावट का दौर जारी रहा।
बाजार में ऊँची अस्थिरता (Volatility)
बाजार की अपेक्षित उठा-पटक को मापने वाला India VIX 24.64 पर ऊंचा बना रहा। यह स्तर, जो 2026 की शुरुआत से 157% से अधिक बढ़ चुका है, वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाओं और कमोडिटी कीमतों से उत्पन्न अनिश्चितता को दर्शाता है। VIX का 26 से ऊपर जाना यह बताता है कि ट्रेडर्स कीमतों में बड़े उतार-चढ़ाव की उम्मीद कर रहे हैं। यह बढ़ी हुई अस्थिरता संकेत देती है कि दैनिक तेजी के बावजूद, निवेशकों में सावधानी बनी हुई है।
आर्थिक चुनौतियाँ बरकरार
बाजार की तेजी शायद गंभीर आर्थिक मुद्दों को ढक रही है। रुपये का गिरना और 23 मार्च 2026 तक ₹1 लाख करोड़ से अधिक की FPI बिकवाली विदेशी निवेशकों का भरोसा न होने का संकेत देती है। भू-राजनीतिक तनावों में कमी अस्थायी राहत दे सकती है, लेकिन किसी भी निरंतर संघर्ष या तेल की कीमतें $100 से ऊपर जाने से भारत के चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) में 30-40 bps और महंगाई में 80-100 bps की बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे GDP ग्रोथ धीमी पड़ सकती है।
RBI पर दोहरी मार
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) डॉलर बेचकर रुपये को सहारा देने और अपनी मॉनेटरी पॉलिसी के लक्ष्यों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, RBI ने मार्च में करेंसी को बचाने के लिए $15 अरब से अधिक की बिक्री की, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) कम हुआ है। यह हस्तक्षेप रुपये पर बने दबाव को दिखाता है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि तेल की कीमतें ऊँची बनी रहती हैं और RBI का हस्तक्षेप कम होता है, तो रुपया 94 या 94.25 तक पहुंच सकता है।
साथी देशों की तुलना में वैल्यूएशन प्रीमियम
24 मार्च 2026 तक Nifty के 20.05 के P/E रेशियो पर आधारित, भारतीय शेयर बाजार का वैल्यूएशन अभी भी चीन, कोरिया और हांगकांग जैसे बाजारों से ऊपर है। यह भारतीय इक्विटी को एक ग्रोथ स्टोरी (Growth Story) के रूप में पेश करता है, न कि वैल्यू प्ले (Value Play) के तौर पर। विदेशी निवेशकों के लिए, यह उच्च वैल्यूएशन, कमजोर रुपया और घरेलू जोखिमों के साथ मिलकर, अनिश्चित वैश्विक दौर में भारत को सस्ते क्षेत्रीय विकल्पों की तुलना में कम आकर्षक बनाता है।
आगे क्या? अस्थिरता की उम्मीद
विश्लेषक बाजार में लगातार अस्थिरता बने रहने की उम्मीद कर रहे हैं। हालांकि घरेलू मांग और सरकारी खर्च कुछ सहारा दे रहे हैं, लेकिन FPI की बिकवाली जारी रहने और उच्च तेल कीमतों का असर सेंटिमेंट को प्रभावित कर सकता है। रुपये की चाल तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक घटनाओं से जुड़ी रहेगी, और वर्तमान दबाव जारी रहने पर इसके और गिरने की संभावना है। मार्च 2026 के आसपास भारत-अमेरिका व्यापार सौदे (India-US trade deal) का अपेक्षित परिणाम करेंसी स्थिरता और निवेश प्रवाह के लिए एक महत्वपूर्ण कारक है।