भू-राजनीतिक शांति से बाजार में लौटी रौनक
अमेरिका और ईरान के बीच भू-राजनीतिक तनाव में कमी आने के कारण भारतीय शेयर बाजार को बड़ी राहत मिली है। कच्चे तेल की कीमतों में 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे की गिरावट आई, जबकि इंडिया VIX (वोलैटिलिटी इंडिकेटर) में 8% की इंट्राडे गिरावट ने निवेशकों के आत्मविश्वास को फिर से जगाया। नतीजतन, Nifty 50 इंडेक्स 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार करने में कामयाब रहा।
सेक्टरों में मिला-जुला प्रदर्शन, वैल्यूएशन पर सवाल
हालांकि, व्यापक इंडेक्स में तेजी के बावजूद, विभिन्न सेक्टरों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। IndiGo जैसी एविएशन कंपनियों के शेयरों में उछाल देखा गया, लेकिन यह सेक्टर गंभीर लागत दबाव का सामना कर रहा है। एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की बढ़ती कीमतें और गिरता हुआ रुपया खर्चों को बढ़ा रहा है, जिससे ICRA ने सेक्टर का आउटलुक 'Negative' कर दिया है। IndiGo का P/E रेश्यो 55.82 पर है, जो इसके 10 साल के औसत 25 के आसपास से काफी ऊपर है। Max Healthcare Institute के शेयरों ने भी तेजी दर्ज की, लेकिन यह लगभग 65 के P/E पर कारोबार कर रहा है, जो दर्शाता है कि हेल्थकेयर सेक्टर के वैल्यूएशन भी काफी ऊंचे स्तर पर हैं।
IT सेक्टर: Wipro पर फोकस
Nifty IT इंडेक्स करीब 3% चढ़ गया। Wipro, जो अपने प्रतिस्पर्धियों की तुलना में लगभग 16 के P/E पर कारोबार कर रहा है, Q4 नतीजों से पहले जांच के दायरे में है। निवेशक कमजोर ऑर्गेनिक ग्रोथ और वेतन वृद्धि व हालिया अधिग्रहणों से मार्जिन पर दबाव की उम्मीद कर रहे हैं। हालांकि, कंपनी की ओर से शेयर बायबैक की संभावना एक मुख्य आकर्षण हो सकती है।
टेलीकॉम सेक्टर में दबाव
दूसरी ओर, टेलीकॉम शेयरों में बिकवाली का दबाव देखा गया। टैरिफ बढ़ोतरी से एवरेज रेवेन्यू पर यूजर (ARPU) में सुधार हो रहा है और सेक्टर में स्थिरता आ रही है, लेकिन इंडस्ट्री का समग्र P/E अभी भी लगभग 37% पर बना हुआ है। Vodafone Idea जैसी कंपनियां अभी भी काफी वित्तीय दबाव से जूझ रही हैं।
आर्थिक कारक और आगे की राह
बाजार की यह तेजी मध्य पूर्व में तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता से सीधे तौर पर जुड़ी हुई है। भारत अपनी 85% तेल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, इसलिए कीमतों में लगातार गिरावट फायदेमंद है। हालांकि, किसी भी व्यवधान से महंगाई की चिंताएं फिर से बढ़ सकती हैं और आर्थिक विकास प्रभावित हो सकता है। कमजोर होता रुपया भी आयात-केंद्रित सेक्टरों के लिए लागत बढ़ाता है और महंगाई में योगदान कर सकता है।
विश्लेषकों का नज़रिया
विश्लेषकों का नज़रिया सतर्कतापूर्ण आशावाद का है, जो चुनिंदा शेयरों पर दांव लगाने और जोखिम प्रबंधन पर जोर देते हैं। मौजूदा बाजार की तेजी की निरंतरता भू-राजनीतिक तनाव में कमी और स्थिर कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी। Nifty 50 में 24,350–24,600 तक की संभावित चाल देखी जा सकती है, जबकि तत्काल सपोर्ट 23,900–23,600 रेंज में है। निवेशक Wipro की Q4 अर्निंग रिपोर्ट और किसी भी बायबैक घोषणा पर करीब से नजर रखेंगे।