Motilal Oswal की ताज़ा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भारतीय शेयर बाज़ार इस समय ग्लोबल बेंचमार्क से पीछे चल रहा है। इसकी मुख्य वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हार्डवेयर में मची ग्लोबल 'बूम' में भारत की कम हिस्सेदारी बताई जा रही है।
AI का कंसंट्रेशन प्रभाव
रिपोर्ट बताती है कि 2026 की शुरुआत से ही भारत का Nifty करीब 8.5% गिरा है, जबकि साउथ कोरिया का KOSPI 77.49% और ताइवान का बाजार काफी तेजी से बढ़ा है। यह 'एक्सपोजर गैप' दिखाता है कि भारत इस खास AI ट्रेड से दूर है, न कि डोमेस्टिक इकोनॉमी कमजोर है। IT सेवाओं को छोड़ने पर भारत का प्रदर्शन बेहतर दिखता है।
डिफेंस सेक्टर की रफ्तार
एक तरफ जहाँ AI की रेस में भारत पीछे है, वहीं जियोपॉलिटिकल टेंशन के कारण ग्लोबल डिफेंस सेक्टर में बड़ी तेज़ी आई है। 2021 से 2026 के मध्य तक ग्लोबल डिफेंस कंपनियों की मार्केट कैप में 19% की CAGR से बढ़ोतरी देखी गई है। भारत का डिफेंस सेक्टर भी इस ट्रेंड के साथ तालमेल बिठा रहा है।
कमोडिटी का दबाव और मैक्रो कंसर्न
परेशानी का सबब बन रहे हैं कच्चे तेल के बढ़ते दाम, जो वेस्ट एशिया में तनाव के चलते $100 प्रति बैरल के पार निकल गए हैं। इससे भारत की इकोनॉमी पर भी दबाव है। अनुमान है कि फाइनेंशियल ईयर 27 में करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) 1.3% से 2.5% तक बढ़ सकता है। महंगाई (CPI) भी अप्रैल 2026 तक 3.8% तक पहुंच सकती है। भारतीय रुपये में भी अस्थिरता है, और साल के अंत तक यह 95 रुपये प्रति डॉलर तक गिर सकता है।
निवेशक फ्लो की डायनामिक्स
घरेलू निवेशकों (DIIs) ने बाज़ार को सहारा दिया है। 2026 के शुरुआती चार महीनों में DIIs ने ₹3 लाख करोड़ से ज़्यादा का निवेश किया, जिससे उनकी हिस्सेदारी बढ़कर 18.9% हो गई है। दूसरी ओर, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने ₹2 लाख करोड़ से ज़्यादा की बिकवाली की है, जिससे उनकी हिस्सेदारी 14 साल के निचले स्तर 14.7% पर आ गई है।
अंदरूनी खतरे और मंदी के कंसर्न
FIIs की लगातार बिकवाली यह संकेत देती है कि वे भारत को लेकर सतर्क हैं। ऐसा लगता है कि भारत AI में अग्रणी देशों जैसे ताइवान और दक्षिण कोरिया में जा रहे कैपिटल फ्लो से वंचित रह रहा है। AI रैली का हार्डवेयर और सेमीकंडक्टर पर केंद्रित होना भारत के लिए एक स्ट्रक्चरल नुकसान है। कच्चे तेल की कीमतें और कमजोर होता रुपया भी आर्थिक स्थिरता के लिए बड़ा खतरा बने हुए हैं। सवाल यह है कि क्या घरेलू खरीदारी, विदेशी बिकवाली के इस दबाव को झेल पाएगी।
भविष्य का आउटलुक
Motilal Oswal का मानना है कि अगर AI ट्रेड में नरमी आती है, तो FIIs का पैसा वापस भारत जैसे ग्रोथ-ओरिएंटेड बाजारों की ओर आ सकता है। भू-राजनीतिक तनाव डिफेंस खर्च को बढ़ाता रहेगा। हालांकि, बाज़ार का भविष्य ग्लोबल कैपिटल फ्लो, कमोडिटी की कीमतों और भारत की स्ट्रक्चरल चुनौतियों से तय होगा।
