बाजार में दिखी जोरदार वापसी, पर विदेशी बिकवाली का डर
मंगलवार, 24 मार्च 2026 को भारतीय शेयर बाजारों ने एक जोरदार वापसी दर्ज की। अमेरिका के राष्ट्रपति द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को रोकने की घोषणा के बाद तत्काल भू-राजनीतिक चिंताएं कम हुईं, जिससे एशियाई बाजारों की राह पर चलते हुए बेंचमार्क Sensex 1.89% की उछाल के साथ 74,068.45 पर बंद हुआ। वहीं, Nifty 50 1.78% चढ़कर 22,912.40 पर पहुंच गया। इस तेजी का असर व्यापक बाजारों पर भी दिखा, जहां BSE मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में लगभग 2.42% की वृद्धि देखी गई। इस दौरान निवेशकों की कुल संपत्ति में ₹7.57 लाख करोड़ का इजाफा हुआ।
FPIs की रिकॉर्ड बिकवाली ने बढ़ाई चिंता
यह सकारात्मक चाल विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) द्वारा की गई भारी बिकवाली के साथ ही देखने को मिली। इसी मंगलवार को FPIs ने $853.2 मिलियन (लगभग ₹8,009.56 करोड़) के शेयर बेचे। यह बिकवाली मार्च 2026 के लिए रिकॉर्ड मासिक आउटफ्लो $11.6 बिलियन (यानी ₹1.07 लाख करोड़) की ओर इशारा करती है। इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने ₹5,867.15 करोड़ का शुद्ध निवेश किया और लगातार बाजार को सहारा देते रहे। दिन की बढ़त के बावजूद, बाजार की भावना सतर्क बनी रही। इंडिया VIX, जो बाजार की अस्थिरता का प्रमुख संकेतक है, 7.44% गिरकर 24.74 पर आ गया, जिससे तत्काल घबराहट तो कम हुई, लेकिन फिर भी उच्च जोखिम की उम्मीदें बनी हुई हैं।
मूल्यांकन और भू-राजनीतिक जोखिम
प्रमुख भारतीय कंपनियों के मूल्यांकन (Valuation) मिले-जुले रहे। HDFC Bank और ICICI Bank जैसे बड़े बैंकों का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) मल्टीपल अपने ऐतिहासिक औसत से नीचे, लगभग 15.5x-16.1x पर था। इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनी Larsen & Toubro (L&T) का P/E अनुपात 29x-31x के आसपास, अपने ऐतिहासिक औसत के करीब था।
यह स्थिति 24.74 के ऊंचे इंडिया VIX के विपरीत है, जो हालिया गिरावट के बावजूद, निवेशकों की चिंता और भविष्य में अस्थिरता की उम्मीदों को दर्शाता है। भू-राजनीतिक जोखिमों और FPI की रिकॉर्ड निकासी ने इस भावना को और बढ़ाया है। मंगलवार की यह तेजी एक बड़ी बिकवाली के बाद आई थी, जिसमें संघर्ष शुरू होने के बाद से Sensex और Nifty लगभग 8.88% और 9% तक गिर गए थे।
कच्चे तेल की कीमतें और रुपये पर दबाव
बाजार में मौजूदा बढ़त अंदरूनी जोखिमों को छिपा नहीं पाती। सबसे बड़ा खतरा मार्च 2026 में FPIs की अभूतपूर्व बिकवाली है। यह बिकवाली पश्चिम एशियाई भू-राजनीतिक तनाव से जुड़ी है, जिसने ब्रेंट क्रूड (Brent crude) की कीमतों को $100 प्रति बैरल से ऊपर धकेल दिया है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें मुद्रास्फीति, बड़े चालू खाते के घाटे (current account deficit) और कमजोर रुपये का कारण बनती हैं, जो कॉर्पोरेट मुनाफे और निवेशकों के रिटर्न को नुकसान पहुंचाता है।
सीधे सैन्य कार्रवाई में ठहराव से कुछ राहत मिली है, लेकिन ईरान द्वारा बातचीत को खारिज करना और क्षेत्रीय छिटपुट झड़पें यह संकेत देती हैं कि भू-राजनीतिक स्थिति अस्थिर बनी हुई है। संघर्ष शुरू होने के बाद से ही बाजार ने लगभग ₹48 लाख करोड़ का निवेशक धन गंवा दिया है। ऊंचे इंडिया VIX, अपनी गिरावट के बावजूद, बाजार की नाजुकता को उजागर करता है।
आगे क्या?
बाजार विश्लेषकों ने सावधानी बरतने की सलाह दी है, और एक ट्रेंड रिवर्सल की पुष्टि के लिए लगातार बढ़त की आवश्यकता पर जोर दिया है। Geojit Investments के विनोद नायर ने कहा कि मौजूदा रैली से राहत मिली है, लेकिन निवेशक सतर्क हैं। HDFC Securities के विनय रजनी ने नोट किया कि Nifty को 23,378 पर रेजिस्टेंस और 22,600 के आसपास सपोर्ट का सामना करना पड़ेगा। बाजार की भविष्य की दिशा भू-राजनीतिक तनावों में कमी और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता पर निर्भर करती है।