जहां दुनियाभर के बाजार भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ती तेल की कीमतों से जूझ रहे हैं, वहीं भारतीय शेयर बाजार ने गजब की मजबूती दिखाई है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और तेल की कीमतों में उछाल ने ग्लोबल मार्केट को परेशान कर रखा है। ब्रेंट क्रूड $100 के करीब और WTI क्रूड $90 प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। वहीं, डॉलर के मजबूत होने और बॉन्ड यील्ड (Bond Yield) बढ़ने के कारण सोना और चांदी जैसी सुरक्षित निवेश वाली संपत्तियां (Safe-haven assets) दबाव में हैं।
लेकिन इन सब के बीच, भारतीय शेयर बाजार में खूब खरीदारी हुई। BSE सेंसेक्स 1,372 अंक चढ़कर 74,068 पर बंद हुआ, वहीं NSE निफ्टी 22,912 के स्तर पर जा पहुंचा। यह 2% की तेजी चौतरफा खरीदारी का नतीजा थी, जिसने वैश्विक चिंताओं को पीछे छोड़ दिया।
सरकार ने ईंधन की सप्लाई को लेकर भरोसा दिलाया है, जिससे बाजार को सहारा मिला। दिल्ली सरकार के बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) पर ₹1,03,700 करोड़ के भारी आवंटन ने भी सेंटीमेंट को मजबूत किया है। वहीं, मजबूत फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व (Foreign Exchange Reserves) और RBI की करेंसी मैनेज करने की क्षमता ने भी भारतीय बाजार को इस बार ज्यादा लचीला बनाया है।
हालांकि, कुछ कंपनियों पर दबाव भी है। HDFC Bank के शेयर में नेतृत्व परिवर्तन के कारण उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, पर ICICI सिक्योरिटीज ने इसके लिए ₹1,120 का टारगेट प्राइस (Target Price) दिया है। Vedanta जैसी कंपनियों पर 190.3% का हाई डेट-टू-इक्विटी रेशियो (Debt-to-Equity Ratio) चिंता का विषय है, वहीं Adani Enterprises का भी यह रेशियो 177.77% है।
यह याद रखना जरूरी है कि भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा कच्चा तेल आयात (Import) करता है, इसलिए तेल की कीमतों में लंबा उछाल देश के करंट अकाउंट डेफिसिट (Current Account Deficit), रुपये और महंगाई पर असर डाल सकता है। आगे चलकर, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक स्थिति और घरेलू ग्रोथ पर बाजार की चाल निर्भर करेगी।